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ऋषिकेश: इंटेलेक्चुुअल प्रॉपर्टी राइट’ पर कार्यशाला, बौद्धिक संपदा के महत्व पर हुई चर्चा
Tue, 07 May 2019 09:33 AM IST
देहरादून ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 07 May 2019 09:33 AM IST
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स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी जौलीग्रांट में यूूकॉस्ट के सहयोग से ‘इंटेलेक्चुुअल प्रॉपर्टी राइट’ पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बौद्धिक संपदा और इसके महत्व पर चर्चा की गई।
सोमवार को न्यू ऑडिटोरियम में कार्यशाला का उद्घाटन कुलपति डॉ. विजय धस्माना और यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेन्द्र डोभाल ने दीप जलाकर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि हमारे यहां पांरपरिक ज्ञान का भंडार है। परन्तु आमजन को पेटेंट संबधित कानून की जानकारी नहीं है। उन्होंने बौद्धिक संपति के अंतर्गत पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क के बारे में कहा कि वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलाव को देखते हुए इन अधिकारों के बारे में सजग रहने की जरूरत है।
मुख्य अतिथि उत्तराखंड स्टेेट काउंसिल फॉर सांइस एंड टेक्नोलॉजी के महानिदेशक डॉ. राजेन्द्र डोभाल ने कहा कि बौद्धिक संपदा को दिमागी उपज कहा जाता है, इसका उपयोग आविष्कारकर्ता ही कर सकता है। इसके अंतर्गत व्यक्ति अथवा संस्था की सृजित कोई रचना, संगीत साहित्यिक कृति, कला, खोज अथवा डिजाइन होती है, जो उस व्यक्ति अथवा संस्था की बौद्धिक संपदा कहलाती है।
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कार्यशाला में डॉ. रजत अग्रवाल, योगेन्द्र सिंह, डॉ. लूसी राणा ने भी विचार रखे। इस दौरान प्रति कुलपति डॉ. विजेन्द्र चौहान, डॉ. प्रकाश कैशवय्या, डॉ. सुनील सैनी, डॉ. रेणु धस्माना , डॉ. अनुपम धस्माना, डॉ. विवेक कुमार आदि मौजूद रहे।
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सोमवार को न्यू ऑडिटोरियम में कार्यशाला का उद्घाटन कुलपति डॉ. विजय धस्माना और यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेन्द्र डोभाल ने दीप जलाकर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि हमारे यहां पांरपरिक ज्ञान का भंडार है। परन्तु आमजन को पेटेंट संबधित कानून की जानकारी नहीं है। उन्होंने बौद्धिक संपति के अंतर्गत पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क के बारे में कहा कि वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलाव को देखते हुए इन अधिकारों के बारे में सजग रहने की जरूरत है।
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मुख्य अतिथि उत्तराखंड स्टेेट काउंसिल फॉर सांइस एंड टेक्नोलॉजी के महानिदेशक डॉ. राजेन्द्र डोभाल ने कहा कि बौद्धिक संपदा को दिमागी उपज कहा जाता है, इसका उपयोग आविष्कारकर्ता ही कर सकता है। इसके अंतर्गत व्यक्ति अथवा संस्था की सृजित कोई रचना, संगीत साहित्यिक कृति, कला, खोज अथवा डिजाइन होती है, जो उस व्यक्ति अथवा संस्था की बौद्धिक संपदा कहलाती है।
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कार्यशाला में डॉ. रजत अग्रवाल, योगेन्द्र सिंह, डॉ. लूसी राणा ने भी विचार रखे। इस दौरान प्रति कुलपति डॉ. विजेन्द्र चौहान, डॉ. प्रकाश कैशवय्या, डॉ. सुनील सैनी, डॉ. रेणु धस्माना , डॉ. अनुपम धस्माना, डॉ. विवेक कुमार आदि मौजूद रहे।