{"_id":"577fdfd64f1c1be42f7fb09b","slug":"the-search-went-on-a-campaign-urging-people","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोगों के आग्रह पर चला खोजबीन का अभियान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोगों के आग्रह पर चला खोजबीन का अभियान
ब्यूरो/अमर उजाला, बस्तड़ी/डीडीहाट
Updated Fri, 08 Jul 2016 10:46 PM IST
विज्ञापन
खोजबीन करते एनडीआरएफ के जवान
- फोटो : अमर उजाला
लोगों के आग्रह पर बस्तड़ी में सुरक्षा एजेंसियों ने शुक्रवार को भी मलबे में खोजबीन का अभियान चलाया, लेकिन शनिवार से जवान बस्तड़ी से पूरी तरह हट जाएंगे। शुक्रवार को इस उम्मीद से खोजबीन की गई कि शायद किसी का दबा हुआ कीमती और जरूरी सामान निकल जाए। खोजबीन के अभियान में लगे अधिकारियों ने कहा कि मलबा पांच किलोमीटर के दायरे में फैला है। इस कारण अब मलबे में दबे किसी व्यक्ति का निकल पाना संभव नहीं है।
विज्ञापन
शुक्रवार को एनडीआरएफ के लेखराज मीणा, एसडीआरएफ के डीएस मेहता, आईटीबीपी के सहायक सेनानी कुलदीप सिंह, एसएसबी 11वीं वाहिनी के डिप्टी कमांडेंट बांके बिहारी के नेतृत्व में मलबे में खोजबीन का काम चलता रहा। 8 असम रेजीमेंट के जवान दो दिन पहले ही यहां से जा चुके हैं। एनडीआरएफ के लेखराज मीणा ने बताया कि ऐसी आपदाओं के समय खोजबीन का काम सिर्फ 72 घंटे तक ही चलता है, लेकिन यहां पर 100 घंटे तक खोजबीन का काम किया गया है। एनडीआरएफ के 62 जवान इस काम में लगे हैं। आईटीबीपी के सहायक सेनानी कुलदीप सिंह ने बताया कि मलबे से अब सिर्फ मवेशियों के शव मिल रहे हैं। किसी स्थान पर छिटपुट सामान भी निकल आ रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि अब मलबे में किसी व्यक्ति के जीवित होने और उसका शव बरामद होने की संभावना लगभग समाप्त हो चुकी है। उत्तराखंड पुलिस के साथ पीएसी के जवान भी यहां पर तैनात हैं। गांव के लोग भी अपने घरों के आसपास खुद ही खुदाई करने में लगे हैं। मलबे में दबा जरूरी सामान खोजने की लोगों को ज्यादा चिंता है।
विज्ञापन
मलबे में दफन हो गए रुपये, जेवर, कागजात
बस्तड़ी के मलबे में दर्जनों जानवर और कई लोग तो दफन हुए ही, लोगों के रुपये, जेवर, बच्चों के सर्टिफिकेट, जमीन के कागजात, किसान बही, बैंक की पासबुक, आधार कार्ड, वोटर कार्ड भी दब गए। अब लोगों को नए सिरे से यह प्रमाणपत्र बनाने होंगे। लोग चाहते हैं कि तहसील प्रशासन को पुराने रिकार्ड के आधार पर सभी लोगों को यह प्रमाणपत्र जारी कर देने चाहिए, ताकि लोगों को दोबारा प्रमाणपत्र बनाने के लिए चक्कर न काटने पड़ें।