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रास्ते के बजाए मलबा हटाने को जारी किए 57 लाख

Thu, 01 Dec 2016 10:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला Updated Thu, 01 Dec 2016 10:46 PM IST
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Way to remove debris instead issued 57 million
महाकाली में गिरा हुआ खोतिला भूस्खलन का मलबा - फोटो : अमर उजाला

सरकार ने खोतिला गांव को जाने वाले क्षतिग्रस्त रास्तों की मरम्मत के लिए धन देने के बजाए मलबा हटाने के लिए 57 लाख रुपए जारी कर दिए हैं। इसकी जानकारी मिलते ही लोग गुस्से में आ गए हैं। लोगों का कहना है कि पहाड़ी से गिरा सारा मलबा महाकाली में पहुंच गया था और वह धीरे-धीरे नदी के प्रवाह के साथ बहता जा रहा है। मलबा हटाने के लिए इतनी बड़ी रकम जारी करने को लोग कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने और धन का दुरुपयोग बता रहे हैं।

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दो दिन पहले खोतिला के लोगों ने रास्ते की मरम्मत नहीं होने पर चक्काजाम किया था। तब तहसीलदार आईबी मल्ल ने खोतिलावासियों को आश्वासन दिया था कि 30 नवंबर से खोतिला के लिए रास्ता बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा, मगर 30 नवंबर को रास्ते की मरम्मत का काम शुरू करने के बजाए सिंचाई विभाग को मलबा हटाने का निर्देश मिल गया। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता नवीन लस्पाल ने बताया कि अभी 57 लाख रुपए से सिर्फ मलबा हटाया जाएगा। रास्ते के निर्माण के लिए दूसरे विभाग को धन मिलेगा।
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मलबा हटाने में तीन महीने का समय लगेगा तथा बाद में रास्ते का इस्टीमेट तैयार होगा। खोतिला के लोगों को जैसे ही यह जानकारी मिली तो वह गुस्से में आ गए। लोगों ने कहा है कि मलबे से कोई परेशानी नहीं है। क्योंकि पहाड़ टूटकर निकला सारा मलबा पहले ही महाकाली में गिर गया था। वहां से वह धीरे-धीरे बहने लगा है। अब इतनी राशि मलबा हटाने के लिए जारी करने का क्या तुक है, यदि इससे आधी राशि रास्ते के निर्माण के लिए दी जाती तो गांव के लोगों का संकट दूर हो जाता। खोतिला के युवक मंगल दल अध्यक्ष कृष्ण सिंह नपलच्याल, क्षेत्र पंचायत सदस्य विजय गर्ब्याल ने कहा कि अभी रास्ता बनाया जाना जरूरी है। इसके अलावा किसी विकल्प पर ग्रामीण सहमत नहीं हैं। अब यदि लोगों की समस्या पर गौर नहीं हुआ तो अदालत की शरण में जाने को बाध्य हो जाएंगे। 

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