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कोरोना वायरस से लड़ने के लिए युवाओं ने बनाई पर्पल क्यूब

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Wed, 08 Apr 2020 05:03 PM IST
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Youth created purple cube to fight corona virus
पर्पल क्यूब - फोटो : AMAR UJALA
संवाद न्यूज एजेंसी
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पिथौरागढ़। हरेला सोसायटी ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए पर्पल क्यूब बनाई है। इसकी मदद से किसी भी निर्जीव चीज को सेनेटाइज किया जा सकता है। इस पर्पल क्यूब का इस्तेमाल अस्पताल, कार्यालय, घर सहित कई अन्य स्थानों पर किया जा सकता है। इस तकनीक का प्रयोग जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं जैसे एंबुलेंस, हॉस्पिटल के कमरों, वेंटिलेटर रूम्स, हॉस्पिटल स्टाफ रूम्स आदि स्थानों को इस तकनीक के माध्यम से सेनिटाइज करने में किया जा सकता है। हरेला सोसायटी के मन्नू डफाली ने बताया कि पर्पल क्यूब यूवी विकिरण और इसके किटाणुओं पर होने वाले प्रभाव के नियम पर काम करती है। सौर विकिरण के स्पेक्ट्रम का एक भाग यूवी कहलाता है, जिसे पराबैंगनी किरणें भी कहते हैं। पराबैंगनी किरणों का भी यूवीसी भाग जब किसी विषाणु के संपर्क में आता है, तो यह उसके डीएनए, आरएनए को नुकसान पहुंचाता है। जिससे वह अपनी संख्या नहीं बढ़ा पाते और इस तरह से यूवी लाइट्स बैक्टीरिया, वायरस, मोल्ड्स आदि को खत्म कर देती हैं। उन्होंने बताया कि पहले टीम ने अलग-अलग रसायनों जैसे हैड्रोजन-पराक्साइड, ब्लीच, सोडियम हाइपोक्लोराइट, इथेनॉल आदि से चीजों को सेनीटाइज करने कोशिश की, लेकिन लॉकडाउन के चलते इनमें से अधिकांश रसायन या तो उपलब्ध नहीं हो पाए। इनके प्रयोग करने के तरीकों और प्रभावों में संशय की स्थिति बनी रही। इसके बाद युवाओं ने कुछ पुरानी आरओ मशीनों और यूवी ट्यूबस से ये मशीन बना डाली, जिससे वो अब अपने संसाधनों और वितरण सामग्री को किटाणु विहीन कर रहे हैं।
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------इनसेट------ इग्लैंड में इस तकनीक का प्रयोग कर कंपनिया दे रही हैं अस्पतालों में सेवा :: हरेला सोसाइटी के मन्नू डफाली ने बताया कि हरेला टीम ने अपने शुरुआती शोध में पाया कि इंग्लैंड में इसी तकनीक पर आधारित कुछ कंपनियां वहां के हॉस्पिटलों को अपनी सेवाएं दे रही हैं। चीन में भी बसों को यूवी विकरण से जगमगाती टनल से गुजारा जाता है। उन्होंने बताया कि वहां रोबोट चीजों जैसे करेंसी नोटों आदि को यूवी लैंप से ही कीटाणु विहीन कर रहे हैं।
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-----इनसेट---- अस्पतालों को किया जा सकता है विषाणु विहिन :: अस्पतालों के कमरों को इस तकनीक के माध्यम से विषाणुविहीन किया जा सकता है। प्रक्रिया के दौरान कमरे में हवा का सरकुलेशन बना रहना चाहिए। जिससे विषाणु यूवी लाइट्स के संपर्क में आए और मारे जाएं। ----इनसेट---- सिर्फ निर्जीव चीजें होंगी सेनेटाइज :: इस तकनीक का प्रयोग सिर्फ निर्जीव वस्तुओं को किटाणु विहीन करने के लिए किया जा सकता है। हाथों को इससे साफ करने की कोशिश की जाए तो यह बेहद खतरनाक होगा। इससे कैंसर होने का खतरा है साथ ही साथ नंगी आंखों से इन किरणों को देखने से आंखें खराब भी हो सकती हैं।
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