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मानसून सीजन में भी खुले कैम्प, बड़े खतरे से पर्यटक अनजान
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लक्ष्मणझूला-नीलकंठ मोटर मार्ग पर घट्टूगाड़ के समीप कालीकुंड़ में स्नान करते पर्यटक।
- फोटो : RISHIKESH
ऋषिकेश। मानसून सीजन शुरू हो गया। लगातार बारिश से गंगा और उसकी सहायक नदियां ऊफान पर हैं। जिससे नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। इसके बावजूद भी घट्टूगाड़, बैरागढ़, शिवपुरी आदि क्षेत्रों में कैंपों का संचालन किया जा रहा है। ऐसे में अगर अचानक गंगा और सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ता है तो पर्यटकों की जान खतरे में पड़ सकती है।
पौड़ी जिला अंतर्गत बैरागड़, मोहनचट्टी, घट्टूगाड़, नैल, फूलचट्टी आदि क्षेत्रों में गंगा की सहायक हेंवल नदी तट पर मानसून सीजन में भी कैंप संचालित हो रहे हैं। इन कैंपों में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश आदि प्रांतों के सैलानी पहुंच रहे हैं। कैंप पर्यटकों से पूरी तरह से पैक हैं। वर्ष 2014 अगस्त में मानसून सीजन के दौरान हेंवल नदी ऊफान पर आ गई थी। नदी के ऊफान पर आने से इन जगहों पर संचालित कुछ कैंप नदी के तेज बहाव में बह गए थे। हेंवल नदी ऊफान पर आने से बैरागढ़ गांव में कई परिवारों के मकान जमींदोज हो गए थे। उस दौरान प्रशासन ने ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए हेली सेवा से रेस्क्यू किया था। घट्टूगाड़ में भी हेंवल नदी ने रौद्ररुप धारण कर भयंकर तबाही मचाई थी। उसके बावजूद भी स्थानीय प्रशासन इससे सबक नहीं ले रहा है। नतीजन बैरागढ़, फूलचट्टी, घट्टुगाड़, नैल आदि क्षेत्रों में कैंप संचालित हो रहे हैं। इन दिनों लगातार बारिश हो रही है। ऐसे में यदि फिर हेंवल नदी ने रौद्ररुप धारण कर लिया तो कैंपों में रह रहे पर्यटकों की जान खतरे में पड़ सकती है। लेकिन हैरत की बात है कि स्थानीय प्रशासन आने वाली घटना से अनजान बना हुआ है। उधर टिहरी जिला अंतर्गत शिवपुरी क्षेत्र का भी यही हाल है। यहां कैंप संचालकों ने गंगा की सहायक नदियों के तट पर कैंप सजाए हुए हैं। लेकिन मानसून सीजन में ये भी खतरे से अनजान बने हुए हैं।
फोटो-
बारिश के बीच झरनों में नहाने पहुंच रहे पर्यटक
ऋषिकेश। बारिश के बीच भी योगनगरी में पर्यटकों का आवागमन जारी है, पर्यटक मौज मस्ती के लिए झरनों की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन बारिश के दौरान मिट्टी की पकड़ कमजोर हो जाती है। ऐसे में झरनों के ऊपर से मलबे और पत्थरों के गिरने की संभावना बढ़ जाती है। जिससे पर्यटकों के घायल होने का खतरा बना रहता है।
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मानसून सीजन में इन दिनों पर्यटक नीरगड्डू, कालीकुंड और फूलचट्टी के झरनों की ओर रुख कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन की ओर से झरना की ओर जा रहे सैलानियों के लिए सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। बारिश के मौसम में पर्यटक बेखबर हैं झरनों की नीचे नहाना किसी खतरे से खाली नहीं है। बारिश में मिट्टी की पकड़ कमजोर हो जाती है। जिससे क्षेत्र में भूस्खलन और मलबा गिरने की आशंका बढ़ जाती है। लेकिन सैलानियों को इसकी कोई परवाह नहीं है। इन दिनों झरनों को वेग तेज हो गया है। झरने तेज होने से उसके नीचे बने कुंड भी अधिक गहरे हो गए हैं। बाहर से आने वाले पर्यटकों को इसकी गहराई का कोई अंदाजा नहीं होता है। जिससे दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। वर्ष 2016 लक्ष्मणझूला-नीलकंठ मोटर मार्ग पर घट्टूगाड़ स्थित कालीकुंड में मानसून सीजन में नहाने के दौरान दिल्ली के एक पर्यटक और वर्ष 2015 में नीरगड्डू झरने में डूबने से दो पर्यटकों की मौत हो गई थी।
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पौड़ी जिला अंतर्गत बैरागड़, मोहनचट्टी, घट्टूगाड़, नैल, फूलचट्टी आदि क्षेत्रों में गंगा की सहायक हेंवल नदी तट पर मानसून सीजन में भी कैंप संचालित हो रहे हैं। इन कैंपों में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश आदि प्रांतों के सैलानी पहुंच रहे हैं। कैंप पर्यटकों से पूरी तरह से पैक हैं। वर्ष 2014 अगस्त में मानसून सीजन के दौरान हेंवल नदी ऊफान पर आ गई थी। नदी के ऊफान पर आने से इन जगहों पर संचालित कुछ कैंप नदी के तेज बहाव में बह गए थे। हेंवल नदी ऊफान पर आने से बैरागढ़ गांव में कई परिवारों के मकान जमींदोज हो गए थे। उस दौरान प्रशासन ने ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए हेली सेवा से रेस्क्यू किया था। घट्टूगाड़ में भी हेंवल नदी ने रौद्ररुप धारण कर भयंकर तबाही मचाई थी। उसके बावजूद भी स्थानीय प्रशासन इससे सबक नहीं ले रहा है। नतीजन बैरागढ़, फूलचट्टी, घट्टुगाड़, नैल आदि क्षेत्रों में कैंप संचालित हो रहे हैं। इन दिनों लगातार बारिश हो रही है। ऐसे में यदि फिर हेंवल नदी ने रौद्ररुप धारण कर लिया तो कैंपों में रह रहे पर्यटकों की जान खतरे में पड़ सकती है। लेकिन हैरत की बात है कि स्थानीय प्रशासन आने वाली घटना से अनजान बना हुआ है। उधर टिहरी जिला अंतर्गत शिवपुरी क्षेत्र का भी यही हाल है। यहां कैंप संचालकों ने गंगा की सहायक नदियों के तट पर कैंप सजाए हुए हैं। लेकिन मानसून सीजन में ये भी खतरे से अनजान बने हुए हैं।
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बारिश के बीच झरनों में नहाने पहुंच रहे पर्यटक
ऋषिकेश। बारिश के बीच भी योगनगरी में पर्यटकों का आवागमन जारी है, पर्यटक मौज मस्ती के लिए झरनों की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन बारिश के दौरान मिट्टी की पकड़ कमजोर हो जाती है। ऐसे में झरनों के ऊपर से मलबे और पत्थरों के गिरने की संभावना बढ़ जाती है। जिससे पर्यटकों के घायल होने का खतरा बना रहता है।
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मानसून सीजन में इन दिनों पर्यटक नीरगड्डू, कालीकुंड और फूलचट्टी के झरनों की ओर रुख कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन की ओर से झरना की ओर जा रहे सैलानियों के लिए सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। बारिश के मौसम में पर्यटक बेखबर हैं झरनों की नीचे नहाना किसी खतरे से खाली नहीं है। बारिश में मिट्टी की पकड़ कमजोर हो जाती है। जिससे क्षेत्र में भूस्खलन और मलबा गिरने की आशंका बढ़ जाती है। लेकिन सैलानियों को इसकी कोई परवाह नहीं है। इन दिनों झरनों को वेग तेज हो गया है। झरने तेज होने से उसके नीचे बने कुंड भी अधिक गहरे हो गए हैं। बाहर से आने वाले पर्यटकों को इसकी गहराई का कोई अंदाजा नहीं होता है। जिससे दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। वर्ष 2016 लक्ष्मणझूला-नीलकंठ मोटर मार्ग पर घट्टूगाड़ स्थित कालीकुंड में मानसून सीजन में नहाने के दौरान दिल्ली के एक पर्यटक और वर्ष 2015 में नीरगड्डू झरने में डूबने से दो पर्यटकों की मौत हो गई थी।

गंगा की सहायक नदी हेंवल नदी के तट पर इस तरहा सजे कैंप।- फोटो : RISHIKESH