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आचरणहीन मनुष्य को वेद भी नहीं कर सकते पवित्र
ब्यूरो /अमर उजाला/ऋषिकेश।
Updated Sun, 05 Feb 2017 01:00 AM IST
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कथावाचक आचार्य रमेश चंद्र शास्त्री।
- फोटो : amar ujala
कथा वाचक आचार्य रमेशचंद्र शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत में भगवान के परमसत्य रूप का वर्णन हैं। इसमें परमधर्म का निरूपण और पुराणों में धर्म का वर्णन हैं। कण-कण में ईश्वर के दर्शन करते हुए परमात्मा की उपासना ही मानव जीवन का परम लक्ष्य है। भागवत की यही भक्ति प्राणी से प्रेम करने का संदेश देती है।
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हरिद्वार रोड स्थित गंगा व्यू के समीप आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक आचार्य रमेशचंद्र शास्त्री ने भक्तों को कुंती स्तुति और अनुसूया चरित्र सुनाया। उन्होंने कहा कि माता अनुसूया ने अपने आचरण के बल पर त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश को बालक बना दिया था।
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आचरण अच्छा हो तो मनुष्य अपने जीवन में हर ऊंचाईयों को आसानी से प्राप्त कर सकता है। आचरणहीन मनुष्य कितना भी ज्ञानी और विद्वान क्यों न हो, वह न अपना हित कर सकता है और न ही देश का। आचरणहीन मनुष्य को वेद भी पवित्र नहीं कर सकते।
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इस अवसर पर लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, देवव्रत अग्रवाल, पुष्पेंद्र अग्रवाल, रविंद्र अग्रवाल, संजय अग्रवाल, कैलाशचंद्र अग्रवाल, कुलदीप घारिया, राकेश चंद्र, मनीष अग्रवाल, दीपक थापा, गोपाल अग्रवाल सेवाराम, शेर सिंह समेत बड़ी संख्या लोग उपस्थित रहे।