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संगीत और साहित्य हमारी विरासत : चिदानंद
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
संगीत और साहित्य जीवन में उल्लास, उमंग, खुशी और मार्गदर्शन देता है। साज, आवाज और ताल का अद्भुत संगम है संगीत। संगीत और साहित्य हमारी भारतीय संस्कृति, सभ्यता एवं विरासत है, जोे लोगों को एकता के सूत्र में बांध कर रखता है। वर्तमान समय में स्वच्छता, जल व पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुकता नितांत आवश्यक है। इसके लिए संगीतकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
ये बातें परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने बुधवार को परमार्थ निकेतन गंगा तट पर आयोजित अखिल भारतीय लोक कला महोत्सव के समापन अवसर पर कहीं। इसके पहले उत्तराखंड, तमिलनाडु, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, राजस्थान, जम्मू कश्मीर आदि से पहुंचे कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। इस दौरान कलाकरों ने अपने संगीत के माध्यम से बेटी बचाओ, पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण पर्व, दीपावली में पटाखे के स्थान पर ढोल बजाकर दीपावली मनाने का संदेश दिया।
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संगीत और साहित्य जीवन में उल्लास, उमंग, खुशी और मार्गदर्शन देता है। साज, आवाज और ताल का अद्भुत संगम है संगीत। संगीत और साहित्य हमारी भारतीय संस्कृति, सभ्यता एवं विरासत है, जोे लोगों को एकता के सूत्र में बांध कर रखता है। वर्तमान समय में स्वच्छता, जल व पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुकता नितांत आवश्यक है। इसके लिए संगीतकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
ये बातें परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने बुधवार को परमार्थ निकेतन गंगा तट पर आयोजित अखिल भारतीय लोक कला महोत्सव के समापन अवसर पर कहीं। इसके पहले उत्तराखंड, तमिलनाडु, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, राजस्थान, जम्मू कश्मीर आदि से पहुंचे कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। इस दौरान कलाकरों ने अपने संगीत के माध्यम से बेटी बचाओ, पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण पर्व, दीपावली में पटाखे के स्थान पर ढोल बजाकर दीपावली मनाने का संदेश दिया।
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