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बूबू शब्द सुनते ही उत्साहित हो गए वाजपेयी

Fri, 17 Aug 2018 10:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Fri, 17 Aug 2018 10:14 PM IST
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Vajpayee got excited when he heard the word Bubu
पूर्व प्रधानमंत्री स्व.अटल विहारी वाजपेयी के साथ पूर्व छात्र नेता इंद्रजीत बिष्ट - फोटो : अमर उजाला

राज्य आंदोलन के दौरान दो अक्तूबर 1994 को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई रैली से पहले राज्य आंदोलनकारी भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी से उनके 6 कृष्णमेनन मार्ग आवास पर मिले। तत्कालीन छात्र नेता इंद्रजीत बिष्ट ने जब वाजपेयी जी को बूबू शब्द से संबोधित किया तो वह काफी उत्साहित हो गए। उन्होंने पूछा, बूबू क्या होता है, तब उन्हें बताया गया कि बुजुर्ग लोगों को पहाड़ पर बूबू कहा जाता है। इस पर वह खुश हो गए और उन्होंने प्रतिनिधि मंडल को चाय पिलाई।

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राज्य आंदोलनकारी इंद्रजीत बिष्ट ने बताया कि अलग राज्य की मांग को लेकर डॉ. कीर्ति बल्लभ भट्ट, गणेश भंडारी और राजेश बिरवान ने अटल जी से मुलाकात कर उनका समर्थन मांगा। तब अटल जी ने बताया कि उन्होंने इस मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव से मुलाकात की। राव ने अलग राज्य की मांग को खारिज कर दिया था। इस पर अटल जी ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनी तो उत्तराखंड अलग राज्य बनाया जाएगा। इंद्रजीत ने बताया कि फोटो खिंचवाने के लिए वह अटल जी का हाथ पकड़कर लॉन में लाए।
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तेज धूप पड़ने पर उनकी आंखों में दर्द हुआ और उन्होंने कमरे में ही फोटो खिंचवाई। उन्होंने अपने पीए शिवराज को निर्देश दिए थे कि यह छात्र जब भी आएं उनसे मुलाकात अवश्य करवाना। इंद्रजीत ने कहा कि अटल जी बहुत ही सहृदय थे। उनका व्यक्तित्व बहुत विराट था। वाजपेयी मजबूत उत्तराखंड की नींव रखना चाहते थे। कहा कि शहीदों के सपनों के अनुरूप राज्य का निर्माण नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों को एकजुट कर भाजपा-कांग्रेस का मजबूत विकल्प खड़ा किया जाएगा।
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डीडीहाट में खराब अनाज के खिलाफ आवाज बुलंद की थी अटल ने
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। जनसंघ के अध्यक्ष के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 1973 में पहली बार डीडीहाट पहुंचे थे, जहां उन्होंने सस्ता गल्ला गोदाम से आमजन को मिलने वाले सड़े गेहूं और भीगी चीनी के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। जनसंघ के पदाधिकारी रहे चामू सिह भैंसोड़ा, देवी दत्त जोशी ने बताया कि 1973 में पहली बार डीडीहाट आने पर वाजपेयी जी का भव्य स्वागत हुआ था। सरस्वती शिशु मंदिर में हुए कार्यक्रम में कई स्थानीय लोग उनके पास गल्ला गोदाम से मिलने वाले सड़े गेहूं, भीगी चीनी की शिकायत लेकर पहुंचे थे। तब उन्होंने डीडीहाट से ही जनता को मिलने वाले खराब राशन के खिलाफ आवाज उठाई थी। इसका असर भी देखने को मिला था। उसके बाद से डीडीहाट के सस्ते गल्ले की दुकान में सही राशन की आपूर्ति होने लगी थी।

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