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स्वामी चिदानंद बने राष्ट्रीय कवि संगम के संरक्षक
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । परमार्थ निकेतन गंगा तट पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के दूसरे दिन राष्ट्रीय कवि संगम का संरक्षक परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती को नियुक्त किया गया। स्वामी चिदानंद को स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की जगह पर नियुक्त किया गया है। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष कवि संगम जगदीश मित्तल ने शनिवार को इसकी विधिवत घोषणा की। उन्होंने कहा कि कवि संगम देश के 30 प्रांतों के 5000 से भी अधिक कवियों का संगठन है। राष्ट्रीय कवि संगम विगत 13 वर्षों से कविताओं के माध्यम से राष्ट्र जागरण का कार्य कर रहा है।
इस मौके पर वरिष्ठ कवि डॉ. हरिओम पवॉर ने राष्ट्र, भगवान श्री राम, देश भक्ति, देश के रक्षक सैनिक आदि अनेक देशभक्ति के विषयों पर कविता पाठ किया। ओजपूर्ण कविताओं पर श्रोताओं की तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा माहौल गुंजायमान हो उठा। राष्ट्रीय संरक्षक इंद्रेश कुमार ने अखंड भारत को बनाए रखने का संकल्प कराया।
अब कार्यक्रम कमरों में नहीं नदी तटों पर हो
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत में शांति, प्रसन्नता और समृद्धि लाने के लिए जल संरक्षण की आवश्यकता है। जल संसाधनों के विकास, नियोजन, संवर्द्धन के लिए देश के हर व्यक्ति को आगे आना होगा। तभी भावी पीढ़ियों के लिए हम जल को बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब हमारे सम्मेलनों और कार्यक्रमों का आयोजन वातानुकूलित कमरों में बैठकर नहीं बल्कि नदियों के तटों पर होना चाहिए। इससे जल स्रोतों के संरक्षण का संदेश दूर तक पहुंचेगा। उन्होंने काव्य के मंच पर पेरिस समझौते की रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए कहा कि कार्बन डाई आक्साइड उत्सर्जन में कटौती करने के बावजूद वर्ष 2050 तक पृथ्वी का तापमान अत्यधिक बढ़ जाएगा। इसके लिए काफी हद तक एकल उपयोग प्लास्टिक जिम्मेदार है।
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इस मौके पर वरिष्ठ कवि डॉ. हरिओम पवॉर ने राष्ट्र, भगवान श्री राम, देश भक्ति, देश के रक्षक सैनिक आदि अनेक देशभक्ति के विषयों पर कविता पाठ किया। ओजपूर्ण कविताओं पर श्रोताओं की तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा माहौल गुंजायमान हो उठा। राष्ट्रीय संरक्षक इंद्रेश कुमार ने अखंड भारत को बनाए रखने का संकल्प कराया।
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अब कार्यक्रम कमरों में नहीं नदी तटों पर हो
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत में शांति, प्रसन्नता और समृद्धि लाने के लिए जल संरक्षण की आवश्यकता है। जल संसाधनों के विकास, नियोजन, संवर्द्धन के लिए देश के हर व्यक्ति को आगे आना होगा। तभी भावी पीढ़ियों के लिए हम जल को बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब हमारे सम्मेलनों और कार्यक्रमों का आयोजन वातानुकूलित कमरों में बैठकर नहीं बल्कि नदियों के तटों पर होना चाहिए। इससे जल स्रोतों के संरक्षण का संदेश दूर तक पहुंचेगा। उन्होंने काव्य के मंच पर पेरिस समझौते की रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए कहा कि कार्बन डाई आक्साइड उत्सर्जन में कटौती करने के बावजूद वर्ष 2050 तक पृथ्वी का तापमान अत्यधिक बढ़ जाएगा। इसके लिए काफी हद तक एकल उपयोग प्लास्टिक जिम्मेदार है।
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