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बारिश और ओलावृष्टि से तीन मकान टूटे, थल-मुनस्यारी रोड फिर बंद

Fri, 21 Apr 2017 11:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़।
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़। Updated Fri, 21 Apr 2017 11:01 PM IST
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Three houses broken, rain-mudsiyari road closed after rain and hail
बा‌रिश से नुकसान - फोटो : अमर उजाला

जिले में शुक्रवार की शाम कई इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि से तीन मकान टूट गए और कल मुनस्यारी सड़क टूट गई। थल-मुनस्यारी रोड पर बेटुलीधार के पास इतनी ज्यादा ओलावृष्टि हो गई कि यातायात बंद हो गया है। दोनों तरफ दर्जनों गाड़ियां फंसी हैं। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में भी मौसम का मिजाज इसी तरह बना रहेगा और कुछ स्थानों पर गरज के साथ तेज बारिश हो सकती है। 

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जिला मुख्यालय में शाम 5.30 बजे से भारी बारिश के साथ ओले गिरने लगे। बेड़ीनाग के बुडेरा गांव में ओलों की मार से पूरन राम पुत्र देव राम का मकान टूट गया। इस परिवार ने दूसरी जगह शरण ले रखी है। नाचनी के खोयम गांव में प्रताप सिंह और दलीप सिंह के मकान टूट गए। वहां पर ग्राम्या की ओर से तैयार की गई 400 मीटर दीवार बह गई है। मुनस्यारी में दोपहर 12 बजे से करीब पांच घंटे तक तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई। बारिश से सभी नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। नाचनी के होकरा गांव जाने वाले सारे पैदल रास्ते बह गए हैं। थल-मुनस्यारी रोड पर बेटुलीधार के पास शुक्रवार को अपराह्न करीब पांच बजे इतनी ज्यादा ओलावृष्टि हो गई कि यातायात बंद हो गया है। दोनों तरफ दर्जनों गाड़ियां फंसी हैं। इनमें पर्यटकों के वाहन भी हैं। देर शाम तक लोनिवि ने सड़क पर गिरे ओलों को हटाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। कुछ यात्री पैदल ही मुनस्यारी की तरफ निकल गए। इन लोगों को आठ किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ा। लोगों ने बताया कि बेटुलीधार में करीब 250 से 500 ग्राम वजन के ओले गिरे हैं। उधर, बंगापानी तहसील के मदरमा ग्रामसभा के तामाखानी गांव में बिजली के शार्टसर्किट से लोगों के घरों में टीवी, मोबाइल, फ्रिज जैसे उपकरण फुंक गए। गांव के भगवती मंदिर के पास स्थित चीड़ के दो बड़े पेड़ बिजली की लाइन में गिरने से यह हादसा हुआ। पूरे इलाके की बिजली सप्लाई भंग है।
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फसलों को नुकसान
बेड़ीनाग/नाचनी (पिथौरागढ़)।
बेड़ीनाग में बृहस्पतिवार देर रात तक हुई बारिश अैर ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। देवीनगर, साहगराऊं, उडियारी, कांडेकिरौली, जाख, काशीथल, जगथली, कालेटी, गुरुबुरानी, राईआगर, चनकाना समेत तमाम हिस्सों में फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। बेड़ीनाग नगर, त्रिपुरादेवी, राईआगर, चौकोड़ी, धरमघर, पांखू में बारिश से निकास नालियां पट गईं। पानी खेतों और घरों में घुस गया। देवीनगर से गराऊं के लिए बन रही सड़क का मलबा भी घरों में घुस गया।
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 मुनस्यारी तहसील के जेर्थी गांव में ओलों की मार से 80 फीसदी और होकरा में 60 फीसदी फसल नष्ट हो गई है। खेतों में बोई गई प्याज पूरी तरह बर्बाद हो गई है। गेहूं और मसूर की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी डॉ. आरएस राणा ने बताया कि मुनस्यारी और बेड़ीनाग तहसील में ओलावृष्टि से खासा नुकसान हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश बोरा, जगत साह, नरेंद्र साह, नारायण सिंह, राम सिंह माहरा, हयात सिंह, मोहन राम, जगदीश राम आदि ने एसडीएम को पत्र देकर नुकसान का आकलन करने और किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।

 
24 घंटे में कहां कितनी बारिश
पिथौरागढ़ : 3.0 एमएम
बेड़ीनाग : 50.0 एमएम
मुनस्यारी : 3.0 एमएम
गंगोलीहाट : 2.0 एमएम
डीडीहाट : 4.0 एमएम
धारचूला : 1.0 एमएम


पावर हाउस में घुसा मलबा
थल (पिथौरागढ़)।
करीब 750 किलोवाट क्षमता वाली बरार बिजली परियोजना को अब भारी बारिश का खतरा हो गया है। बृहस्पतिवार रात क्षेत्र में हुई भारी बारिश से परियोजना के पावरहाउस में मलबा घुस गया है। यह परियोजना चार फरवरी से आठ मार्च तक चली थी। नौ मार्च को परियोजना की नहर में खराबी आ जाने के कारण यह फिर से बंद थी। बृहस्पतिवार रात की बारिश से अब परियोजना को ही खतरा हो गया है।


बताते हैं कि परियोजना की ओर आने वाली नहर में मलबा और पत्थर पट गए। इसके बाद सारा मलबा गोल गांव और जीआईसी के रास्ते में पट गया। इस कारण शुक्रवार सुबह लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बरार परियोजना का संचालन पहले लघु जल विद्युत निगम करता था। दो वर्ष पूर्व सरकार ने तीन मेगावाट से कम क्षमता वाली बिजली परियोजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी उरेडा को सौंप दी। उरेडा ने सहारनपुर के एक ठेकेदार लक्ष्मी मित्तल को परियोजना संचालन का काम सौंप दिया। जब से परियोजना निजी हाथों में गई है, तब से इसकी दुर्दशा होने लगी है। अब परियोजना के लंबे समय तक बंद रहने के बाद भी इसको संचालित करने का प्रयास नहीं किया जाता। पहले जब उत्तराखंड जल विद्युत निगम परियोजना का संचालन करता था, तब थल बाजार समेत इस घाटी के करीब 100 गांवों को इसी परियोजना से बिजली दी जाती थी। बताया गया है कि ठेकेदार यहां पर नहीं रहता। इस कारण किसी भी खराबी को ठीक करने में लंबा समय लग जाता है। 

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