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Rishikesh News: परमार्थ निकेतन में शुरू हुई मां शबरी रामलीला
Thu, 02 Oct 2025 01:50 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Thu, 02 Oct 2025 01:50 AM IST
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परमार्थ निकेतन में मां शबरी रामलीला का उद्घाटन करते स्वामी चिदानंद सरस्वती व अन्य। स्रोत परमार्
परमार्थ निकेतन में मां शबरी रामलीला का आयोजन हुआ। यह रामलीला विशेषत: वनवासियों, जन जातियों और आदिवासियों की संस्कृति, आस्था और जीवन मूल्यों को समर्पित है।
आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, साध्वी भगवती सरस्वती, सैस फाउंडेशन के सुरेंद्र बक्शी ने मां शबरी रामलीला का उद्घाटन किया। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि श्री रामकथा अमृत में मां शबरी का चरित्र एक ऐसा अमिट दीप है, जो त्याग, भक्ति और समर्पण की ज्योति से युगों को आलोकित करता आ रहा है। मां शबरी की कथा हमें संदेश देती है कि प्रभु तक पहुंचने का मार्ग केवल राजमहलों, यज्ञों और वैभव से होकर नहीं जाता, बल्कि प्रेम, निर्मल भाव और निष्ठा से ही होकर गुजरता है।
मां शबरी रामलीला केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारत की उन जड़ों का पुर्नआविष्कार है जो हमारी वनवासी और आदिवासी परंपराओं में रची बसी है। साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि मां शबरी रामलीला का आयोजन नारी की भक्ति और जनजातीय चेतना का एक अनुपम उत्सव है।
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मां शबरी की कथा और रामलीला हमें यह प्रेरणा देती है कि हम सब अपने भीतर की शबरी को जागृत करें और भक्ति, सरलता और प्रेम के साथ जीवन जियें। सुरेंद्र बक्शी ने कहा कि भारत की पहली शबरी रामलीला एक सांस्कृतिक मील का पत्थर है। भारत के सांस्कृतिक इतिहास में यह पहला अवसर है, जब विशेष रूप से मां शबरी के चरित्र पर केंद्रित रामलीला प्रस्तुत की जा रही है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अभूतपूर्व पहल है।
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आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती, साध्वी भगवती सरस्वती, सैस फाउंडेशन के सुरेंद्र बक्शी ने मां शबरी रामलीला का उद्घाटन किया। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि श्री रामकथा अमृत में मां शबरी का चरित्र एक ऐसा अमिट दीप है, जो त्याग, भक्ति और समर्पण की ज्योति से युगों को आलोकित करता आ रहा है। मां शबरी की कथा हमें संदेश देती है कि प्रभु तक पहुंचने का मार्ग केवल राजमहलों, यज्ञों और वैभव से होकर नहीं जाता, बल्कि प्रेम, निर्मल भाव और निष्ठा से ही होकर गुजरता है।
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मां शबरी रामलीला केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारत की उन जड़ों का पुर्नआविष्कार है जो हमारी वनवासी और आदिवासी परंपराओं में रची बसी है। साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि मां शबरी रामलीला का आयोजन नारी की भक्ति और जनजातीय चेतना का एक अनुपम उत्सव है।
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मां शबरी की कथा और रामलीला हमें यह प्रेरणा देती है कि हम सब अपने भीतर की शबरी को जागृत करें और भक्ति, सरलता और प्रेम के साथ जीवन जियें। सुरेंद्र बक्शी ने कहा कि भारत की पहली शबरी रामलीला एक सांस्कृतिक मील का पत्थर है। भारत के सांस्कृतिक इतिहास में यह पहला अवसर है, जब विशेष रूप से मां शबरी के चरित्र पर केंद्रित रामलीला प्रस्तुत की जा रही है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अभूतपूर्व पहल है।