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ब्लैक फंगस: दवा का संकट और लंबा इलाज बना चुनौती

Thu, 27 May 2021 01:07 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 27 May 2021 01:07 AM IST
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Black fungus: drug crisis and lengthy treatment become challenge
ऋषिकेश। कोरोना के बाद ब्लैक फंगस संक्रमण बेकाबू होता जा रहा है। प्रदेश में ब्लैक फंगस से 133 मरीज मिले हैं। जबकि 11 संक्रमितों की मौत भी हो चुकी है। सबसे अधिक 92 संक्रमित एम्स ऋषिकेश में ही हैं भर्ती हैं। ब्लैक फंगस के मरीजों को स्वस्थ होने में दो सप्ताह से लेकर एक माह तक समय लग रहा है। ऊपर से अस्पतालों को पर्याप्त दवाएं नहीं मिल पा रही है।
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देहरादून, उधमसिंहनगर और नैनीताल के 11 अस्पतालों में ब्लैक फंगस के 113 मरीज भर्ती हैं। लेकिन जिस रफ्तार से मरीज बढ़ रहे उस हिसाब से अस्पताल को लाइपोसोमल एम्फोटेरिसिन- बी के इंजेक्शन की आपूर्ति नहीं हो पा रही हे। इससे मरीजों की रिकवरी रेट काफी घट गया। सभी अस्पतालों में से केवल हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट से छह और एम्स ऋषिकेश के दो मरीज ही डिस्जार्च हो हुए हैं। एम्स में भर्ती को एक मरीज को सर्जरी के बाद स्वस्थ होने में 27 दिन लग लग गए। ब्लैक फंगस के मरीजों के इलाज में लाइपोसोमल एम्फोटेरिसिन- बी का अीम रोल होता है। खासकर सर्जरी के बाद मरीज को ठीक करने में इस इंजेक्शन का बड़ा रोल होता है। एम्स ऋषिकेश के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट प्रो. बीके बस्तिया ने बताया कि एक मरीज को लाइपोसोमल एम्फोटेरिसिन- बी के इंजेक्शन की छह से अधिक डोज दी जाती है। मरीजों की संख्या से हिसाब से प्रत्येक दिन करीब 500 इंजेक्शन की आवश्यकता है। यह कोर्स 21 दिन तक चलता है। ऐसे में 92 मरीजों के लिए एम्स ऋषिकेश को 552 इंजेक्शनों की जरूरत है। लेकिन एम्स को इंजेक्शन की 50 से 75 डोज ही मिल पा रही है। एम्स ऋषिकेश अस्पताल प्रशासन के डीन प्रोफेसर यूबी मिश्रा ने बताया कि ब्लैक फंगस केेेे शुरुआत में संक्रमण का पता चल जाए तो मरीज का रिकवरी रेट बढ़ जाता है। ऐसे मरीज जल्दी स्वस्थ होता है। जबकि ऑपरेशन के बाद मरीजों की रिकवर करने में समय लगता है। उन्होंने बताया कि संस्थान में रोजाना ब्लैक फंगस के आठ से दस मरीज भर्ती हो रहे हैं। इनके इलाज के लिए लाइपोसोमल एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की जरूरत होती है। मरीजों की संख्या के लिहाज से अस्पताल को काफी संख्या में इंजेक्शन की जरूरत है। लेकिन मांग के अनुरूप इंजेक्शन की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इंजेक्शन की अपूर्ति को बढ़ाने के शासन से अनुरोध किया गया है।
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