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दो हेक्टेयर बंजर जमीन पर बनाई फल पट्टी
सुधीर राठौर/अमर उजाला, बेड़ीनाग
Updated Tue, 14 Jul 2015 10:29 PM IST
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सरकारें और उनके हाकिम हरित क्रांति का बस ढोल पीटते हैं, जबकि हकीकत में कहानी कुछ और ही होती है। यहां बरसायत गांव में पूर्व सैनिक गोविंद बल्लभ पंत ने दो हेक्टेयर के बंजर खेतों में फलदार पेड़ों का बगीचा लगाने के सपने को पूरा करने के लिए सरकारी मदद लेने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर अपने दम पर हरा-भरा बगीचा तैयार कर सरकारी मशीनरी को करारा जवाब दिया है।
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बरसायत गांव के धौलकटिया तोक में ग्रामीणों की करीब 2 हेक्टेयर जमीन लंबे समय से बंजर थी। ग्रामीण भगीरथ पंत ने इसमें बगीचा लगाने का प्रयास किया। उनकी मृत्यु के बाद उनके सैनिक पुत्र गोविंद बल्लभ पंत छुट्टियों में बगीचे की देखभाल करते थे। वर्ष 2006 में सेवानिवृत्ति के बाद गोविंद ने अपना पूरा फोकस इस बगीचे पर कर लिया। काफी प्रयासों के बाद भी सरकारी मदद नहीं मिली तो उन्होंने खुद के संसाधनों से बगीचा विकसित किया। उन्होंने चहारदीवारी, पेयजल योजना बनाने के साथ ही बगीचे के बीच में मकान बनवाया। अब यहां आम के 600, च्यूरा के 50, सानड़ के 40, फल्याट के 60, हरड़ के 25, कटहल के 5 और लीची के 30 पेड़ विकसित हो गए है।
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गुजरात के व्यवसायी ने दिलाया मदद का भरोसा
अपनी सरकार, नेताओं और अफसरों से भले ही गोविंद बल्लभ पंत को कोई मदद नहीं मिली, लेकिन गुजरात के एक व्यवसायी ने उन्हें इस काम के लिए मदद का भरोसा दिलाया है। उन्होंने बताया कि इस बगीचे की जानकारी मिलने के बाद अहमदाबाद (गुजरात) के व्यवसायी रंबीर मजूमदार यहां आए। उन्होंने भावी योजनाओं के लिए मदद का भरोसा दिलाया है।
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बगीचे को ईको टूरिज्म से जोड़ने की योजना
पूर्व सैनिक गोविंद बल्लभ पंत की यहां बायो डायवर्सिटी फार्म विकसित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि बगीचे को ईको टूरिज्म से भी जोड़ेंगे। पंत ने बताया कि सरकारी मदद के नाम पर यहां तीन साल पहले पानी एकत्र करने की दो टंकियां बनायी गई हैं।