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सौ से ज्यादा गांवों में पेयजल संकट

Mon, 25 Jul 2016 10:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट (पिथौरागढ़)
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट (पिथौरागढ़) Updated Mon, 25 Jul 2016 10:33 PM IST
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Water crisis in more than a hundred villages
नारायणनगर में प्राकृतिक स्रोत से पानी भरते ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला
 बारिश और भूस्खलन से तहसील डीडीहाट, कनालीछीना और थल के सैकड़ों गांवों की पेयजल योजनायें ध्वस्त हो गई। सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामसभाओं की एकल पेयजल योजनाओं को हुआ है।
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आपदा से टूटी पेयजल योजनाओं का सबसे बुरा प्रभाव ग्रामीण जनता पर पड़ रहा है। अकेले डीडीहाट तहसील के 100 से अधिक गांवों में भारी पेयजल संकट गहराया हुआ है। दूनाकोट क्षेत्र, देवीसूना क्षेत्र, आदिचौरा, चौबाटी, भड़गांव, भांतड़, जौरासी, घिमाली, चमाली क्षेत्र के सैकड़ों गांवों की पेयजल योजना एक जुलाई को ध्वस्त हो गयी थी।
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जल निगम और जल संस्थान ने अपनी योजनाओं को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत चालू कर रखा है। जिससे नगर और उसके आसपास में पानी की सप्लाई हो रही है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की एकल पेयजल योजना और स्वैप मोड की कई योजनाओं को भारी नुकसान हो गया है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता बिलाल यूनूस ने बताया कि अभी तक डीडीहाट, धारचूला और मुनस्यारी की आपदा से क्षतिग्रस्त 124 योजनाओं के आगणन तैयार कर लिए गए हैं। वहीं नारायणनगर में पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है।
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लोग 2 से 3 किमी दूर प्राकृतिक स्रोतों से पीने का पानी ला रहे हैं। जल निगम के ईई एके कौशिक ने बताया कि नारायणनगर में आपदा से 34 लाख का नुकसान हो गया है। अभी योजना में वैकल्पिक रूप से पानी की सप्लाई शुरू की गई है। जल निगम ने भी 70 क्षतिग्रस्त योजनाओं के आगणन तैयार कर लिए हैं। ग्रामीण एकल योजनाओं के प्रस्ताव ग्राम पंचायत को खुद तैयार करने होंगे। इसके लिए खंड विकास कार्यालय के माध्यम से डीएम को प्रस्ताव भेजा जाएगा। 


लेकमकांडा की 600 आबादी पानी को तरसी
 लेकमकांडा ग्राम पंचायत की 600 से अधिक आबादी पानी के लिए तरस गई है। इन गांववालों को पानी पिलाने वाली चार पेयजल योजनाओं के ध्वस्त होने से पानी की जबर्दस्त किल्लत बनी हुई है।  
30 जून की तेज बारिश में लेकमकांडा ग्राम पंचायत के लिए बनी छबीसा पेयजल योजना, दार्ती पेयजल योजना, नैनीपातल पेयजल योजना और पानागढ़ पेयजल योजना क्षतिग्रस्त हो गई। योजनाएं ग्राम पंचायत के अधीन होने के कारण मरम्मत के लिए धन की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। स्वजल से बनी ये योजनाएं आपदा में ध्वस्त हुई हैं, लेकिन 25 दिन बीतने के बाद भी विकासखंड कार्यालय ने योजनाओं का सर्वे तक नहीं कराया। 


लेकमकांडा, छबीसा, दार्ती, नैनीपातल, पानागढ़ गांवों के लोग कई किलोमीटर दूर से पानी ढो रहे हैं। इन गांवों के लोगों का सारा दिन पानी की व्यवस्था में लग जा रहा है। लेकमकांडा के प्रधान देवेंद्र सिंह कन्याल कहते हैं कि ग्राम पंचायत के पास योजनाओं की मरम्मत के लिए धन नहीं है। विकासखंड कार्यालय को पेयजल योजनाएं ध्वस्त होने की जानकारी देकर मरम्मत की मांग की गई है। ग्राम पंचायत के लोगों की दिक्कत को देखते हुए आपदा मद से योजनाओं की मरम्मत के लिए तत्काल धन देने की आवश्यकता है।  
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