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डूबने वाले मंदिरों में हंसेश्वर का जिक्र तक नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sat, 29 Jul 2017 10:40 PM IST
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हंसेश्वर मंदिर में पंचेश्वर बांध के विरोध में प्रदर्शन करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में जो मंदिर आ रहे हैं, उनमें महाकाली के किनारे स्थित हंसेश्वर मंदिर का उल्लेख ही नहीं है। शनिवार को हंसेश्वर में हुई कई गांवों के लोगों की बैठक में कहा गया कि बांध की डीपीआर को बिना तथ्यों के तैयार किया गया है। बैठक में 11 अगस्त को होने वाली जनसुनवाई का बहिष्कार करने का भी फैसला लिया गया। कहा गया कि महाकाली के किनारे बसे अधिकांश गांववालों को जनसुनवाई की कोई जानकारी तक नहीं दी गई है। बांध के विरोध में महाकाली की आवाज संगठन को पूरा साथ देने का भी ऐलान किया गया।
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बैठक में युवा समाजसेवी ललित पाल ने लोगों को बताया कि डीपीआर बनाने वाले को यह तक पता नहीं है कि महाकाली के किनारे विख्यात हंसेश्वर मंदिर भी है। हंसेश्वर भी डूब क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की विसंगतियों के अभी कई और खुलासे होंगे। उन्होंने जनसुनवाई के विरोध के लिए तैयार रहने को कहा।
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बैठक में जोग्यूड़ा के प्रधान राम सिंह, तीतरी के मनोहर बिष्ट, सिंतोली के राम सिंह बसेड़ा, घिंघरानी के पुष्कर राम, द्वालीसेरा के पदन सिंह, पंतसेरा की हेमलता देवी, डौड़ा के नरेंद्र सिंह, औलतड़ी के पूरन जोशी, अमतड़ी के मान सिंह कार्की, जोग्यूड़ा के सरपंच नरेंद्र चंद, क्षेत्र पंचायत सदस्य धरम सिंह कन्याल, मदन मोहन भट्ट, हंसेश्वर मंदिर के परमानंद गिरी आदि उपस्थित थे।
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