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Rishikesh News: अधूरी तैयारियों के साथ तीर्थयात्रियों की व्यवस्था बनाने में जुटा स्वास्थ्य विभाग
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ऋषिकेश। चारधाम यात्रा जारी है, लेकिन चारधाम यात्रा के प्रवेश द्वार पर स्थित एसपीएस सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। यहां अब भी अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। चिकित्सक और स्टाफ नहीं होने के कारण आईसीयू का संचालन बंद है। ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्थाएं भी लड़खड़ा रही हैं। ओपीडी में आने वाले मरीजों को भी स्वास्थ्य सेवाओं का उचित लाभ नहीं मिल रहा है।
अस्पताल में दो फिजीशियन चिकित्सकों के पद सृजित हैं, लेकिन यहां एक ही फिजीशियन तैनात हैं। पड़ताल के क्रम में देखा गया कि फिजीशियन कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़ थी। इमरजेंसी के समीप बना 10 बेड का ट्रॉमा सेंटर स्टाफ की कमी से जूझ रहा था। आगे द्वितीय तल पर सर्जन कक्ष के बाहर ताला लटका मिला। यहां से 10 मिनट में तीन मरीज लटका ताला देखकर वापस लौट चुके थे। जानकारी लेने पर पता चला कि अस्पताल में बीते एक साल से सर्जन का पद रिक्त है। इसी तरह तृतीय तल पर बने 10-10 बेड के निक्कू और पिक्कू आईसीयू वार्ड पर ताले लटके थे। अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने बताया यहां के लिए चिकित्सक और कर्मी नहीं हैं।
कई वर्षों से संबद्ध सेवाओं का लाभ ले रहे स्वास्थ्य कर्मचारी
एसपीएस राजकीय चिकित्सालय से एक महिला चिकित्साधिकारी और दो नर्सिंग स्टाफ कई वर्षों से संबद्ध सेवाओं का लाभ ले रही हैं। महिला चिकित्साधिकारी कोरोनेशन अस्पताल तो नर्सिंग स्टाफ महिलाएं गांधी शताब्दी अस्पताल में जमी हुई हैं। जबकि, सीएमओ स्तर से इन्हें मूल स्थान पर तैनाती के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। इसके बावजूद ये वहीं तैनात हैं, जिससे तीर्थयात्रियों की सहूलियत में बाधा आ रही है।
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सरकारी अस्पताल में पहले चार महिला चिकित्सक तैनात थीं। इसमें करीब एक महीने पहले एक महिला चिकित्सक ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। वर्तमान में तैनात तीन में से एक महिला की ड्यूटी ऑपरेशन थिएटर और दूसरी महिला रात्रि ड्यूटी पर काम करती है। वहीं, तीसरी महिला चिकित्सक के भरोसे ओपीडी में महिलाओं को उपचार चल रहा है।
कोट ::::
अस्पताल में चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ की कमी को लेकर कई बार शासन स्तर पर पत्राचार किया जा चुका है। इनकी नियुक्ति शासन स्तर से ही होगी। - डॉ. पीके चंदोला, सीएमएस
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अस्पताल में दो फिजीशियन चिकित्सकों के पद सृजित हैं, लेकिन यहां एक ही फिजीशियन तैनात हैं। पड़ताल के क्रम में देखा गया कि फिजीशियन कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़ थी। इमरजेंसी के समीप बना 10 बेड का ट्रॉमा सेंटर स्टाफ की कमी से जूझ रहा था। आगे द्वितीय तल पर सर्जन कक्ष के बाहर ताला लटका मिला। यहां से 10 मिनट में तीन मरीज लटका ताला देखकर वापस लौट चुके थे। जानकारी लेने पर पता चला कि अस्पताल में बीते एक साल से सर्जन का पद रिक्त है। इसी तरह तृतीय तल पर बने 10-10 बेड के निक्कू और पिक्कू आईसीयू वार्ड पर ताले लटके थे। अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने बताया यहां के लिए चिकित्सक और कर्मी नहीं हैं।
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कई वर्षों से संबद्ध सेवाओं का लाभ ले रहे स्वास्थ्य कर्मचारी
एसपीएस राजकीय चिकित्सालय से एक महिला चिकित्साधिकारी और दो नर्सिंग स्टाफ कई वर्षों से संबद्ध सेवाओं का लाभ ले रही हैं। महिला चिकित्साधिकारी कोरोनेशन अस्पताल तो नर्सिंग स्टाफ महिलाएं गांधी शताब्दी अस्पताल में जमी हुई हैं। जबकि, सीएमओ स्तर से इन्हें मूल स्थान पर तैनाती के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। इसके बावजूद ये वहीं तैनात हैं, जिससे तीर्थयात्रियों की सहूलियत में बाधा आ रही है।
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सरकारी अस्पताल में पहले चार महिला चिकित्सक तैनात थीं। इसमें करीब एक महीने पहले एक महिला चिकित्सक ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। वर्तमान में तैनात तीन में से एक महिला की ड्यूटी ऑपरेशन थिएटर और दूसरी महिला रात्रि ड्यूटी पर काम करती है। वहीं, तीसरी महिला चिकित्सक के भरोसे ओपीडी में महिलाओं को उपचार चल रहा है।
कोट ::::
अस्पताल में चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ की कमी को लेकर कई बार शासन स्तर पर पत्राचार किया जा चुका है। इनकी नियुक्ति शासन स्तर से ही होगी। - डॉ. पीके चंदोला, सीएमएस