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Pithoragarh News: सीमांत के गांवों में मचेगी चैतोल की धूम

Mon, 27 Mar 2023 10:44 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Mon, 27 Mar 2023 10:44 PM IST
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Sorghati Chaitol festival religious program
पिथौरागढ़। सोरघाटी समेत नेपाल सीमा से लगे गांवों में पांच और छह अप्रैल को चैतोल पर्व की धूम रहेगी। गांवों में इसकी तैयारियां शुरू हो गई है। सोरघाटी में देवल समेत देवता अपनी 22 बहनों को भिटौली देने जाते हैं। इस पर्व को कृषि से भी जोड़ा जाता है।
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सोरघाटी में पांच अप्रैल को विण गांव के मंदिर से छात के साथ चैतोल शुरू होगी। पहले दिन देव डंगरिया, पुजारी और ग्रामीण दौला, देवलाल गांव, मखौलिया गांव होते हुए चटकेश्वर मंदिर से बस्ते, देकटिया, मड़सिलौली से घुंसेरा गांव जाएंगे। यहां से उर्ग, ओड़माथा, नैनीसैनी, कासनी होते हुए विण के तपस्यूड़ा मंदिर पहुंचेंगे।
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छह अप्रैल को कुसौली, भड़कटिया, रूइना, कोटली होते हुए सिमखोला से सेरादेवल, चैंसर गांव में आएंगे। चैंसर से देव डोला साथ चलेगा। यहां से जाखनी, कुमौड़, तिलढुकरी होते हुए घंटाकरण मंदिर पहुंचेंगे। यहां लिंठ्यूड़ा से देवी का डोला आता है। यहां देव डोले भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। यहां से फिर वापसी होती है। रात को विण मंदिर में विसर्जन होता है।
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चैतोल के दौरान गांवों में खेल लगते हैं। लेलू, जाख, मजिरकांडा, सतगढ़, तल्ला चर्मा समेत कई गांवों में चैतोल का पर्व मनाया जाता है। मड़सौन की चैतोल का जिक्र तो एटकिंशन की किताब में भी मिलता है। चैतोल में छात का का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि देवता अपने प्रभाव वाले क्षेत्र के गांवों में भ्रमण कर फसलों की ओलावृष्टि, अतिवृष्टि से सुरक्षा करते हैं।



सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था पुख्ता करने की मांग
पिथौरागढ़। चैतोल पर्व को देखते हुए लिंठ्यूड़ा के लोगों ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है। पूर्व सभासद केदार सिंह लुंठी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। इसमें कहा गया है कि छह अप्रैल को घंटाकरण शिव मंदिर में चैतोल मेले का आयोजन होना है। इसमें कई गांवों के देव डोलों के साथ सैकड़ों श्रद्धालु भी पहुंचेंगे। यहां देव डोलों का मिलन शाम को करीब छह बजे होता है। उन्होंने मेला समाप्ति तक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था करने और मेला के लिए अनुमति देने की मांग की है। ज्ञापन देने वालोें में राजेंद्र सिंह लुंठी, शमशेर सिंह लंठी, बसंत सिंह लुंठी, उमेद सिंह, कवींद्र सिंह आदि शामिल थे।
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