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Pithoragarh News: आसमान रूठा, सिंचाई नहरें क्षतिग्रस्त और खेतों में सूख रही फसल

Thu, 08 Jan 2026 10:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Thu, 08 Jan 2026 10:46 PM IST
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The skies are angry, irrigation canals are damaged, and crops are drying up in the fields.
तेजम तहसील के माजकोट में आपदा से क्षतिग्रस्त सिंचाई नहर। संवाद
नाचनी (पिथौरागढ़)। साहब, मौसम का साथ नहीं मिल रहा है। हमने जीतोड़ मेहनत कर फसल बोई है। बारिश नहीं हो रही है और खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बनी सिंचाई नहरें भी क्षतिग्रस्त हैं। ऐसे में सिंचाई के अभाव में फसल सूखने लगी है इससे हमारी मेहनत पर पानी फिर रहा है। यदि नहरों में पानी चलता तो फसल सूखने के साथ ही हम नुकसान से बच जाते। यह कहना है कि नाचनी तहसील के बमनगांव और माजकोट के किसानों का।
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दरअसल, बमनगांव और माजकोट में 20 एकड़ भूमि की सिंचाई के लिए लाखों रुपये खर्च कर नहरों का निर्माण किया गया है। वर्ष 2024 की आपदा में पांच किलोमीटर लंबी दोनों नहरें क्षतिग्रस्त हो गईं थी। आपदा मद से नहरों के सुधारीकरण के लिए प्रस्ताव तो भेजे गए लेकिन इन्हें आज तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है। लाखों रुपये से बनी नहरें बंद हैं। मौसम की बेरुखी के चलते फसलें सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं।
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मौसम के साथ ही सिस्टम की मार सह रहे क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यदि नहरों में पानी चलता तो वे अपने खेतों की सिंचाई कर पाते। यदि जल्द ही बारिश नहीं हुई तो किसानों की मेहनत बर्बाद होन तय है।
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आंदोलन करेंगे किसान
नाचनी। सिस्टम की अनदेखी से निराश किसानों की बारिश न होने से चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि सिंचाई नहरें उनके काम नहीं आ रही हैं। ऐसे में किसानों की आय दोगुनी करने के दावे हवाई हैं। किसानों ने कहा कि यदि जल्द ही नहरों में पानी नहीं चला तो उनके लिए सिर्फ आंदोलन कर सिस्टम को जगाना ही एकमात्र विकल्प होगा।
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बोले किसान
नहर बंद होने से फसल सूखने लगी है और खेत बंजर होने लगे हैं। सिंचाई के लिए पानी मिलता तो छह महीने का राशन पैदा होता। अब तो हमें नुकसान झेलने के लिए तैयार रहना होगा। - ललित मोहन द्विवेदी, बमनगांव
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डेढ़ साल से सिंचाई नहर बंद है। गेहूं की फसल सिंचाई न होने से सूख रही है। किसानों की समस्या देखने वाला कोई नहीं है और हमारी आय दोगुनी करने के सिर्फ कागजी दावे हो रहे हैं। - लक्ष्मी दत्त द्विवेदी, बमनगांव
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नहर बंद होने से सिंचाई न होने के कारण रबी और खरीफ दोनों फसलों की पैदावार कम हो रही है। सिंचाई का साधन न होने से किसान खेती से हाथ पीछे खींच रहे हैं। बंद नहरों में पानी चलता तो हम नुकसान से बचते। - गणेश द्विवेदी, माजकोट
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सिंचाई नहर क्षतिग्रस्त है और मौसम का साथ नहीं मिल रहा है। ऐसे में फसल सूखने लगी है। लाखों से बनी नहर हमारे काम नहीं आ रही है। यह किसानों की अनदेखी है। - जगदीश चंद्र द्विवेदी, माजकोट

कोट
आपदा मद में क्षतिग्रस्त सिंचाई नहरों की मरम्मत का प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही नहरों की मरम्मत कर कराई जाएगी। - सुरेंद्र सिंह बिष्ट, अपर सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग, धारचूला



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