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हिंदी को मजबूत बनाने से ही बनेगा सशक्त हिंदुस्तान
सार
हिंदी हमारी राजभाषा ही नहीं, वरन पूरे हिंदुस्तान को संगठित रखने का काम करती है।हिंदी भाषा को उन्नत बनाकर रोजगार के नए अवसरों का भी सृजन किया जा सकता है।शैक्षिक संस्थानों के पाठ्यक्रमों में हिंदी को रसहीन बना दिया गया है।
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विस्तार
हिंदी हमारी राजभाषा ही नहीं, वरन पूरे हिंदुस्तान को संगठित रखने का काम करती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी ने एक अलग पहचान को कायम किया है। विद्वानों की मानें तो हिंदी विश्व की पांच सबसे ताकतवर भाषाओं में से एक है। वर्तमान समय में देश का हर तबका हिंदी को सशक्त रूप में देखना चाहता है। भाषाओं की विविधता वाले देश में सब हिंदी बोलना पसंद करते हैं। यहां तक विदेशी सैलानी आकर भी हिंदी में बोलचाल करने लगते हैं। हिंदी दिवस के मौके पर हिंदी प्रेमी लोगों ने हिंदी भाषा की मजबूती और इसे पूरी तरह से आमजन की भाषा बनाकर कामकाज करने की पुरजोर वकालत की।
हिंदी भाषा को उन्नत बनाकर रोजगार के नए अवसरों का भी सृजन किया जा सकता है। शैक्षिक संस्थानों के पाठ्यक्रमों में हिंदी को रसहीन बना दिया गया है। हिंदी में आज भी महत्वपूर्ण शोध ओर न्यायालयों के निर्णयों का न आना इसकी पूर्ण महत्ता पर एक अवरोध है। जिस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
अश्वनी गुप्ता, हिंदी विभागाध्यक्ष, पीआईसी
हिंदी की सरलता और सुंदरता को प्रसिद्ध विद्वानों ने स्वीकार किया है। हिंदी सामान्य लोगों को समझने और आत्मसात करने के लिए सरल शब्दों में गंभीर संदेश देती है। हमें एक दिन नहीं वरन पूरे वर्ष भर हिंदी को प्रभावी बनाने के लिए काम करना होगा। इसके लिए देश के हर वर्ग को अपनी भूमिका का निवर्हन करना होगा।
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प्रनिल धवन जोशी, उप डाकपाल डोइवाला
देश में हिंदी बोलने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आज 50 प्रतिशत से अधिक लोग हिंदी को प्रथम भाषा के रूप में उपयोग करते हैं। विश्व के 40 से अधिक देशों 600 से अधिक शैक्षिक संस्थाओं में हिंदी पढ़ाई जाती है। हिंदी के उन्नयन के लिए हर वर्ग को इसे अपनत्व देना होगा।
राजन गोयल, व्यवसायी
हिंदी के प्रति हमें समर्पण भाव से काम करना होगा। हिंदी जैसी सरल भाषा दुनिया में कोई ओर नहीं है। जापान और जर्मनी जैसे देशों ने अपनी-अपनी भाषाओं के माध्यम से विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में नई जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं, तो हम अपनी हिंदी के जरिए भी ऐसा कर सकते हैं।
सीमा रावत, शिक्षिका
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हिंदी भाषा को उन्नत बनाकर रोजगार के नए अवसरों का भी सृजन किया जा सकता है। शैक्षिक संस्थानों के पाठ्यक्रमों में हिंदी को रसहीन बना दिया गया है। हिंदी में आज भी महत्वपूर्ण शोध ओर न्यायालयों के निर्णयों का न आना इसकी पूर्ण महत्ता पर एक अवरोध है। जिस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
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अश्वनी गुप्ता, हिंदी विभागाध्यक्ष, पीआईसी
हिंदी की सरलता और सुंदरता को प्रसिद्ध विद्वानों ने स्वीकार किया है। हिंदी सामान्य लोगों को समझने और आत्मसात करने के लिए सरल शब्दों में गंभीर संदेश देती है। हमें एक दिन नहीं वरन पूरे वर्ष भर हिंदी को प्रभावी बनाने के लिए काम करना होगा। इसके लिए देश के हर वर्ग को अपनी भूमिका का निवर्हन करना होगा।
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प्रनिल धवन जोशी, उप डाकपाल डोइवाला
देश में हिंदी बोलने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आज 50 प्रतिशत से अधिक लोग हिंदी को प्रथम भाषा के रूप में उपयोग करते हैं। विश्व के 40 से अधिक देशों 600 से अधिक शैक्षिक संस्थाओं में हिंदी पढ़ाई जाती है। हिंदी के उन्नयन के लिए हर वर्ग को इसे अपनत्व देना होगा।
राजन गोयल, व्यवसायी
हिंदी के प्रति हमें समर्पण भाव से काम करना होगा। हिंदी जैसी सरल भाषा दुनिया में कोई ओर नहीं है। जापान और जर्मनी जैसे देशों ने अपनी-अपनी भाषाओं के माध्यम से विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में नई जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं, तो हम अपनी हिंदी के जरिए भी ऐसा कर सकते हैं।
सीमा रावत, शिक्षिका