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इलाज के अभाव में गई वनरावत लड़की की जान
ब्यूरो/अमर उजाला,डीडीहाट / पिथौरागढ़
Updated Fri, 19 Feb 2016 10:28 PM IST
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एक तरफ तो सरकार सबको स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ पर कई ऐसे इलाके हैं, जहां आज भी लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। डीडीहाट के मदनपुरी गांव की एक वनरावत बालिका की शुक्रवार सुबह इलाज नहीं मिलने की वजह से मौत हो गई। इस बालिका को एक माह से सर्दी, जुखाम और बुखार था, अगर इसे इलाज मिल जाता तो शायद इसकी जान बच जाती।
तहसील मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर देवीसूना के मदनपुरी तोक में वनरावत परिवार रहते हैं। एक माह से वनरावत कुंदन सिंह रजवार की तीन साल की बेटी हेमा बुखार और सर्दी, जुकाम से पीड़ित थी। कुंदन सिंह ने उसे एक बार डीडीहाट के अस्पताल और दो बार प्राइवेट अस्पताल में दिखाया था, लेकिन बुखार सही न होने से हेमा को लगातार कमजोरी हो गई थी। यह गरीब परिवार बच्ची को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर नहीं ले जा पाए, जिस कारण उसकी मौत हो गई। देवीसूना के क्षेत्र पंचायत सदस्य महेश सिंह कन्याल ने कहा कि इस संबंध में सीएमओ को पत्र भेजा गया था कि मदनपुरी में स्वास्थ्य कैंप लगाया जाए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने कोई भी कैंप नहीं लगाया। वह कहते हैं कि जिन इलाकों में अस्पताल नहीं हैं वहां पर नियमित स्वास्थ्य कैंप लगाए जाने चाहिए। कम से कम वनरावतों के गांवों में तो लगातार कैंप लगाए जाने चाहिए, ताकि वनरावतों को असमय मौत से बचाया जा सके।
बता दें कि आदम जनजाति वनरावतों की संख्या लगातार कम हो रही है। इस जनजाति को दुर्लभ जनजाति की श्रेणी में रखा गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वनरावतों की कुल आबादी इस समय 600 से अधिक नहीं है। उनकी मृत्यु दर ज्यादा है। बीमारी के कारण असमय वनरावतों की मौत होती रहती है। एक तरफ कुपोषण और दूसरी तरफ बीमारी के कारण इनकी यह दशा हो रही है।
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तहसील मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर देवीसूना के मदनपुरी तोक में वनरावत परिवार रहते हैं। एक माह से वनरावत कुंदन सिंह रजवार की तीन साल की बेटी हेमा बुखार और सर्दी, जुकाम से पीड़ित थी। कुंदन सिंह ने उसे एक बार डीडीहाट के अस्पताल और दो बार प्राइवेट अस्पताल में दिखाया था, लेकिन बुखार सही न होने से हेमा को लगातार कमजोरी हो गई थी। यह गरीब परिवार बच्ची को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर नहीं ले जा पाए, जिस कारण उसकी मौत हो गई। देवीसूना के क्षेत्र पंचायत सदस्य महेश सिंह कन्याल ने कहा कि इस संबंध में सीएमओ को पत्र भेजा गया था कि मदनपुरी में स्वास्थ्य कैंप लगाया जाए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने कोई भी कैंप नहीं लगाया। वह कहते हैं कि जिन इलाकों में अस्पताल नहीं हैं वहां पर नियमित स्वास्थ्य कैंप लगाए जाने चाहिए। कम से कम वनरावतों के गांवों में तो लगातार कैंप लगाए जाने चाहिए, ताकि वनरावतों को असमय मौत से बचाया जा सके।
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बता दें कि आदम जनजाति वनरावतों की संख्या लगातार कम हो रही है। इस जनजाति को दुर्लभ जनजाति की श्रेणी में रखा गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वनरावतों की कुल आबादी इस समय 600 से अधिक नहीं है। उनकी मृत्यु दर ज्यादा है। बीमारी के कारण असमय वनरावतों की मौत होती रहती है। एक तरफ कुपोषण और दूसरी तरफ बीमारी के कारण इनकी यह दशा हो रही है।
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