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Pithoragarh News: बर्फबारी बनी कीड़ा जड़ी दोहन में बाधक
Tue, 02 May 2023 11:22 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 02 May 2023 11:22 PM IST
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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। शक्तिवर्द्धक कीड़ा जड़ी (यारसा गंबू) के दोहन के लिए बुग्यालों में गए ग्रामीण बर्फबारी के कारण असमंजस में हैं। बुग्यालों में लगभग आधे से एक फुट हिमपात हुआ है। छोटे टैंट लगाकर बुग्यालों में रह रहे ग्रामीणों को कड़ाके की ठंड से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में ग्रामीण अब लौटने का मन बना रहे हैं।
बता दें कि यारसा गंबू उच्च हिमालयी क्षेत्र के बुग्यालों में पाई जाती है। मुनस्यारी विकासखंड के पोटिंग ग्लेशियर, मिलम, लास्पा, रालम, राजरंभा, नागिनधूरा, हंसलिंग, पंचाचूली के बुग्यालों में कीड़ा जड़ी मिलती है। धारचूला विकासखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में नौ हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित छिपलाकेदार बुग्याल, 10 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित व्याक्षी बुग्याल, 11 हजार फुट पर स्थित सुमदुंग, ब्रह्मकुंड बुग्याल समेत व्यास और दारमा घाटी में 13 से 14 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित बुग्यालों में लोग कीड़ा-जड़ी लेने जाते हैं।
अन्य वर्षों में मार्च तक हिमपात होता था। बर्फ पिघलते ही अप्रैल पहले सप्ताह से लोग कीड़ा जड़ी दोहन के लिए बुग्यालों में चले जाते थे। वहां पर टैंट लगाकर लगभग एक से दो माह तक कीड़ा जड़ी निकालते थे। इस बार मार्च तक तो मौसम सामान्य रहा। अप्रैल से चोटियों और बुग्यालों पर लगातार हिमपात हो रहा है।
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ऐसे में कीड़ा जड़ी नहीं निकल पा रही है। मुनस्यारी के जो लोग बुग्यालों में गए हैं वहां पर उन्हें बर्फबारी के कारण कई दिक्कत हो रही है। स्थानीय सुंदर कोरंगा और विक्की चिराल ने बताया कि कीड़ा जड़ी दोहन के लिए बुग्यालों में गए ग्रामीणों को बर्फबारी के कारण लौटना पड़ रहा है।
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बता दें कि यारसा गंबू उच्च हिमालयी क्षेत्र के बुग्यालों में पाई जाती है। मुनस्यारी विकासखंड के पोटिंग ग्लेशियर, मिलम, लास्पा, रालम, राजरंभा, नागिनधूरा, हंसलिंग, पंचाचूली के बुग्यालों में कीड़ा जड़ी मिलती है। धारचूला विकासखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में नौ हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित छिपलाकेदार बुग्याल, 10 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित व्याक्षी बुग्याल, 11 हजार फुट पर स्थित सुमदुंग, ब्रह्मकुंड बुग्याल समेत व्यास और दारमा घाटी में 13 से 14 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित बुग्यालों में लोग कीड़ा-जड़ी लेने जाते हैं।
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अन्य वर्षों में मार्च तक हिमपात होता था। बर्फ पिघलते ही अप्रैल पहले सप्ताह से लोग कीड़ा जड़ी दोहन के लिए बुग्यालों में चले जाते थे। वहां पर टैंट लगाकर लगभग एक से दो माह तक कीड़ा जड़ी निकालते थे। इस बार मार्च तक तो मौसम सामान्य रहा। अप्रैल से चोटियों और बुग्यालों पर लगातार हिमपात हो रहा है।
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ऐसे में कीड़ा जड़ी नहीं निकल पा रही है। मुनस्यारी के जो लोग बुग्यालों में गए हैं वहां पर उन्हें बर्फबारी के कारण कई दिक्कत हो रही है। स्थानीय सुंदर कोरंगा और विक्की चिराल ने बताया कि कीड़ा जड़ी दोहन के लिए बुग्यालों में गए ग्रामीणों को बर्फबारी के कारण लौटना पड़ रहा है।