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Pithoragarh News: 28 घंटे बाद खुली चीन सीमा को जोड़ने वाली सड़क
Tue, 22 Jul 2025 10:38 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 22 Jul 2025 10:38 PM IST
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तवाघाट-लिपुलेख सड़क पर पेलसिती के पास बोल्डर हटाती जेसीबी। स्रोत: ग्रामीण
पिथौरागढ़/धारचूला। पेलसिती झरने के पास चट्टानें टूटने से बंद हुई चीन सीमा को जोड़ने वाली सड़क 28 घंटे बाद खोली जा सकी। आवाजाही शुरू होने से सड़क के दोनो ओर फंसे लोगों ने राहत की सांस ली। सड़क बंद होने के कारण व्यास घाटी जाने वाल पोलिंग पार्टियों को धारचूला से देरी से रवाना किया गया।
पंचायत चुनाव के बीच मानसूनी बारिश ने मतदाताओं, निर्वाचन कर्मियों के साथ ही आम लोगों की दिक्कत बढ़ा दी है। बारिश के बाद मलबा आने से सड़कें बंद हो रही हैं। इससे निर्वाचन कर्मियों का बूथों तक तो मतदाताओं का मतदान के लिए अपने गांवों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। चीन सीमा के साथ ही व्यास घाटी के सात गांवों को जोड़ने वाली लिपुलेख-तवाघाट सड़क बंद होने से पोलिंग पार्टियां और मतदाता आठ घंटे तक फंसे रहे।
चीन सीमा के साथ व्यास घाटी के बूंदी, गर्ब्यांग, नपल्चू, गुंजी, नाबी, रांककांग और कुटी गांवों को जोड़ने वाली तवाघाट-लिपुलेख सड़क सोमवार दोपहर करीब दो बजे पेलसिती के पास विशालकाय बोल्डर गिरने से बंद हो गई थी। इस कारण सड़क के दोनों तरफ कई वाहन और स्थानीय लोग फंसे रहे। मंगलवार सुबह इन गांवों में मतदान संपन्न कराने के लिए पोलिंग पार्टियां विकासखंड मुख्यालय से रवाना हुईं।
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सड़क बंद होने से मतदान के लिए गांव जा रहे लोग फंसे रहे। बीआरओ ने बोल्डरों को तोड़कर मंगलवार शाम करीब छह बजे सड़क यातायात के लिए खोली। 28 घंटे बाद इस रूट पर वाहनों का संचालन शुरू होने से यात्रियों ने राहत की सांस ली। सड़क बंद होने के कारण व्यास घाटी जाने वाली पोलिंग पार्टियों को धारचूला में ही रोका गया था। इन सभी पार्टियों को सड़क खुलने के बाद रवाना किया गया।
इसी तरह मिलम-बुई, बांसबगड़-कोटा, डीडीहाट-आदिचौरा-हुनेरा, तवाघाट-उमचिया, नाचनी-भैंसकोट, खुमती-कटौजिया, होकरा-नामिक, बगीचा-सिलियाखोला और तवोवन-रांथी सड़क भी लंबे समय से बंद हैं। इन सड़कों पर वाहनों की आवाजाही थमने से क्षेत्र की 15 हजार से अधिक की आबादी को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन क्षेत्रों के मतदाता वोटिंग करने के लिए तो मतदान कर्मी अपने बूथों तक पहुंचने के लिए पैदल सफर करने के लिए मजबूर हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने कहा कि सड़कों को खोलने का काम जारी है। जल्द सड़कों पर आवाजाही शुरू कराने के प्रयास हो रहे हैं।
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सड़क बंद होने से ग्रामीण पैदल पहुंचे बूंदी
धारचूला। इस बार व्यास घाटी के सातों गांवों में मतदान केंद्र बनाया गया है। इन गांवों के अधिकांश मतदाता विकासखंड मुख्यालय में निवास करते हैं। सिर्फ गांवों में ही मतदान केंद्र बनने से ग्रामीण और मतदाताओं का मतदान के लिए अपने गांवों में पहुंचना मजबूरी है। चुनाव नजदीक आते ही मतदाता अपने गांवों का रुख करने लगे हैं। बीते सोमवार को तवाघाट-लिपुलेख सड़क बंद होने से 50 से अधिक ग्रामीणों को पैदल सफर कर अपने गांव बूंदी पहुंचना पड़ा। संवाद
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पंचायत चुनाव के बीच मानसूनी बारिश ने मतदाताओं, निर्वाचन कर्मियों के साथ ही आम लोगों की दिक्कत बढ़ा दी है। बारिश के बाद मलबा आने से सड़कें बंद हो रही हैं। इससे निर्वाचन कर्मियों का बूथों तक तो मतदाताओं का मतदान के लिए अपने गांवों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। चीन सीमा के साथ ही व्यास घाटी के सात गांवों को जोड़ने वाली लिपुलेख-तवाघाट सड़क बंद होने से पोलिंग पार्टियां और मतदाता आठ घंटे तक फंसे रहे।
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चीन सीमा के साथ व्यास घाटी के बूंदी, गर्ब्यांग, नपल्चू, गुंजी, नाबी, रांककांग और कुटी गांवों को जोड़ने वाली तवाघाट-लिपुलेख सड़क सोमवार दोपहर करीब दो बजे पेलसिती के पास विशालकाय बोल्डर गिरने से बंद हो गई थी। इस कारण सड़क के दोनों तरफ कई वाहन और स्थानीय लोग फंसे रहे। मंगलवार सुबह इन गांवों में मतदान संपन्न कराने के लिए पोलिंग पार्टियां विकासखंड मुख्यालय से रवाना हुईं।
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सड़क बंद होने से मतदान के लिए गांव जा रहे लोग फंसे रहे। बीआरओ ने बोल्डरों को तोड़कर मंगलवार शाम करीब छह बजे सड़क यातायात के लिए खोली। 28 घंटे बाद इस रूट पर वाहनों का संचालन शुरू होने से यात्रियों ने राहत की सांस ली। सड़क बंद होने के कारण व्यास घाटी जाने वाली पोलिंग पार्टियों को धारचूला में ही रोका गया था। इन सभी पार्टियों को सड़क खुलने के बाद रवाना किया गया।
इसी तरह मिलम-बुई, बांसबगड़-कोटा, डीडीहाट-आदिचौरा-हुनेरा, तवाघाट-उमचिया, नाचनी-भैंसकोट, खुमती-कटौजिया, होकरा-नामिक, बगीचा-सिलियाखोला और तवोवन-रांथी सड़क भी लंबे समय से बंद हैं। इन सड़कों पर वाहनों की आवाजाही थमने से क्षेत्र की 15 हजार से अधिक की आबादी को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन क्षेत्रों के मतदाता वोटिंग करने के लिए तो मतदान कर्मी अपने बूथों तक पहुंचने के लिए पैदल सफर करने के लिए मजबूर हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने कहा कि सड़कों को खोलने का काम जारी है। जल्द सड़कों पर आवाजाही शुरू कराने के प्रयास हो रहे हैं।
सड़क बंद होने से ग्रामीण पैदल पहुंचे बूंदी
धारचूला। इस बार व्यास घाटी के सातों गांवों में मतदान केंद्र बनाया गया है। इन गांवों के अधिकांश मतदाता विकासखंड मुख्यालय में निवास करते हैं। सिर्फ गांवों में ही मतदान केंद्र बनने से ग्रामीण और मतदाताओं का मतदान के लिए अपने गांवों में पहुंचना मजबूरी है। चुनाव नजदीक आते ही मतदाता अपने गांवों का रुख करने लगे हैं। बीते सोमवार को तवाघाट-लिपुलेख सड़क बंद होने से 50 से अधिक ग्रामीणों को पैदल सफर कर अपने गांव बूंदी पहुंचना पड़ा। संवाद