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Pithoragarh News: सिस्टम की दिव्यांगता ने निर्मला देवी को बना दिया लाचार

Thu, 12 Feb 2026 10:51 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Thu, 12 Feb 2026 10:51 PM IST
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The system's disability left Nirmala Devi helpless.
अपने घर पर बिस्तर में लेटी उर्मिला देवी। स्रोत:परिजन
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं और जिम्मेदारों की लापरवाही मरीजों और घायलों पर भारी पड़ रही है। ऐसा ही कुछ हुआ बिसखोली की 34 वर्षीय एक महिला के साथ। जिला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण महिला को अपना एक पैर गंवाना पड़ा है। परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल में उसका सही तरीके से इलाज नहीं किया गया। पांच दिन तक यहां रखने के बाद उसे हायर सेंटर रेफर किया गया। हायर सेंटर में हड्डी में मवाद एकत्र होने की बात सामने आई जिस कारण उसका पैर काटना पड़ा।
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दरअसल, झूलाघाट क्षेत्र के बिसखोली गांव की उर्मिला देवी (34) बीती 25 जनवरी को पेड़ से गिर कर घायल हो गई थीं। परिजनों से उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया। महिला के पति नरेंद्र सिंह बोरा ने बताया कि यहां सिर्फ उनके पैर में बने घाव में टांके लगाकर बिस्तर दे दिया गया। भीतर कितनी चोट है इसका पता लगाने की कोशिश तक नहीं की गई। पांच दिन बाद 29 जनवरी को अचानक संबंधित चिकित्सक ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया।
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घायल महिला को बरेली के एक अस्पताल ले जाया गया। वहां जांच में पता चला कि समय पर सही इलाज नहीं होने से टूटी हड्डी में इंफेक्शन हो गया है और मवाद काफी ज्यादा बढ़ गया है। हड्डी में मवाद भरने से अब पैर को नहीं बचाया जा सकता। ऐसे में डॉक्टरों को निर्मला देवी की जान बचाने के लिए उनके बाएं पैर को काटना पड़ा। पति नरेंद्र ने कहा कि जिला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से उनकी पत्नी को बेहद कम उम्र में अपना पैर गंवाकर दिव्यांग बनना पड़ा है। उन्होंने इसका जिम्मेदार जिला अस्पताल प्रबंधन को बताया है। संवाद
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खून नहीं रोक सका जिला अस्पताल प्रबंधन, हीमोग्लोबिन पहुंच गया चार
पीड़िता निर्मला देवी के पति नरेंद्र ने बताया कि जिला अस्पताल में बरती गई लापरवाही से उनकी पत्नी की जान पर बन आई। पैर में बने गहरे घाव से लगातार खून रिसता रहा। संबंधित डॉक्टर खून का रिसाव नहीं रोक सके। जब अत्यधिक रक्तस्राव से हड्डी में इंफेक्शन हो गया और पत्नी का हीमोग्लोबिन चार पहुंच गया तो उन्हें हायर सेंटर रेफर कर जिम्मेदारी निभा दी गई। हायर सेंटर में उनकी पत्नी को पांच यूनिट खून चढ़ाया गया तब जाकर उनका ऑपरेशन हुआ।
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बच्चे की टूटी हड्डी को जोड़ने में लगा दिए थे 19 दिन
ऐसा नहीं है कि जिला अस्पताल में लापरवाही का यह पहला मामला सामने आया है। इससे पहले भी एक बच्चे की टूटी हड्डी के ऑपरेशन में डॉक्टरों ने 19 दिन लगा दिए थे। बीती एक जनवरी को नगर निवासी गोविंद का 16 वर्षीय पुत्र पीयूष कुमार घर के पास गिर गया था। इस कारण उसकी कलाई से ऊपर की हड्डी टूट कर अलग हो गई थी। तब किशोर दर्द से कराहते हुए कई बार अस्पताल के चक्कर काटता रहा लेकिन उसकी हड्डी को जोड़ने के लिए जरूरी ऑपरेशन करने से हाथ पीछे खींच लिए गए। मजबूरी में पिता ने जब अपना दर्द साझा किया तो कुछ संगठनों ने अस्पताल प्रबंधन के समक्ष मामला उठाया। तब जाकर सिस्टम नींद से जागा और आननफानन 19 दिन बाद किशोर का ऑपरेशन कर टूटी हड्डी को जोड़ा गया।

कोट
यह गंभीर मामला है। इसकी जानकारी ली जाएगी। यदि महिला के इलाज में लापरवाही बरती गई है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। मरीजों के इलाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। - डॉ. भागीरथी गर्ब्याल, पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़

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