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Pithoragarh News: हिमपात और सर्दी बढ़ी तो ग्रामीणों ने किया माइग्रेशन
Sat, 26 Oct 2024 11:29 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 26 Oct 2024 11:29 PM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। दारमा घाटी के उच्च हिमालयी गांवों में हिमपात और ठंड के चलते 14 गांवों के ग्रामीणों ने निचली घाटी में आना शुरू कर दिया है। नवंबर पहले सप्ताह तक अधिकतर ग्रामीण घाटी के गांवों से नीचे लौट आएंगे।
घाटी के अंतिम गांव सीपू निवासी ज्ञान सिंह सीपाल और पूर्व प्रधान जीवन सिंह मार्छाल ने बताया कि हिमपात के कारण गांवों में ठंड बढ़ गई है। बताया कि सीपू और मार्छा गांव के 50 से अधिक परिवार धारचूला पहुंच गए हैं।
उन्होंने बताया कि दोनों ग्राम पंचायतों के लोग अपने जानवरों के साथ दो घंटे की पैदल यात्रा कर सड़क मार्ग तक पहुंचे। पूर्व प्रधान मार्छाल ने बताया कि जानवरों के साथ आने वाले लोग चार दिन की पैदल यात्रा कर धारचूला पहुंचे। कहा कि जिन लोगों के पास जानवर नहीं थे वह मात्र पांच घंटे में वाहनों से यहां पहुंच गए।
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ग्राम प्रधान दांतू जमन सिंह दताल ने बताया कि उनके गांव के लोगों ने भी निचली घाटी में आना शुरू कर दिया है। बताया कि ग्राम सेला, चल, बालिंग, सोन दुग्तू, बोन, फिलम, गो और तिदांग के ग्रामीण भी नवंबर के पहले हफ्ते तक निचली घाटी में पहुंच जाएंगे।
ग्रामीण प्रतिवर्ष गर्मियों के सीजन में उच्च हिमालयी गांवों में प्रवास पर पहुंच खेतीबाड़ी का कार्य करते हैं और ठंड शुरू होने पर निचली घाटी को लौट आते हैं।
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घाटी के अंतिम गांव सीपू निवासी ज्ञान सिंह सीपाल और पूर्व प्रधान जीवन सिंह मार्छाल ने बताया कि हिमपात के कारण गांवों में ठंड बढ़ गई है। बताया कि सीपू और मार्छा गांव के 50 से अधिक परिवार धारचूला पहुंच गए हैं।
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उन्होंने बताया कि दोनों ग्राम पंचायतों के लोग अपने जानवरों के साथ दो घंटे की पैदल यात्रा कर सड़क मार्ग तक पहुंचे। पूर्व प्रधान मार्छाल ने बताया कि जानवरों के साथ आने वाले लोग चार दिन की पैदल यात्रा कर धारचूला पहुंचे। कहा कि जिन लोगों के पास जानवर नहीं थे वह मात्र पांच घंटे में वाहनों से यहां पहुंच गए।
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ग्राम प्रधान दांतू जमन सिंह दताल ने बताया कि उनके गांव के लोगों ने भी निचली घाटी में आना शुरू कर दिया है। बताया कि ग्राम सेला, चल, बालिंग, सोन दुग्तू, बोन, फिलम, गो और तिदांग के ग्रामीण भी नवंबर के पहले हफ्ते तक निचली घाटी में पहुंच जाएंगे।
ग्रामीण प्रतिवर्ष गर्मियों के सीजन में उच्च हिमालयी गांवों में प्रवास पर पहुंच खेतीबाड़ी का कार्य करते हैं और ठंड शुरू होने पर निचली घाटी को लौट आते हैं।