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नशे ने छीना परिवार का सहारा: मां का साया उठा, पिता जेल पहुंचे, तीन मासूमों का बचपन बेबसी के हवाले

Mon, 02 Nov 2026 12:58 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Published by: Heera Updated Mon, 02 Nov 2026 12:58 PM IST
सार

पिथौरागढ़ में मां की मौत के बाद पिता नशे की गिरफ्त में आकर जेल पहुंचे, जिससे तीन मासूम बच्चों का बचपन बेबसी में बीत रहा है।

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Three innocent children reached the child protection home in pithoragarh
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

नशा कैसे हंसते-खेलते परिवारों को लील जाता है, पिथौरागढ़ की यह कहानी कलेजा चीर देने वाली है। करीब दस साल पहले मां का साया उठ गया तो तीनों बच्चों की दुनिया पिता के इर्द-गिर्द सिमट गई। नशे की गिरफ्त में पिता ऐसे जकड़े कि जेल पहुंच गए। देखते ही देखते तीन मासूमों का बचपन बेबसी के हवाले हो गया। उन्हें उम्मीद थी कि पिता का साथ हर मुश्किल से बचा लेगा, लेकिन वक्त के साथ वही सहारा भी छूट गया।

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मां के जाने का दर्द और पिता की उपेक्षा बड़ी बहन को भी नशे की ओर ले गई। जब मामला बाल कल्याण समिति तक पहुंचा तो उसकी मदद के लिए कदम उठाए गए। पहले उसे पिथौरागढ़ के वन स्टॉप सेंटर में रखा गया और फिर उपचार के लिए दिल्ली के नशा मुक्ति केंद्र भेजा गया। मुश्किलों से जूझ रही यह किशोरी अब जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है। वह नशे से उबरने के साथ अपनी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में भी जुटी है।

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छोटी बहन को जिला बाल कल्याण समिति के निर्देशन में डीसीपीयू और चाइल्ड हेल्पलाइन की मदद से राजकीय बाल गृह अल्मोड़ा की देखरेख में भेजा गया है। वहां उसकी पढ़ाई और देखभाल की जिम्मेदारी उठाई जा रही है। वहीं छोटे भाई को 20 से 25 दिन तक चाइल्ड हेल्पलाइन में रखने के बाद नौ अक्तूबर को राजकीय बाल गृह रोशनाबाद हरिद्वार भेज दिया गया। मां-बाप के साये से वंचित इन तीनों भाई-बहनों की राह अब अलग-अलग हो गई है। उनके बेहतर भविष्य की उम्मीद बाल संरक्षण व्यवस्था पर टिकी है।

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नाबालिग बड़ी लड़की के नशा मुक्ति केंद्र से अवमुक्त होने के बाद उसकी देखभाल और संरक्षण की व्यवस्था पर विचार किया जाएगा। वहीं नाबालिग लड़के का परिषदीय परीक्षा केंद्र पिथौरागढ़ से हरिद्वार स्थानांतरित कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इसमें सफलता मिलेगी ताकि बच्चे की पढ़ाई कानूनी या प्रक्रियात्मक अड़चन के कारण प्रभावित न हो। -लक्ष्मण सिंह खाती, अध्यक्ष, जिला बाल कल्याण समिति, पिथौरागढ़

पॉक्सो पीड़िताओं के दो नवजात विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरण में
पिथौरागढ़ जिले में पॉक्सो के दो मामलों में पीड़िताओं से जन्मे दो नवजात शिशुओं को संरक्षण और देखभाल के लिए राजकीय विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण (स्पेशल एडॉप्शन एजेंसी) में रखा गया है। इनमें से एक नवजात को इसी वर्ष अगस्त में जिला महिला चिकित्सालय से डिस्चार्ज कराने के बाद अभिकरण भेजा गया था। दूसरे नवजात को अक्तूबर में अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वहां रखा गया। दोनों की देखभाल जिला बाल कल्याण समिति के निर्देशन में की जा रही है।

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