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जरा संभल के चले 147 गड्ढें हैं इस राह में
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ऋषिकेश। बरसात शुरू हुई हो गई है। मानसून आने वाला है। ऐसे में सड़कों के गड्ढ़े परेेशानी खड़ी सकती है। मुख्य सड़कों को छोड़ दिया जाए तो क्षेत्रों के आंतरिक सड़कों पर लोगों को 147 गड्ढों में सड़क ढूंढनी पड़ रही है। ऋषिकेश, डोईवाला, श्यामपुर, रायवाला सभी जगह की आंतरिक सड़कों यही हाल हैं। जिन क्षेत्रों के लोग सक्रिय रहते हैं वहां विधायक निधि, सांसद निधि, राज्य वित्त, जिला योजना, राज्य योजना से सड़कें बन जाती हैं, लेकिन जहां जागरुकता का आभाव है, वहां गड्ढों से भरी सड़कों पर चलना और गिरकर घायल होना लोगों की मजबूरी बन गई है।
नगर निगम नहीं ले रहा सुध
ऋषिकेश। यहां दुर्गा मंदिर से आईएसबीटी की ओर से जाने वाली वाली 150 मीटर सड़क पर करीब 25 गड्ढ़े हैं। इस रोड पर ऋषिकेश से पर्वतीय क्षेत्रों की ओर से जाने वाले लोगों का आवागमन रहता है। यात्रियों के ऑटो विक्रम भी इसी रास्ते पर जाते हैं, यहां पर रोड की हालत ऐसी है कि गड्ढों उछलकर कई ऑटो और ई-रिक्शा पलट चुके हैं। लेकिन करोड़ों रुपये का बजट होने के बाद भी नगर निगम प्रशासन इस रोड की सुध ले रहा है।
डोईवाला। यहां थानो क्षेत्र के कुड़ियाल गांव को जोड़ने वाले मार्ग की हालत जर्जर है। इस मार्ग की लंबाई करीब डेढ़ किलोमीटर है। भूमिया मंदिर से रामनगर डांडा की ओर जाने वाले मार्ग से यह मार्ग कटता है, जो कुड़ियाल गांव तक पहुंचता है। इस मार्ग पर भी करीब 32 गड्ढ़े हैं। वन विभाग के अधीन होने के कारण इस मार्ग की कई सालों से मरम्मत नहीं हो पाई। इस मार्ग का उपयोग रामनगर डांडा और कुड़ियाल के लोग प्रयोग करते हैं। लोग इस मार्ग को लोनिवि ऋषिकेश को हस्तांतरण करने की काफी समय से मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बरसाती के पानी से भरे इन गड्ढों में रपटकर कई ग्रामीण चोटिल हो चुके हैं।
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श्यामपुर। खदरी के विष्णु विहार मेें सड़कों के बुरे हैं, स्थानीय निवासियों का आरोप है कि एक किलोमीटर रोड में 40 के करीब गड्ढे़े हैं। कई बार गड्ढ़े में गिरकर कॉलोनीवासी घायल हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस रोड का डामरीकरण करने के लिए जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दिए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लोग आए दिन गड्ढों में गिरकर घायल होते हैं।
रायवाला। यहां प्रतीतनगर डांडी मार्ग के बुरे हाल हैं। करीब डेढ़ साल पहले जल संस्थान की ओर से पेयजल लाइन बिछाने के लिए गलियों की खुदाई की थी। लेकिन एक साल बमीत जाने के बाद भी गलियों की रोड की मरम्मत नहीं हुई। करीब पांच किलोमीटर की रोड पर 50 से अधिक गड्ढ़े हो रखे हैं। इन गड्ढों में गिरकर कई लोग चोटिल हो चुके हैं। लोगों की मांग के बाद भी गलियों की मरम्मत नहीं हो पा रही है।
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नगर निगम नहीं ले रहा सुध
ऋषिकेश। यहां दुर्गा मंदिर से आईएसबीटी की ओर से जाने वाली वाली 150 मीटर सड़क पर करीब 25 गड्ढ़े हैं। इस रोड पर ऋषिकेश से पर्वतीय क्षेत्रों की ओर से जाने वाले लोगों का आवागमन रहता है। यात्रियों के ऑटो विक्रम भी इसी रास्ते पर जाते हैं, यहां पर रोड की हालत ऐसी है कि गड्ढों उछलकर कई ऑटो और ई-रिक्शा पलट चुके हैं। लेकिन करोड़ों रुपये का बजट होने के बाद भी नगर निगम प्रशासन इस रोड की सुध ले रहा है।
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डोईवाला। यहां थानो क्षेत्र के कुड़ियाल गांव को जोड़ने वाले मार्ग की हालत जर्जर है। इस मार्ग की लंबाई करीब डेढ़ किलोमीटर है। भूमिया मंदिर से रामनगर डांडा की ओर जाने वाले मार्ग से यह मार्ग कटता है, जो कुड़ियाल गांव तक पहुंचता है। इस मार्ग पर भी करीब 32 गड्ढ़े हैं। वन विभाग के अधीन होने के कारण इस मार्ग की कई सालों से मरम्मत नहीं हो पाई। इस मार्ग का उपयोग रामनगर डांडा और कुड़ियाल के लोग प्रयोग करते हैं। लोग इस मार्ग को लोनिवि ऋषिकेश को हस्तांतरण करने की काफी समय से मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बरसाती के पानी से भरे इन गड्ढों में रपटकर कई ग्रामीण चोटिल हो चुके हैं।
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श्यामपुर। खदरी के विष्णु विहार मेें सड़कों के बुरे हैं, स्थानीय निवासियों का आरोप है कि एक किलोमीटर रोड में 40 के करीब गड्ढे़े हैं। कई बार गड्ढ़े में गिरकर कॉलोनीवासी घायल हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस रोड का डामरीकरण करने के लिए जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दिए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लोग आए दिन गड्ढों में गिरकर घायल होते हैं।
रायवाला। यहां प्रतीतनगर डांडी मार्ग के बुरे हाल हैं। करीब डेढ़ साल पहले जल संस्थान की ओर से पेयजल लाइन बिछाने के लिए गलियों की खुदाई की थी। लेकिन एक साल बमीत जाने के बाद भी गलियों की रोड की मरम्मत नहीं हुई। करीब पांच किलोमीटर की रोड पर 50 से अधिक गड्ढ़े हो रखे हैं। इन गड्ढों में गिरकर कई लोग चोटिल हो चुके हैं। लोगों की मांग के बाद भी गलियों की मरम्मत नहीं हो पा रही है।