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Pithoragarh News: दुर्गम गांव में बाखलियों की खामोशी सुना रही उजड़ने की मूक दास्तान

Tue, 17 Mar 2026 10:58 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Tue, 17 Mar 2026 10:58 PM IST
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The silence of the Bakhalis in this remote village tells a silent tale of devastation.
नाचनी (पिथाैरागढ़)। सीमांत क्षेत्र के दुर्गम गांव चामी भैंसकोट की वीरान बाखलियां और सूने आंगन पलायन की मूक दास्तान बयां कर रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के चलते 81 किलोमीटर दूर अस्पताल जाना आसान नहीं था। समय रहते सड़क न पहुंचने के कारण गांव से लगातार पलायन बढ़ता गया।
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तेजम तहसील के इस गांव में कभी 150 परिवार रहते थे। इनमें से 60 परिवारों ने अपने घर छोड़ दिए हैं। चामी भैंसकोट की बाखलियों का सन्नाटा इस बात का प्रतीक है कि विकास के नाम पर हुए दावे कितने अधूरे और बेमायने साबित हुए हैं। वर्तमान में यहां रह रहे 90 में से अधिकांश परिवारों में सिर्फ महिलाएं और बुजुर्ग ही मौजूद हैं। पलायन के कारण बाखलियां वीरान हो गई हैं। इनके आंगनों में उगी झाड़ियां पलायन रोकने के दावों को हकीकत का सच बता रही हैं।
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वर्ष 2010 तक ग्रामीण सड़क की मांग करते रहे लेकिन प्रशासन की नींद टूटने में देर हो गई। वर्ष 2011 में सड़क तो बनी लेकिन तब तक कई परिवारों ने गांव छोड़ दिया था। स्थानीय स्तर पर खोला गया तेजम अस्पताल न तो बेहतर इलाज और न ही प्रसव जैसी सुविधाएं दे पाया। बीमार और गर्भवती महिलाएं 81 किलोमीटर दूर इलाज के लिए मजबूर थीं।
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इस क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था का भी बुरा हाल है। चामी भैंसकोट में इंटर कॉलेज खोला गया है लेकिन यहां प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापकों के 12 से अधिक पद रिक्त हैं। पर्याप्त शिक्षकों की कमी के कारण स्थानीय और आसपास के ग्रामीणों ने बच्चों के भविष्य को देखते हुए पलायन किया। नतीजतन इंटर कॉलेज में छात्र संख्या सिर्फ 60 रह गई है।

जंगल जानवरों ने बढ़ा दी मुश्किल
खेती और बागवानी के लिए प्रसिद्ध यह गांव अब मुश्किल हालात से गुजर रहा है। यहां लीची का उत्पादन होता था लेकिन बंदर, लंगूर और अन्य वन्य जीव खेती और बागवानी को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार यदि वन्य जीव खेती को नुकसान नहीं पहुंचाते तो युवा स्थानीय स्तर पर रोजगार कर सकते थे लेकिन हालात के चलते उन्हें पलायन करना पड़ा।


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बोले ग्रामीण
गांव तक समय से सड़क पहुंचती तो ग्रामीण पलायन नहीं करते। क्षेत्र में स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था भी बदहाल है। यही कारण है कि हमारा गांव पलायन की मार सह रहा है। -कुंवर राम, पूर्व प्रधान
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यदि हमारे गांव तक समय से सड़क पहुंचती और स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलती तो पलायन नहीं होता। अब गांव छोड़ चुके लोग बाहर बस गए हैं। उनके लिए वापस लौटना लगभग नामुमकिन है। गांव में रह रहे परिवारों में भी महिलाएं और बुजुर्ग ही हैं। -विरेंद्र शाही

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यदि स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क सुविधा बेहतर होती तो चामी भैंसकोट के साथ ही अन्य गांवों से पलायन नहीं होता। जिले के गांवों से पलायन होना सरकार की नाकामी है। गांवों से पलायन रोकने के लिए हरसंभव मंच पर आवाज उठाएंगे। -हरीश धामी, विधायक, मुनस्यारी
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