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Rishikesh News: स्क्रीन पर टिकी नजर, गर्दन पर पड़ रहा असर

Thu, 13 Aug 2026 05:37 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Updated Thu, 13 Aug 2026 05:37 PM IST
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Eyes Fixed on the Screen, Strain on the Neck
- होमवर्क से गेमिंग तक मोबाइल पर निर्भरता बनी चिंता,
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-राजकीय उपजिला चिकित्सालय में रोजाना 5-6 बच्चे पहुंच रहे गर्दन दर्द की शिकायत लेकर
- लंबे समय तक स्क्रीन देखने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर बढ़ रहा दबाव
ऋषिकेश। बच्चों के हाथों में किताब-कॉपी की जगह मोबाइल का बढ़ता इस्तेमाल उनके स्वास्थ्य के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। स्कूल का होमवर्क हो या प्रोजेक्ट तैयार करना, पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक बच्चे लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहते हैं। इसके अलावा मैदान में खेलने के बजाय मोबाइल पर गेम खेलने की बढ़ती आदत भी बच्चों की शारीरिक सक्रियता को प्रभावित कर रही है। इसका असर उनकी गर्दन, आंखों और शरीर की मुद्रा (पोश्चर) पर दिखाई देने लगा है।
राजकीय उपजिला चिकित्सालय में तैनात फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ विकास धस्माना बताते हैं कि इन दिनों बच्चों में गर्दन में दर्द और इससे जुड़ी परेशानी की शिकायत बढ़ती जा रही है। प्रतिदिन करीब 7 से 8 बच्चे यह शिकायत लेकर उनके पास पहुंच रहे हैं। कम उम्र में बच्चों में इस तरह की समस्या होना अभिभावकों के लिए चेतावनी से कम नहीं है। फिजियोथेरेपिस्ट धस्माना बताते हैं कि मोबाइल देखते समय बच्चे अक्सर गर्दन को लंबे समय तक नीचे झुकाए रखते हैं। लगातार इसी मुद्रा में बैठे रहने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर खिंचाव बढ़ सकता है और दर्द, अकड़न व असहजता जैसी समस्याएं उत्पन्न हाे सकती हैं। लंबे समय तक खराब पोश्चर में स्क्रीन देखने की आदत बच्चों में गर्दन से जुड़ी मांसपेशीय समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती है।
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होमवर्क भी मोबाइल पर, खेल का मैदान खाली
अभिभावक रोशनी देवी, हिमानी रावत का कहना है कि डिजिटल माध्यम ने बच्चों की पढ़ाई को आसान जरूर बनाया है लेकिन इसके साथ स्क्रीन टाइम भी बढ़ा है। ऑनलाइन सामग्री देखने, प्रोजेक्ट तैयार करने और जानकारी जुटाने के लिए बच्चे घंटों मोबाइल या अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ाई खत्म होने के बाद गेमिंग और वीडियो देखने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस तरह बच्चों का एक बड़ा हिस्सा दिन का काफी समय स्क्रीन के सामने गुजार रहा है। शारीरिक गतिविधियों और आउटडोर खेलों में कमी भी चिंता का विषय है।
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आंखों पर भी पड़ रहा असर
- राजकीय उपजिला चिकित्सालय में तैनात नेत्र सर्जन डॉ. स्निग्धा ने बताया कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, जलन, सूखापन, सिरदर्द और अस्थायी धुंधलापन जैसी शिकायतें हो सकती हैं। मोबाइल को आंखों के बहुत करीब रखकर देखने और अंधेरे में स्क्रीन इस्तेमाल करने की आदत समस्या को और बढ़ा सकती है। मोबाइल का अधिक प्रयोग बच्चों की आंखों को भी प्रभावित कर रहा है। आंखो से संबंधित समस्या से पीड़ित बच्चे बड़ी संख्या में हर दिन उनकी ओपीडी में पहुंच रहे हैं।


मैदान में लौटें बच्चे, स्क्रीन से बने दूरी
अभिभावकों की चिंता का सबसे बड़ा कारण यह है कि मोबाइल बच्चों के मनोरंजन का साधन भर नहीं रह गया है बल्कि उनकी दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा है। मोबाइल पर गेम खेलने के बजाय मैदान में खेलना, लगातार बैठे रहने के बजाय शारीरिक गतिविधियों में शामिल होना और स्क्रीन के बजाय किताबों से पढ़ने की आदत विकसित करना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।
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