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Pithoragarh News: आखिर कहां जा रहा रोडवेज की कमाई का पैसा
Thu, 29 Oct 2026 11:25 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 29 Oct 2026 11:25 PM IST
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पिथौरागढ़। रोडवेज की कमाई आखिर कहां जा रही है! दरअसल यह सवाल कई समस्याओं के बीच उठ रहा है। पिथौरागढ़ डिपो की ही बात करें तो हर महीने-आधे महीने में टायरों की समस्या आने से बसें खड़ी हो रही हैं। टैंपो ट्रैवलर के काम का बकाया चार लाख से अधिक पहुंच गया है। कर्मचारी तीन-तीन माह तक वेतन को तरस रहे हैं। एक तरफ प्रचार अच्छे प्रबंधन का है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है।
यह स्पष्ट है कि टनकपुर मंडल में टायर प्लांट स्थापित न होने से टायरों की आपूर्ति काठगोदाम और देहरादून मंडल से होती है। टनकपुर मंडल के सभी डिपो नई बसों की कमी से जूझ रहे हैं। विभिन्न रूटों पर दौड़ रही बसों में आए दिन नए और रबर चढ़ टायरों की जरूरत होती है। बीते मंगलवार तक पिथौरागढ़ डिपो को करीब 50 नए और 100 रबर चढ़े टायरों की जरूरत थी। बुधवार को डिपो को सिर्फ दो नए और 10 रबर चढ़े टायर उपलब्ध हुए। जरूरत और आपूर्ति में जमीन-आसमान का यह अंतर पिछले लंबे समय से देखने को मिल रहा है। इस सबके बीच खटारा बसें रास्ते में धोखा दे रही हैं। एक तरफ टायरों और अन्य सामग्री का लगातार अभाव है, दूसरी ओर वेतन के लाले के बीच कर्मचारियों पर बसों को किसी तरह रूटों पर संचालित करने का दबाव। कई रूटों पर बसें नियमित संचालित नहीं हो पा रही हैं और कुछ रूट पर बसों का संचालन बंद पड़ा है। गंगोलीहाट, धारचूला और अस्कोट में बने बस अड्डों से बसों के सुचारु संचालन को कर्मचारी नहीं हैं। निगम की तरफ से एक ओर लाभ का प्रचार है, दूसरी ओर स्थितियां विपरीत नजर आ रही हैं।
टैंपो ट्रैवलर के काम का बकाया चार लाख पार
पिथौरागढ़ डिपो से दिल्ली और दून रूट पर संचालित टैंपो ट्रैवलर के मेंटेनेंस का बकाया चार लाख रुपये से अधिक पहुंच गया है। मेंटेनेंस के लिए पार्ट्स की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। अब तक किसी तरह काम चलाकर ट्रैवलर का संचालन किया जा रहा है लेकिन अब मेंटेनेंस करने वाली संस्था ने प्रबंधन से आगामी अगले महीने से बिना बकाया भुगतान काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
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उत्तराखंड परिवहन निगम के आरएम, एके बनवाल ने बताया कि आउटसोर्स कर्मी भी वही काम करते हैं जो नियमित कर्मचारी करते हैं। प्रमोशन के पद पूरे हैं। टायर और अन्य सामग्री की आपूर्ति बराबर बनाए रखी जाती है। कुछ बसों के खड़े होने की स्थिति चलती रहती है।
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यह स्पष्ट है कि टनकपुर मंडल में टायर प्लांट स्थापित न होने से टायरों की आपूर्ति काठगोदाम और देहरादून मंडल से होती है। टनकपुर मंडल के सभी डिपो नई बसों की कमी से जूझ रहे हैं। विभिन्न रूटों पर दौड़ रही बसों में आए दिन नए और रबर चढ़ टायरों की जरूरत होती है। बीते मंगलवार तक पिथौरागढ़ डिपो को करीब 50 नए और 100 रबर चढ़े टायरों की जरूरत थी। बुधवार को डिपो को सिर्फ दो नए और 10 रबर चढ़े टायर उपलब्ध हुए। जरूरत और आपूर्ति में जमीन-आसमान का यह अंतर पिछले लंबे समय से देखने को मिल रहा है। इस सबके बीच खटारा बसें रास्ते में धोखा दे रही हैं। एक तरफ टायरों और अन्य सामग्री का लगातार अभाव है, दूसरी ओर वेतन के लाले के बीच कर्मचारियों पर बसों को किसी तरह रूटों पर संचालित करने का दबाव। कई रूटों पर बसें नियमित संचालित नहीं हो पा रही हैं और कुछ रूट पर बसों का संचालन बंद पड़ा है। गंगोलीहाट, धारचूला और अस्कोट में बने बस अड्डों से बसों के सुचारु संचालन को कर्मचारी नहीं हैं। निगम की तरफ से एक ओर लाभ का प्रचार है, दूसरी ओर स्थितियां विपरीत नजर आ रही हैं।
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टैंपो ट्रैवलर के काम का बकाया चार लाख पार
पिथौरागढ़ डिपो से दिल्ली और दून रूट पर संचालित टैंपो ट्रैवलर के मेंटेनेंस का बकाया चार लाख रुपये से अधिक पहुंच गया है। मेंटेनेंस के लिए पार्ट्स की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। अब तक किसी तरह काम चलाकर ट्रैवलर का संचालन किया जा रहा है लेकिन अब मेंटेनेंस करने वाली संस्था ने प्रबंधन से आगामी अगले महीने से बिना बकाया भुगतान काम करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
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उत्तराखंड परिवहन निगम के आरएम, एके बनवाल ने बताया कि आउटसोर्स कर्मी भी वही काम करते हैं जो नियमित कर्मचारी करते हैं। प्रमोशन के पद पूरे हैं। टायर और अन्य सामग्री की आपूर्ति बराबर बनाए रखी जाती है। कुछ बसों के खड़े होने की स्थिति चलती रहती है।