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दवा के साथ ज्ञान भी दे रहे नामिक के ‘भगवान’

Sun, 15 May 2016 10:07 PM IST
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sun, 15 May 2016 10:07 PM IST
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With the knowledge of the drug are also Namik "God '
नामिक के ‘भगवान’ - फोटो : अमर उजाला

प्रयास करने से सब कुछ संभव है, यह कर दिखाया समुद्र तल से 2700 मीटर की ऊंचाई एवं सड़क मार्ग से 27 किमी की दूरी पर बसे नामिक के लोगों ने। हिमालय की तलहटी पर बसे नामिक के प्राथमिक स्कूल में कोई शिक्षक नहीं जाना चाहता था। 34 साल पहले प्राथमिक स्कूल नामिक के तत्कालीन शिक्षक और तत्कालीन ग्राम प्रधान ने स्कूल के लिए नामिक के ही किसी युवा को शिक्षक बनाने की ठानी। शिक्षक और प्रधान का यह प्रयास सफल रहा। यह युवा 19 साल से नामिक के स्कूल को संचालित कर रहा है।

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नामिक स्कूल के प्रति शिक्षकों की अरुचि को देखते हुए वर्ष 1982 में स्कूल के तत्कालीन शिक्षक हीरा सिंह मेहता, तत्कालीन ग्राम प्रधान बाला सिंह कन्यारी ने गांव के ही एक बालक को पढ़ा-लिखाकर शिक्षक बनाने की ठानी। शिक्षक और ग्राम प्रधान को गांव के मान सिंह जेम्याल के बालक भगवान में यह प्रतिभा दिखी। दोनों ने भगवान को शिक्षक बनाने का संकल्प लिया। भगवान सिंह जेम्याल को प्राथमिक पाठशाला नामिक में दाखिला दिलाया गया। वर्ष 1986 में भगवान ने अच्छे अंकों के साथ कक्षा पांच की परीक्षा पास की। इंटर तक की शिक्षा मुनस्यारी से, पिथौरागढ़ से पीजी करने के बाद भगवान ने 1996 में बीटीसी का कोर्स किया।
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29 सितंबर 1997 को भगवान का शिक्षक के रूप में चयन हुआ तो उन्होंने अधिकारियों के सामने नामिक स्कूल में तैनाती देने का आवेदन किया। भगवान को नामिक प्राथमिक पाठशाला में बतौर सहायक अध्यापक नियुक्ति मिली। वर्ष 2008 में नामिक जूनियर हाईस्कूल खुला। भगवान को जूनियर हाईस्कूल के सहायक अध्यापक के रूप में पदोन्नति मिल गई। भगवान अपने दम पर जूनियर हाईस्कूल को संचालित करने लगे। वर्ष 2011 में स्टाफ, शिक्षकों के पद सृजित किए बगैर जूनियर हाईस्कूल को हाईस्कूल का दर्जा दे दिया गया। भगवान अपने दम पर हाईस्कूल तक की कक्षाओं का संचालन करने लगे। वह आज भी नामिक में शिक्षा की अलख जगाए हुए हैं। भगवान सिंह जेम्याल जैसे कर्मठ शिक्षक को अब तक किसी तरह का पुरस्कार नहीं मिला। सवाल यही है कि क्या ऐसे कर्मठ शिक्षकों के काम का आकलन सरकार और शिक्षा महकमा कब करेगा।
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नामिक का ‘डॉक्टर’ भी भगवान
भगवान न केवल शिक्षक बल्कि नामिक के लोगों के ‘डॉक्टर’ भी हैं। 9 फरवरी 2014 को नामिक में खुला एएनएम सेंटर उद्घाटन के बाद से बंद पड़ा है। स्वास्थ्य महकमा ग्राम प्रधान तुलसी देवी के घर में दवा पहुंचवा देता है। प्रधान के शिक्षक पति भगवान सिंह जैमियाल लोगों को न केवल दवा वितरित करते हैं, बल्कि टीके भी लगाते हैं।

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