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चंद्रभागा नदी किनारे उजाड़ी बस्ती पर घमासान

Sat, 16 Nov 2019 01:18 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 16 Nov 2019 01:18 AM IST
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A fierce battle over the desolate settlement on the banks of the Chandrabhaga River
गढ़वाल कमिश्नर को फोन पर निर्देश देते विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल। - फोटो : RISHIKESH
प्रशासन की ओर से चंद्रभागा नदी किनारे उजाड़ी गई बस्ती पर सियासी घमासान शुरू हो गया है। सिंचाई विभाग, तहसील प्रशासन और नगर निगम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए चंद्रभागा नदी किनारे हुए अतिक्रमण को तो ध्वस्त कर दिया लेकिन उक्त भूमि किसकी है इस पर विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने शुक्रवार को गढ़वाल कमिश्नर रविनाथ रमन से फोन पर वार्ता कर मामले की जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है। शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल चंद्रभागा नदी क्षेत्र में पहुंचे। यहां अतिक्रमण की कार्रवाई से बेघर हुए करीब 500 परिवारों का उन्होंने हाल जाना। इस दौरान तहसीलदार से पूछा कि बेघर हुए लोगों के खाने पीने की क्या व्यवस्था की गई है। तहसीलदार रेखा आर्य ने बताया कि दो तीन दिन रहने और खाने के लिए धर्मशालाओं में व्यवस्था की गई है। इसके बाद बस्ती के लोगों को अपना इंतजाम करने के लिए कहा गया है।
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तहसीलदार के इस जवाब पर विस अध्यक्ष ने एतराज जताया। विस अध्यक्ष ने कहा कि कोई बेघर हुआ व्यक्ति दो तीन दिन में अपना घर कैसे बना लेगा। मैं भी घर बनाना चाहूं तो साल भर लग जाते हैं। ऐसे में बेघर हुए लोगों को राहत देने का यह व्यवहारिक तरीका नहीं है। उन्होंने तहसीलदार को निर्देश दिया कि तत्काल रैन बसेरे की व्यवस्था कराएं। इसके बाद उन्होंने बस्ती के लोगों से भी अपील की कि जब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो जाती है, तब तक आप रात्रिकाल में रैन बसेरा का इस्तेमाल करें। प्रशासन भोजन की व्यवस्था करेगा। उन्होंने गढ़वाल कमिश्नर को निर्देश दिया कि जब तक उजाड़े गए लोगों की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पाती है, तब तक इनके रैन बसेरे तथा अच्छे और साफ सुथरे भोजन की व्यवस्था की जाए। इस दौरान तहसीलदार रेखा आर्य, सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर दीपक गुरुरानी, मंडल अध्यक्ष भाजपा चेतन शर्मा, कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य जयेंद्र रमोला, मंडल महामंत्री पंकज शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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विस अध्यक्ष ने फिर पढ़ाया प्रोटोकोल का पाठ
ऋषिकेश। विधानसभा अध्यक्ष ने गढ़वाल कमिश्नर को पूछा कि जब उनके पहुंचने की सूचना बृहस्पतिवार को ही स्थानीय प्रशासन को दे दी गई थी, इसके बावजूद मौके पर न तो एसडीएम हैं और न ही नगर निगम के आयुक्त। उन्होंने जब इस संबंध में तहसीलदार रेखा आर्य से पूछा तो तहसीलदार ने बताया कि एसडीएम ने एमएनए को सूचना दी थी। इस पर सहायक नगर आयुक्त की ओर से कहा गया कि लिखित में कोई आदेश नहीं आया है। प्रोटोकाल के इस विवाद पर विस अध्यक्ष बिफर पड़े। उन्होंने कमिश्नर से कहा कि उनकी विधानसभा क्षेत्र में ऐसा नहीं चलेगा। एज ए एमएलए और एज ए स्पीकर ऑफ उत्तराखंड ने यदि निर्देश दिया है तो उसे पूरा करना होगा। स्पीकर की पावर और प्रोटोकाल क्या होती है अधीनस्थ अधिकारियों को अच्छी तरह से समझा दीजिए।
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नगर आयुक्त को लगाई जमकर फटकार
ऋषिकेश। चंद्रभागा नदी किनारे से उजाड़े गए लोगों का हाल जानने के बाद लौटते समय नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वींरियाल और सहायक नगर आयुक्त ऐलम दास पहुंचे। इन्हें देख विधानसभा अध्यक्ष का पारा चढ़ गया। उन्होंने दोनों अधिकारियों से उनका परिचय जाना और जमकर फटकार लगाई। विस अध्यक्ष ने कहा कि मैं आऊंगा तो क्या तुम्हें लिखित सूचना देनी होगी। इस पर एसएनए ऐलमदास ने कहा कि मुझे आए हुए दो ही महीना हुआ है। मुझे चंद्रभागा की जानकारी नहीं है। मुझे जो ऑर्डर मिला था, उस पर मैंने कार्रवाई की है। इस पर विस अध्यक्ष ने कहा कि दो महीने से आप मेरे से मिलने आए, या मिलने भी मैं आपके पास आऊंगा।

जमीन किसकी होगी जांच
ऋषिकेश। इस मामले में विस अध्यक्ष की ओर से जांच कराने के आदेश के बाद तीनों विभागों में खलबली मच गई है। बताया जा रहा है कि चंद्रभागा किनारे खाली कराई गई भूमि एक निजी संस्था की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि किसी निजी भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटवाने के लिए सरकारी विभागों ने इतनी तत्परता क्यों दिखाई। इस पर नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वींरियाल का कहना है कि जल्द ही तहसील प्रशासन, नगर निगम और सिंचाई विभाग के अफसरों की संयुक्त बैठक होगी। इसमें पड़ताल की जाएगी कि वास्तव में भूमि पर मालिकाना हक किसका है।
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