{"_id":"5cf6d201bdec22073561d45e","slug":"15596794852-rishikesh-news189","type":"story","status":"publish","title_hn":"निजी भूमि पर चल रहा अवैध पार्किंग का गोरखधंधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निजी भूमि पर चल रहा अवैध पार्किंग का गोरखधंधा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। तपोवन हाईवे पर निजी भूमि पर बिना परमिशन अवैध पार्किंग का गोरखधंधा चल रहा है। निजी अवैध पार्किंग का मामला प्रशासन के संज्ञान में नहीं है। इससे जहां राजस्व को चूना लगाया जा रहा है, वहीं खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खास बात ये है कि इसके लिए जिला पंचायत से कोई अनुमति नहीं ली गई। कार्रवाई के नाम पर जिला पंचायत पल्ला झाड़ रहा है। पार्किंग कर्मी की मानें तो भूमि के मालिक इस अवैध कारोबार से अठारह लाख रुपये सालाना कमाई कर रहा है।
पचास से साठ वाहन यहां पर प्रतिदिन खड़े होते हैं। वाहनों को पार्क करने के एवज मेें यहां प्रति वाहन से 150 से 300 रुपये की अवैध वसूली हो रही है। पार्किंग में शौचालय के लिए भी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। नियमानुसार बिना शौचालय व्यवस्था के पार्किंग का निर्माण नहीं किया जा सकता है। इस मामले में स्थानीय प्रशासन ने आंख मूंद रखी है।
लक्ष्मणझूला में भी चल रही दो निजी अवैध पार्किंग
इसके अलावा लक्ष्मणझूला में दो निजी अवैध पार्किंगों का संचालन बिना परमिशन के हो रहा है। तपोवन और लक्ष्मणझूला के लोग काफी लंबे समय से प्रशासन और जिला पंचायत से सरकारी पार्किंग बनाए जाने की गुहार लगा चुके हैं। जिसकी प्रशासन और जिला पंचायत ने हमेशा से अनदेखी की है। प्रशासन की चुप्पी देख तपोवन हाईवे पर बिना किसी अनुमति के लोगों ने निजी प्लॉट पर पार्किंग का अड्डा बना लिया है।
विज्ञापन
पार्किंग संचालन के लिए ये हैं जरूरी मानक
- यदि निजी भूमि पर पार्किंग संचालन करना है तो कृषि भूमि को व्यावसायिक परिवर्तन कराना होगा।
- निकाय या एसडीएम से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना जरूरी है।
- अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने के बाद पटवारी की रिपोर्ट पर निर्णय लिया जाता है।
- पार्किंग स्थल पर शौचालय और पेयजल की व्यवस्था अनिवार्य है।
- अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने के बाद निकाय या एसडीएम की ओर से निर्धारित दरें ही वसूलने की बाध्यता होती है।
- शुल्क रसीद निकाय से छपवाकर ही उपयोग में लाई जा सकती है।
कोट्स
मामला संज्ञान में नहीं है। नियमानुसार निजी भूमि पर पार्किंग खोलने से पहले स्थानीय प्रशासन से परमिशन लेना आवश्यक है।
- युक्ता मिश्र, उपजिलाधिकारी नरेंद्रनगर
जिला पंचायत की ओर से तपोवन स्थित पार्किंग के लिए कोई परमिशन नहीं दी गई है। इस पार्किंग से व्यवसाय टैक्स वसूला जा रहा है।
- सतीश बिजल्वाण, एएमओ जिला पंचायत
विज्ञापन
पचास से साठ वाहन यहां पर प्रतिदिन खड़े होते हैं। वाहनों को पार्क करने के एवज मेें यहां प्रति वाहन से 150 से 300 रुपये की अवैध वसूली हो रही है। पार्किंग में शौचालय के लिए भी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। नियमानुसार बिना शौचालय व्यवस्था के पार्किंग का निर्माण नहीं किया जा सकता है। इस मामले में स्थानीय प्रशासन ने आंख मूंद रखी है।
विज्ञापन
लक्ष्मणझूला में भी चल रही दो निजी अवैध पार्किंग
इसके अलावा लक्ष्मणझूला में दो निजी अवैध पार्किंगों का संचालन बिना परमिशन के हो रहा है। तपोवन और लक्ष्मणझूला के लोग काफी लंबे समय से प्रशासन और जिला पंचायत से सरकारी पार्किंग बनाए जाने की गुहार लगा चुके हैं। जिसकी प्रशासन और जिला पंचायत ने हमेशा से अनदेखी की है। प्रशासन की चुप्पी देख तपोवन हाईवे पर बिना किसी अनुमति के लोगों ने निजी प्लॉट पर पार्किंग का अड्डा बना लिया है।
विज्ञापन
पार्किंग संचालन के लिए ये हैं जरूरी मानक
- यदि निजी भूमि पर पार्किंग संचालन करना है तो कृषि भूमि को व्यावसायिक परिवर्तन कराना होगा।
- निकाय या एसडीएम से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना जरूरी है।
- अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने के बाद पटवारी की रिपोर्ट पर निर्णय लिया जाता है।
- पार्किंग स्थल पर शौचालय और पेयजल की व्यवस्था अनिवार्य है।
- अनापत्ति प्रमाणपत्र मिलने के बाद निकाय या एसडीएम की ओर से निर्धारित दरें ही वसूलने की बाध्यता होती है।
- शुल्क रसीद निकाय से छपवाकर ही उपयोग में लाई जा सकती है।
कोट्स
मामला संज्ञान में नहीं है। नियमानुसार निजी भूमि पर पार्किंग खोलने से पहले स्थानीय प्रशासन से परमिशन लेना आवश्यक है।
- युक्ता मिश्र, उपजिलाधिकारी नरेंद्रनगर
जिला पंचायत की ओर से तपोवन स्थित पार्किंग के लिए कोई परमिशन नहीं दी गई है। इस पार्किंग से व्यवसाय टैक्स वसूला जा रहा है।
- सतीश बिजल्वाण, एएमओ जिला पंचायत