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शिक्षक-पुस्तक आंदोलन के समर्थन में धरने पर बैठे धारचूला के विधायक धामी
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पिथौरागढ़ महाविद्यालय में छात्रो के धरने का सर्मथन करते विधायक हरीश धामी। अमर उजाला
- फोटो : PITHORAGARH
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एलएसएम पीजी कॉलेज पिथौरागढ़ में चल रहा शिक्षक-पुस्तक आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है। आंदोलन के समर्थन में बुधवार को धारचूला के विधायक हरीश धामी और जिला पंचायत अध्यक्ष प्रकाश जोशी ने भी धरना दिया। छात्रसंघ अध्यक्ष राकेश जोशी ने कहा कि आंदोलन को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। जब तक शासनादेश जारी नहीं होता है आंदोलन जारी रखा जाएगा।
महाविद्यालय में पुस्तक और प्रवक्ताओं की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन 31वें दिन भी जारी रहा। बुधवार को महाविद्यालय पहुंचे धारचूला के विधायक हरीश धामी ने धरना स्थल पर कहा कि पूरे प्रदेश में उच्च शिक्षा बदहाल है। सरकार को सीमांत के इस महाविद्यालय में पुस्तकों और शिक्षकों की कमी शीघ्र पूरी करनी चाहिए। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रकाश जोशी ने कहा कि छात्रों के आंदोलन को उनका पूरा समर्थन है। यूथ कांग्रेस अध्यक्ष ऋषेंद्र महर सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने भी धरना दिया। इस अवसर पर अभिषेक पुनेठा, दीपक कापड़ी, शिवम, नूतन सहित तमाम छात्र-छात्रा उपस्थित रहे।
समर्थन में पूर्व छात्र नेता भी पहुंचे महाविद्यालय
पिथौरागढ़। छात्रों के आंदोलन के समर्थन में बुधवार को महाविद्यालय के पूर्व छात्र नेता भी पहुंचे। भूतपूर्व छात्र संघ अध्यक्ष दिनेश ओझा, महेश जोशी, पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष दीवान सिंह बिष्ट, पूर्व महासचिव इंद्रजीत सिंह बिष्ट, महिपाल सिंह खड़ायत, त्रिभुवन उपाध्याय, संजय भट्ट ने महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.डीएस पांगती से मुलाकात की। धरना स्थल पर पूर्व छात्र नेताओं ने कहा कि दशकों से महाविद्यालय समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने शासन से पिथौरागढ़ में सब रजिस्ट्रार कार्यालय खोलने और पुस्तकों, शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग की।
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महाविद्यालय प्रशासन ने अभिभावकों को भेजे पत्र
पिथौरागढ़। पीजी कॉलेज पिथौरागढ़ में छात्रों के लंबे आंदोलन और वार्ता के बावजूद आंदोलन स्थगित नहीं करने के मामले को लेकर प्राचार्य डॉ.डीएस पांगती की अध्यक्षता में अनुशासन मंडल की बैठक हुई। इसमें कहा कि 16 जुलाई को हल्द्वानी से आए उपनिदेशक की उपस्थिति में पांच घंटे तक चली वार्ता में कुछ छात्र मान गए थे, लेकिन सहमति पत्र तैयार होते ही अपनी बातों से मुकर गए। प्राचार्य ने कहा कि नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है। प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। छात्रों के धरना प्रदर्शन से प्रवेश कार्य भी बाधित होने की संभावना है। अगले माह छात्र संघ चुनाव भी होने हैं। महाविद्यालय में कानून व्यवस्था बाधित हो सकती है। इसको देखते हुए अनुशासक मंडल ने धरना दे रहे छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को पत्र भेजकर गतिविधियों से अवगत कराने का निर्णय लिया है।
टम्टा ने राज्य सभा में उठाया पुस्तक शिक्षक आंदोलन का मामला
पिथौरागढ़। राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा ने पीजी कॉलेज पिथौरागढ़ में पिछले 31 दिनों से चल रहे पुस्तक शिक्षक आंदोलन को राज्य सभा में उठाया। उन्होंने अलग विश्वविद्यालय की मांग भी उठाई।
राज्य सभा सदस्य ने कहा कि सीमांत का महाविद्यालय पुस्तकों और शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। पिथौरागढ़ महाविद्यालय की लाइब्रेरी में आधुनिक पाठ्यक्रम की पुस्तकें नहीं है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को कैसे अच्छी शिक्षा मिल सकती है। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की अलग जरूरतें हैं। भौगोलिक परिस्थिति के अनुसार जम्मू कश्मीर और बिहार का उदाहरण देते हुए कुमाऊं डिविजन में अलग विश्वविद्यालय खोलने का अनुरोध भी किया।
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आंदोलन की आड़ में कर रहे राजनीति
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ महाविद्यालय के छात्र संघ महासचिव भूपेश बिष्ट ने कहा है कि छात्र-छात्राओं की अधिकांश मांगें पूरी हो गई हैं। अब इस आंदोलन की आड़ में बाहरी लोग राजनीति कर रहे हैं। इससे महाविद्यालय का वातावरण खराब हो रहा है।
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महाविद्यालय में पुस्तक और प्रवक्ताओं की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन 31वें दिन भी जारी रहा। बुधवार को महाविद्यालय पहुंचे धारचूला के विधायक हरीश धामी ने धरना स्थल पर कहा कि पूरे प्रदेश में उच्च शिक्षा बदहाल है। सरकार को सीमांत के इस महाविद्यालय में पुस्तकों और शिक्षकों की कमी शीघ्र पूरी करनी चाहिए। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रकाश जोशी ने कहा कि छात्रों के आंदोलन को उनका पूरा समर्थन है। यूथ कांग्रेस अध्यक्ष ऋषेंद्र महर सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने भी धरना दिया। इस अवसर पर अभिषेक पुनेठा, दीपक कापड़ी, शिवम, नूतन सहित तमाम छात्र-छात्रा उपस्थित रहे।
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समर्थन में पूर्व छात्र नेता भी पहुंचे महाविद्यालय
पिथौरागढ़। छात्रों के आंदोलन के समर्थन में बुधवार को महाविद्यालय के पूर्व छात्र नेता भी पहुंचे। भूतपूर्व छात्र संघ अध्यक्ष दिनेश ओझा, महेश जोशी, पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष दीवान सिंह बिष्ट, पूर्व महासचिव इंद्रजीत सिंह बिष्ट, महिपाल सिंह खड़ायत, त्रिभुवन उपाध्याय, संजय भट्ट ने महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.डीएस पांगती से मुलाकात की। धरना स्थल पर पूर्व छात्र नेताओं ने कहा कि दशकों से महाविद्यालय समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने शासन से पिथौरागढ़ में सब रजिस्ट्रार कार्यालय खोलने और पुस्तकों, शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग की।
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महाविद्यालय प्रशासन ने अभिभावकों को भेजे पत्र
पिथौरागढ़। पीजी कॉलेज पिथौरागढ़ में छात्रों के लंबे आंदोलन और वार्ता के बावजूद आंदोलन स्थगित नहीं करने के मामले को लेकर प्राचार्य डॉ.डीएस पांगती की अध्यक्षता में अनुशासन मंडल की बैठक हुई। इसमें कहा कि 16 जुलाई को हल्द्वानी से आए उपनिदेशक की उपस्थिति में पांच घंटे तक चली वार्ता में कुछ छात्र मान गए थे, लेकिन सहमति पत्र तैयार होते ही अपनी बातों से मुकर गए। प्राचार्य ने कहा कि नया शिक्षण सत्र शुरू हो चुका है। प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। छात्रों के धरना प्रदर्शन से प्रवेश कार्य भी बाधित होने की संभावना है। अगले माह छात्र संघ चुनाव भी होने हैं। महाविद्यालय में कानून व्यवस्था बाधित हो सकती है। इसको देखते हुए अनुशासक मंडल ने धरना दे रहे छात्र-छात्राओं के अभिभावकों को पत्र भेजकर गतिविधियों से अवगत कराने का निर्णय लिया है।
टम्टा ने राज्य सभा में उठाया पुस्तक शिक्षक आंदोलन का मामला
पिथौरागढ़। राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा ने पीजी कॉलेज पिथौरागढ़ में पिछले 31 दिनों से चल रहे पुस्तक शिक्षक आंदोलन को राज्य सभा में उठाया। उन्होंने अलग विश्वविद्यालय की मांग भी उठाई।
राज्य सभा सदस्य ने कहा कि सीमांत का महाविद्यालय पुस्तकों और शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। पिथौरागढ़ महाविद्यालय की लाइब्रेरी में आधुनिक पाठ्यक्रम की पुस्तकें नहीं है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को कैसे अच्छी शिक्षा मिल सकती है। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की अलग जरूरतें हैं। भौगोलिक परिस्थिति के अनुसार जम्मू कश्मीर और बिहार का उदाहरण देते हुए कुमाऊं डिविजन में अलग विश्वविद्यालय खोलने का अनुरोध भी किया।
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आंदोलन की आड़ में कर रहे राजनीति
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ महाविद्यालय के छात्र संघ महासचिव भूपेश बिष्ट ने कहा है कि छात्र-छात्राओं की अधिकांश मांगें पूरी हो गई हैं। अब इस आंदोलन की आड़ में बाहरी लोग राजनीति कर रहे हैं। इससे महाविद्यालय का वातावरण खराब हो रहा है।