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बेमिसाल: घायल बच्चों को रोते देखा तो खुद सड़क के गड्ढों को भरने लगा 12 साल का सुमित

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2020 03:30 PM IST
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When he saw the injured children weeping, he started filling the pits of the road himself.
गड्ढे में पत्थर के टुकड़े भरता सुमित कुमार। - फोटो : AMAR UJALA
संजू पंत (संवाद), डीडीहाट (पिथौरागढ़)। सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे और आए दिन इन गड्ढों के कारण दुपहिया वाहनों से गिरने के कारण राहगीरों को घायल होते देखना लोगों के लिए आम बात है, लेकिन 12 साल के सुमित ने जब अपनी मां के साथ स्कूटी पर बैठे बच्चे को गिरने के बाद रोते देखा तो उसका मन इतना द्रवित हो गया कि वह खुद ही हाथ में हथौड़ा लेकर सड़क के गड्ढों को भरने में जुट गया।
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नौ किमी लंबी डीडीहाट-भनड़ा सड़क में इतने गड्ढे हैं जिन्हें गिना नहीं जा सकता। इस सड़क से भनड़ा, सिटोली, कांडेबरला, बलगड़ी, लोहारगांव सहित कुछ अन्य गांवों की लगभग चार हजार की आबादी आवागमन करती है। पीएमजीएसवाई की इस सड़क में सात साल पहले डामर हुआ था, जो अब उखड़ चुका है। सड़क पर नाली नहीं होने से बरसाती पानी से डामर लगभग उखड़ चुका है। जगह जगह गड्ढे बने हैं। इन गड्ढों में आए दिन दुपहिया वाहन दुर्घटनाग्रस्त होते रहते हैं। गड्ढों में सबसे अधिक दुर्घटना स्कूटी सवार महिलाओं के साथ होती हैं। दो दिन पूर्व अपने बच्चे के साथ जा रही एक महिला की स्कूटी नया बस्ती के समीप गड्ढे में घुसने के कारण पलट गई। इससे दोनों घायल हो गए। चोट लगने से छोटा बच्चा रोने लगा।
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नई बस्ती में रहने वाले 12 साल के सुमित ने जब बच्चे को रोता देखा तो उसने स्वयं सड़क के गड्ढे को भरने के लिए हथौड़ी उठा ली। इसके बाद वह आसपास से पत्थरों के टुकड़े लाकर गड्ढों में फिक्स करने लगा। सुमित कुमार ने बताया कि यह स्थान उसके घर के सामने है। आए दिन यहां पर दुपहिया वाहन गिरते रहते हैं। घायल बच्चे रोते हैं तो उसके अच्छा नहीं लगता है। कुछ दिन पूर्व स्कूटी से गिरी एक महिला को जब उसने कहते सुना कि यदि किसी ने यह गड्ढे भरे होते तो दुर्घटना नहीं होती, उसी समय मैंने फैसला किया कि सड़क में बने गड्ढों को भर दूं तो फिर दुर्घटना नहीं होगी। जहां विभाग और जनप्रतिनिधि बड़ी-बड़ी दुर्घटनाओं के बाद भी नजरें घुमा लेते हैं वहीं एक 12 साल के बच्चे का हथौड़ी लेकर सड़क के गड्ढों को भरने की कोशिश की तमाम लोगों ने सराहना की है।
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