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Pithoragarh News: भोले के उद्घोष के साथ खुले शिव-पार्वती मंदिर के कपाट
Fri, 02 May 2025 10:53 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 02 May 2025 10:53 PM IST
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आदि कैलाश में स्थित शिव पार्वती मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु।
धारचूला (पिथौरागढ़)। ज्योलिंगकांग स्थित शिव-पार्वती मंदिर के कपाट यात्रियों के लिए खोल दिए गए हैं। कुटी के ग्रामीणों और यात्रियों ने मंदिर में पूजा-अर्चना कर आदि कैलाश के दर्शन किए। इस दौरान पूरा क्षेत्र बम-बम भोले के जयकारों से गुंजायमान रहा।
शुक्रवार सुबह ग्राम कुटी के लमा (पुजारी) गोकर्ण सिंह कुटियाल, रमेश सिंह कुटियाल, चैत सिंह कुटियाल, गोपाल सिंह कुटियाल, वीरेंद्र सिंह कुटियाल, हरीश सिंह कुटियाल आदि ने पारंपरिक वेशभूषा में रं समुदाय की रीति-रिवाज के अनुसार दिया-बत्ती, ध्वजा एवं चावल से शिव-पार्वती की पूजा की। इस दौरान पुजारियों ने देश एवं क्षेत्र की खुशहाली की प्रार्थना करते हुए मंदिर के कपाट खोले।
उन्होंने भागवान शिव की महिमा का बखान करते हुए कहा कि हया गंगरी गो फनतो न्यानी इंगो कुटे सोंग, बिनचती गो ताल छीरा इंगो ज्योलिंगकांग (पवित्र आदि कैलाश की गोद में हमारा प्यार गांव बसा है। इसी के ज्योलिंगकांग में बिनचती (पार्वती सरोवर) है जिसे पाकर हम धन्य हुए)। इस दौरान कैलाश विकास समिति अध्यक्ष पुनीत सिंह कुटियाल, महासचिव नगेंद्र सिंह कुटियाल, कुंवर सिंह, पाल सिंह, केदार सिंह, सुभाष कुटियाल, करन कुटियाल, अंजू, मंजू, प्रेमा कुटियाल समेत आईटीबीपी और सेना के अधिकारियों के अलावा कई ग्रामीण और यात्री मौजूद रहे।
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कुटी के ग्रामीण 1975 से कर रहे मंदिर की देखरेख
आदि कैलाश विकास समिति के अध्यक्ष पुनीत कुटियाल और सत्यवान सिंह कुटियाल ने बताया कि ज्योलिंगकांग स्थित आदि कैलाश पर्वत, पार्वती सरोवर, गौरीकुंड, शिव-पार्वती मंदिर आदि धार्मिक स्थल ग्राम पंचायत कुटी के तहत आते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1975 से कुटी के लोग मंदिर की देखरेख एवं पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
तीसरे दिन 150 यात्रियों को जारी हुए पास
एसडीएम मंजीत सिंह ने बताया कि आदि कैलाश यात्रा के तीसरे दिन शुक्रवार को 150 यात्रियों के इनर लाइन पास जारी किए गए। अब तक कुल 420 पास जारी हो चुके हैं। यात्रियों के आने से नगर में चहल-पहल बढ़ गई है। होम स्टे, होटल स्वामी और टूर ऑपरेटरों के चेहरे भी खिले हुए हैं। उधर दारमा घाटी में ग्रामीणों के गांव पहुंचने के बाद पंचाचूली दर्शन के लिए पर्यटक पहुंचने लगे हैं।
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शुक्रवार सुबह ग्राम कुटी के लमा (पुजारी) गोकर्ण सिंह कुटियाल, रमेश सिंह कुटियाल, चैत सिंह कुटियाल, गोपाल सिंह कुटियाल, वीरेंद्र सिंह कुटियाल, हरीश सिंह कुटियाल आदि ने पारंपरिक वेशभूषा में रं समुदाय की रीति-रिवाज के अनुसार दिया-बत्ती, ध्वजा एवं चावल से शिव-पार्वती की पूजा की। इस दौरान पुजारियों ने देश एवं क्षेत्र की खुशहाली की प्रार्थना करते हुए मंदिर के कपाट खोले।
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उन्होंने भागवान शिव की महिमा का बखान करते हुए कहा कि हया गंगरी गो फनतो न्यानी इंगो कुटे सोंग, बिनचती गो ताल छीरा इंगो ज्योलिंगकांग (पवित्र आदि कैलाश की गोद में हमारा प्यार गांव बसा है। इसी के ज्योलिंगकांग में बिनचती (पार्वती सरोवर) है जिसे पाकर हम धन्य हुए)। इस दौरान कैलाश विकास समिति अध्यक्ष पुनीत सिंह कुटियाल, महासचिव नगेंद्र सिंह कुटियाल, कुंवर सिंह, पाल सिंह, केदार सिंह, सुभाष कुटियाल, करन कुटियाल, अंजू, मंजू, प्रेमा कुटियाल समेत आईटीबीपी और सेना के अधिकारियों के अलावा कई ग्रामीण और यात्री मौजूद रहे।
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कुटी के ग्रामीण 1975 से कर रहे मंदिर की देखरेख
आदि कैलाश विकास समिति के अध्यक्ष पुनीत कुटियाल और सत्यवान सिंह कुटियाल ने बताया कि ज्योलिंगकांग स्थित आदि कैलाश पर्वत, पार्वती सरोवर, गौरीकुंड, शिव-पार्वती मंदिर आदि धार्मिक स्थल ग्राम पंचायत कुटी के तहत आते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1975 से कुटी के लोग मंदिर की देखरेख एवं पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
तीसरे दिन 150 यात्रियों को जारी हुए पास
एसडीएम मंजीत सिंह ने बताया कि आदि कैलाश यात्रा के तीसरे दिन शुक्रवार को 150 यात्रियों के इनर लाइन पास जारी किए गए। अब तक कुल 420 पास जारी हो चुके हैं। यात्रियों के आने से नगर में चहल-पहल बढ़ गई है। होम स्टे, होटल स्वामी और टूर ऑपरेटरों के चेहरे भी खिले हुए हैं। उधर दारमा घाटी में ग्रामीणों के गांव पहुंचने के बाद पंचाचूली दर्शन के लिए पर्यटक पहुंचने लगे हैं।