ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुविज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश की बिल्डिंग घटिया निर्माण के चलते महज आठ साल में ही जर्जर हो गई है। बिल्डिंग की दीवारों से टाइल और प्लास्टर गिर रहा है। बिल्डिंग की खिड़कियां लटक रही और कई शीशे टूटे गए हैं। लोगों को बिल्डिंग से उचित दूरी बनाए रखने के लिए दीवारों में जगह-जगह चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं।
योगनगरी ऋषिकेश में साल 2012 में एम्स की स्थापना हुई थी। संस्थान में साल 2013 ओपीडी व आईपीडी सेवाएं शुरू कर दी गई थी। जबकि 2014 में ट्रामा सेंटर को चालू कर दिया गया था। एम्स के बिल्डिंग के विभिन्न ब्लॉक का निर्माण बड़ी तेजी के साथ हुआ था। लेकिन अब परत दर परत बिल्डिग के निर्माण कार्य की पोल खुल रही है। अभी एम्स को बने हुए केवल आठ साल हुए है, लेकिन बिल्डिंग के कई ब्लॉक जर्जर हो चुके हैं। एम्स की मुख्य बिल्डिंग और ट्रामा सेंटर के हाल सबसे बुरे हैं। दोनों बिल्डिंग पर बाहर की ओर लगी लाल पत्थर की टाइलें जगह-जगह से टूट कर गिर रही है। वहीं प्लास्टर भी उखड़कर नीचे गिर रहा है। खिड़िकियां ऐसी लटकी के मानो अभी नीचे आ गिर जाएंगी। बिल्डिंग के कई शीशे टूटे हुए है। कई मरीज और तीमारदार एम्स के परिसर में ठीक बिल्डिंग के नीचे बैठे रहते हैं। ऐसे में बिल्डिंग की टाइल, प्लास्टर, खिड़की और शीशे टूटकर अचानक गिरने मरीज और तीमारदार घायल हो सकते हैं। एम्स प्रशासन बिल्डिंग के बाहर चेतावनी बोर्ड लगाकर मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षा उनके के ही जिम्मे छोड़ दी है। एम्स की बदहाल बिल्डिंग निर्माण की गुणवत्ता और अनुरक्षण कार्यों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।