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Pithoragarh News: कहीं एक साथ मनी होली और दीपावली तो कोई निराश लौटा
Fri, 01 Aug 2025 12:14 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 01 Aug 2025 12:14 AM IST
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धारचूला में मतगणना स्थल ब्लाक कार्यालय के समीप बनाई गई बैरीकेडिंग पर पंचायत चुनाव के उम्मीदवारो
पिथौरागढ़। पंचायत चुनाव की मतगणना पूरी होते ही सीमांत जिले में ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य बनने के लिए मैदान में डटे 2879 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला हो गया। जीते प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने होली और दीपावली एक साथ मनाई। सभी जीत के जश्न में डूबे रहे जबकि हारे हुए प्रत्याशियों को निराश होकर घर लौटना पड़ा।
सीमांत जिले के आठों विकासखंडों की 680 त्रिस्तरीय पंचायतों में ग्राम पंचायत सदस्य के लिए 153, प्रधान के लिए 1716 प्रत्याशी मैदान में थे। क्षेत्र पंचायत की 287 सीटों में से 261 पर चुनाव हुआ और बीडीसी बनने के लिए 856 प्रत्याशियों ने चुनावी ताल ठोकी। जिला पंचायत की 31 सीटों पर हुए चुनाव में 154 प्रत्याशी मैदान में डटे रहे। चुनाव संपन्न होते ही सभी प्रत्याशी जीत-हार के गणित में लगे रहने के साथ ही मतगणना की तिथि का बेसब्री से इंतजार करते रहे।
बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई तो सभी प्रत्याशियों की धड़कनें तेज हो गईं और वे परिणाम जानने मतगणना केंद्रों पर पहुंचे। सुबह नौ बजे से परिणाम आने शुरू हुए और मैदान में डटे सभी 2879 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला हुआ। परिणाम जिस प्रत्याशी के पक्ष में रहा, वह खुशी से झूम उठा और समर्थकों के साथ अबीर-गुलाल उड़ाकर और आतिशबाजी कर जीत का जश्न मनाया। दूसरी ओर हार का सामना करने वाले प्रत्याशी और उनके समर्थक निराश होकर घर लौटते दिखे। सभी केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
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82 ग्राम पंचायतों में मुखिया तो 26 में निर्विरोध चुने गए बीडीसी सदस्य
जिले में 681 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष 598 में प्रधान पद के लिए चुनाव हुआ। 82 ग्राम पंचायतों में एकल नामांकन होने से इनमें मुखिया का निर्विरोध निर्वाचन हुआ है। डीडीहाट विकासखंड के खेतार कन्याल ग्राम पंचायत में प्रधान पद पर चुनाव नहीं हुआ। यहां प्रधान का पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया था। इस वर्ग की किसी भी महिला के आठवीं पास न मिलने से गांव को मुखिया नहीं मिल पाया। इसके अलावा 287 जिला पंचायत सीटों पर 26 बीडीसी सदस्य निर्विरोध चुने गए।
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भड़गांव जिपं सीट पर नहीं हुआ चुनाव, निर्दलीय को घोषित किया विजयी
नामांकन पत्रों की जांच के बाद से विवादों में रही भड़गांव जिला पंचायत सीट पर चुनाव नहीं हो सका। इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों का नामांकन निरस्त होने से मैदान में डटे एकमात्र निर्दलीय प्रत्याशी का निर्विरोध निर्वाचन तय था। भाजपा प्रत्याशी के हाईकोर्ट की शरण में जाने पर निर्वाचन आयोग को उन्हें प्रत्याशी घोषित कर चुनाव चिह्न आवंटित करने के आदेश दिए गए। इस पर निर्दलीय प्रत्याशी सुप्रीम कोट गए तो भाजपा प्रत्याशी के हक में दिए गए फैसले पर रोक लगाते हुए कोई निर्णय न होने तक इस सीट पर चुनाव स्थगित करने के आदेश जारी हुए। ऐसे में इस सीट पर चुनाव नहीं हुआ। मतगणना के दिन निर्दलीय प्रत्याशी संदीप बोरा को विजयी घोषित कर निर्वाचन अधिकारी ने प्रमाणपत्र दिया।
चंपावत में पंचायत चुनाव की मतगणना से चहल-पहल बढ़ी
चंपावत। जिला मुख्यालय स्थित वन पंचायत सभागार में सुबह आठ बजे से शुरू हुई मतगणना से चहल-पहल बनी रही। सुबह से ही ग्रामीण क्षेत्रों से प्रत्याशियों और समर्थकों का पहुंचना शुरू हो गया था। बारिश के बीच भी मतगणना का उत्साह अधिक दिखाई दिया। किसी ने बहू को किसी ने पत्नी, किसी ने पिता, किसी ने भाई, किसी ने मां, किसी ने ताऊ तो किसी ने चाचा को जिताने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाया था। जीत के बाद प्रत्याशियों के समर्थकों ने गुलाल उड़ाकर जश्न मनाया। एक दूसरे को मिठाई खिलाई और सभी का आभार जताया। इस बीच भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कभी-कभार लाठी भी फटकारनी पड़ी। संवाद
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सीमांत जिले के आठों विकासखंडों की 680 त्रिस्तरीय पंचायतों में ग्राम पंचायत सदस्य के लिए 153, प्रधान के लिए 1716 प्रत्याशी मैदान में थे। क्षेत्र पंचायत की 287 सीटों में से 261 पर चुनाव हुआ और बीडीसी बनने के लिए 856 प्रत्याशियों ने चुनावी ताल ठोकी। जिला पंचायत की 31 सीटों पर हुए चुनाव में 154 प्रत्याशी मैदान में डटे रहे। चुनाव संपन्न होते ही सभी प्रत्याशी जीत-हार के गणित में लगे रहने के साथ ही मतगणना की तिथि का बेसब्री से इंतजार करते रहे।
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बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई तो सभी प्रत्याशियों की धड़कनें तेज हो गईं और वे परिणाम जानने मतगणना केंद्रों पर पहुंचे। सुबह नौ बजे से परिणाम आने शुरू हुए और मैदान में डटे सभी 2879 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला हुआ। परिणाम जिस प्रत्याशी के पक्ष में रहा, वह खुशी से झूम उठा और समर्थकों के साथ अबीर-गुलाल उड़ाकर और आतिशबाजी कर जीत का जश्न मनाया। दूसरी ओर हार का सामना करने वाले प्रत्याशी और उनके समर्थक निराश होकर घर लौटते दिखे। सभी केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
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82 ग्राम पंचायतों में मुखिया तो 26 में निर्विरोध चुने गए बीडीसी सदस्य
जिले में 681 ग्राम पंचायतों के सापेक्ष 598 में प्रधान पद के लिए चुनाव हुआ। 82 ग्राम पंचायतों में एकल नामांकन होने से इनमें मुखिया का निर्विरोध निर्वाचन हुआ है। डीडीहाट विकासखंड के खेतार कन्याल ग्राम पंचायत में प्रधान पद पर चुनाव नहीं हुआ। यहां प्रधान का पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया था। इस वर्ग की किसी भी महिला के आठवीं पास न मिलने से गांव को मुखिया नहीं मिल पाया। इसके अलावा 287 जिला पंचायत सीटों पर 26 बीडीसी सदस्य निर्विरोध चुने गए।
भड़गांव जिपं सीट पर नहीं हुआ चुनाव, निर्दलीय को घोषित किया विजयी
नामांकन पत्रों की जांच के बाद से विवादों में रही भड़गांव जिला पंचायत सीट पर चुनाव नहीं हो सका। इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों का नामांकन निरस्त होने से मैदान में डटे एकमात्र निर्दलीय प्रत्याशी का निर्विरोध निर्वाचन तय था। भाजपा प्रत्याशी के हाईकोर्ट की शरण में जाने पर निर्वाचन आयोग को उन्हें प्रत्याशी घोषित कर चुनाव चिह्न आवंटित करने के आदेश दिए गए। इस पर निर्दलीय प्रत्याशी सुप्रीम कोट गए तो भाजपा प्रत्याशी के हक में दिए गए फैसले पर रोक लगाते हुए कोई निर्णय न होने तक इस सीट पर चुनाव स्थगित करने के आदेश जारी हुए। ऐसे में इस सीट पर चुनाव नहीं हुआ। मतगणना के दिन निर्दलीय प्रत्याशी संदीप बोरा को विजयी घोषित कर निर्वाचन अधिकारी ने प्रमाणपत्र दिया।
चंपावत में पंचायत चुनाव की मतगणना से चहल-पहल बढ़ी
चंपावत। जिला मुख्यालय स्थित वन पंचायत सभागार में सुबह आठ बजे से शुरू हुई मतगणना से चहल-पहल बनी रही। सुबह से ही ग्रामीण क्षेत्रों से प्रत्याशियों और समर्थकों का पहुंचना शुरू हो गया था। बारिश के बीच भी मतगणना का उत्साह अधिक दिखाई दिया। किसी ने बहू को किसी ने पत्नी, किसी ने पिता, किसी ने भाई, किसी ने मां, किसी ने ताऊ तो किसी ने चाचा को जिताने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाया था। जीत के बाद प्रत्याशियों के समर्थकों ने गुलाल उड़ाकर जश्न मनाया। एक दूसरे को मिठाई खिलाई और सभी का आभार जताया। इस बीच भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को कभी-कभार लाठी भी फटकारनी पड़ी। संवाद