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Rishikesh News: एम्स में भर्ती मरीजों को योग का प्रशिक्षण दे रहा आयुष विभाग

Thu, 16 Apr 2026 03:08 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 16 Apr 2026 03:08 AM IST
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AYUSH department is giving yoga training to patients
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के आयुष इंटीग्रेटिव मेडिसिन विभाग ने निवारक और समग्र स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने के लिए व्यापक एजेंडा तैयार किया है। इस पहल में आईपीडी वार्डों में बेड साइड योग, देखभाल कर्ताओं के लिए वेलनेस कार्यक्रम और रोगी केंद्रित प्रथाओं को आयुष और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की पहल के साथ जोड़ा गया है।
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यह कार्यक्रम भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक चिकित्सा के साथ साक्ष्य आधारित रूप से एकीकृत कर रहा है। इससे रोगियों को मानक उपचार के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य देखभाल प्राप्त हो सकेगा। आयुष इंटीग्रेटिव मेडिसिन विभाग की हेड डॉ. मोनिका पठानिया ने बताया कि विभाग के तहत संचालित बेडसाइड योग चिकित्सा नियमित सेवा बन चुकी है।
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इसके तहत योगिक श्वसन और प्राणायाम अभ्यास मानकों को पूरा करने के लिए पिडियाट्रिक ऑन्कोलाॅजी वार्ड में भर्ती रोगियों का तनाव कम करने और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नियमित स्तर पर योग करवाया जा रहा है। यह योग सत्र बुजुर्ग रोगियों को तनाव प्रबंधन और बेहतर स्वास्थ्य में मदद करता है।
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यूरोलाॅजी वार्ड में मूत्र रोगियों के लिए सर्जरी से पहले और सर्जरी के बाद विशेष योग सत्रों का आयोजन किया जाता है। इससे रिकवरी में मदद मिलती है। वेल बीइंग क्लीनिक में नियमित तौर पर 15-20 मिनट के योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें डॉक्टरों, नर्सों और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों (जेरियाट्रिक मेडिसिन, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, टेलीमेडिसिन, यूरोलॉजी और नेत्र विज्ञान) को शामिल किया जाता है।


यही नहीं देखभाल कर्ताओं और रोगी परिचारकों को भी संरचित तनाव प्रबंधन सत्रों और ओपीडी वेटिंग एरिया में छोटे वाई-ब्रेक अभ्यासों के माध्यम से योग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने बताया कि शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए जरूरी है कि हम योग और प्राणायाम के साथ ही होलिस्टिक हेल्थ को अपनाएं। इससे हम न केवल समग्र स्वास्थ्य की ओर अग्रसर होंगे, बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र को भी इससे मजबूती मिलेगी।
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