फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Villages situated on China border could not be illuminated even after 14 years

Pithoragarh: 14 साल में भी रोशन ना हो सके चीन सीमा पर बसे गांव, मौसम दे रहा चुनौती; अब काम पूरा करने का दावा

Fri, 09 Aug 2024 01:24 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Updated Fri, 09 Aug 2024 01:24 PM IST
सार

चीन सीमा पर बसे गांवों को रोशन करने की योजना परवान नहीं चढ़ पाई है। 14 बाद भी पांच जल विद्युत योजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकी हैं।

विज्ञापन
Villages situated on China border could not be illuminated even after 14 years
14 साल में भी रोशन ना हो सके चीन सीमा पर बसे गांव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चीन सीमा पर बसे गांवों को रोशन करने की योजना परवान नहीं चढ़ पाई है। 14 बाद भी पांच जल विद्युत योजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। उरेडा के लिए इन योजनाओं को धरातल पर उतारना चुनौती बना है और सीमा पर बसे लोग जल्द बिजली से अपने घरों को रोशन होने की उम्मीद लगाए हैं।

विज्ञापन


10 करोड़ रुपये से वर्ष 2010 में धारचूला के चीन सीमा पर बसे दारमा, व्यास घाटी के गांवों को रोशन करने के लिए सात जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण शुरू हुआ। उरेडा को इन परियोजनाओं को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी दी गई है। 14 साल बाद भी सिर्फ दुग्तू और नपलच्यू परियोजनाओं का निर्माण पूरा हो सका है। शेष पांच योजनाएं अब भी अधूरी हैं। ऐसे में चीन सीमा पर बसे गांवों को रोशन करने की योजना दम तोड़ रही है और यहां बसे लोग किसी तरह मोमबत्ती के सहारे अपने घरों में उजाला कर रहे हैं। 
विज्ञापन


मौसम बन रहा है चुनौती
हर वर्ष सितंबर, अक्तूबर में इन घाटियों में बर्फबारी शुरू हो जाती है। अप्रैल तक इन घाटियों को जोड़ने वाले रास्ते बर्फ से पट जाते हैं। मई-जून से सितंबर तक मानसून काल में दरकती पहाड़ी और गिरते बोल्डरों के बीच इन घाटियों में पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं होता। ऐसे में इन परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए मौसम बड़ी चुनौती बना है।
विज्ञापन
विज्ञापन


छह महीने में योजनाओं को धरातल पर उतारने का दावा
उरेडा बीते 14 साल में इन जल विद्युत परियोजनाओं को धरातल पर नहीं उतार सका है। अब छह माह में इनका निर्माण पूरा करने का दावा कर रहा है। उरेडा के अनुसार सभी योजनाओं का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अगले छह महीने के भीतर इन योजनाओं से चीन सीमा पर बसे गांव रोशन होंगे।

ये हैं जल विद्युत परियोजनाएं
परियोजना        क्षमता (किलोवाट में)   लागत (लाख में)
दुग्तू                       25                     109.39
सेला                      50                      130.84
नागलिंग                 50                      173.65
नपल्चू                    50                     173.20
कुटी                      50                      149.99
रांगकांग                 50                     202.65
बूंदी                      50                     150.18

सभी जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। दो योजनाओं का संचालन शुरू कर दिया है। अन्य योजनाएं भी जल्द संचालित होंगी।
- भूपाल सिंह कुंवर, परियोजना अधिकारी, उरेडा, पिथौरागढ़।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed