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आज गूंजेंगे ‘काले कौआ काले काले’ के स्वर
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Fri, 13 Jan 2017 10:09 PM IST
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डीडीहाट में उत्तरायणी के लिए घुघुते तैयार करती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
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शनिवार को मकर संक्रांति है। इस दिन कुमाऊं में उत्तरायणी (घुघुतिया) का पर्व मनाया जाता है। उत्तरायणी पर्व की एक दिन पहले ही जोरदार तैयारी की जाती है। शुक्रवार को सभी घरों में मीठे आटे से घुघुते तैयार किए गए। इसके अलावा कई प्रकार के अन्य व्यंजनों को भी तैयार किया गया। इनमें बड़ा, पुआ, खीर आदि शामिल किए गए।
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मकर संक्रांति के दिन तड़के हर घर के बच्चे अपने गले में घुघुतों की माला डालकर कौओं को बुलाएंगे। मान्यता है कि कौआ दीर्घकाल तक जीवित रहता है। इसके अलावा घर में किसी प्रियजन या मेहमान के आने की सूचना भी कौआ ही देता है। बच्चे इस दिन कौवे को पुआ, घुघुते, बड़ा आदि सामग्री भेंट करते हैं। यह परंपरा अतीतकाल से चली आ रही है। बच्चे सुबह-काले कौआ काले काले, ले कौआ पूरी, तू दे मैं सुनूकि छूरी, ले कौआ बड़ो, तू दे मैं सुनको घड़ो, ले कौआ भात, तू दे मैं सुनको खात, काले कौआ काले काले, भोल बटि आलै त द्वि लाता पालै।
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कुमाऊं में उत्तरायणी पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन से माघ स्नान शुरू हो जाता है। माघ के पवित्र महीने में यज्ञ, अनुष्ठान होने लगते हैं। इस दिन का महत्व इसलिए भी है क्योंकि सूर्य का उत्तरायण में प्रवेश होता है। जिले में ग्रामीण अंचलों में घुघुतिया पर्व को लेकर उल्लास देखा गया। महिलाओं ने दिन से ही घुघुते बनाने की तैयारी कर दी थी और शाम होते ही घुघुते बनने शुरू हो गए।
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