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गर्ब्याल और गुंज्यालों के नाम पर दर्ज हैं कालापानी की जमीन के दस्तावेज
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काली नदी का उद्गम स्थल कालापानी। अमर उजाला
- फोटो : PITHORAGARH
कालापानी के जिस क्षेत्र में नेपाल अपना दावा करता है उसका नेपाल से कोई लेना-देना नहीं है। भारतीय सीमा से लगा नेपाल का अंतिम गांव छांगरू भी कालापानी से 17 किलोमीटर की दूरी पर बसा है। छांगरू के साथ ही चीन सीमा की ओर स्थित तिंकर गांव में भी रं समुदाय के ही लोग निवास करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पूरी जमीन नेपाल के राजा ने भारतीय रं समुदाय के लोगों को दी थी। आज भी गुंजी गांव में राजा के मुहर वाले दस्तावेज मौजूद हैं।
कालापानी भारतीयों का तीर्थ स्थल है। रं समुदाय के लोग यहां पर अस्थि विसर्जन करते हैं। कालापानी, काली नदी का उद्गम स्थल है। यहां पर काली माता का एक मंदिर है। यही काली नदी कालापानी से भारत और नेपाल दोनों देशों का सीमांकन करती है। आगे चलकर टनकपुर में यह शारदा नदी बन जाती है। मानसरोवर यात्रा मार्ग पर स्थित गुंजी से कालापानी की दूरी नौ किमी है। इसके बीच में कोई आबादी नहीं है। कालापानी से 17 किमी दूर नेपाल का छांगरू गांव है। कालापानी में भारत के गर्ब्यालों की नाप भूमि है, जिसमें आम लोगों की कोई बसासत नहीं है। यहां पर
सुरक्षा एजेंसियां आईटीबीपी और आईबी तैनात हैं। इसके अलावा स्थानीय लोगों के छह होटल हैं। बताया जाता है कि राजशाही के दौर में नेपाल के राजा ने कालापानी क्षेत्र की जमीन गर्ब्याल और गुंज्याल परिवारों के नाम पर कर दी थी। सूत्रों के अनुसार इनके दस्तावेज आज भी गुंजी में मौजूद हैं। गुंजी से आगे कालापानी और लिपूलेख तक का भूभाग निर्जन है।
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- कालापानी से लीपूलेख की दूरी लगभग 15 किमी है। यहां विशाल दर्रे और पहाड़ियां हैं। जबकि यहां से धारचूला की ओर गर्ब्यांग के समीप काली नदी में सीतापुल स्थित है। इसी पुल से भारत और नेपाल के बीच आवाजाही होती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि नेपाल के अधिकारियों को भी अपनी भारत और चीन से लगी सीमा देखने के लिए भी भारत के इसी सीतापुल से नेपाल में प्रवेश करना पड़ता है।
क्षेत्र में संचार सुविधा नहीं
- इस क्षेत्र में संचार की कोई सुविधा नहीं है। केवल सुरक्षा एजेंसियों के पास सेटेलाइट फोन या वायरलेस रहते हैं। कालापानी के निकटवर्ती गुंजी गांव में स्थायी रूप से रहने वाले लगभग 50 परिवार और हर साल माइग्रेशन पर जाने वाले एक सौ परिवारों का पूरा राशन सहित अन्य जरूरत का सामान भारत से जाता है।
कालापानी के निकट स्थित अपि का जंगल भी नेपाल के राजा ने गर्ब्याल परिवारों को दिया था। आज भी यह भूमि गर्ब्यालों के नाम पर भूमि रिकार्ड में दर्ज है। यहां भारतीय कीड़ा जड़ी निकालने के जाते हैं।
कालापानी और यह पूरा क्षेत्र भारतीयों की भूमि है। यह जमीन यहां के लोगों के नाम पर दर्ज है। नेपाल का कालापानी क्षेत्र की जमीन पर दावा करना पूरी तरह से गलत है।
-कृष्णा गर्ब्याल, अध्यक्ष रं संस्था धारचूला।
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कालापानी भारतीयों का तीर्थ स्थल है। रं समुदाय के लोग यहां पर अस्थि विसर्जन करते हैं। कालापानी, काली नदी का उद्गम स्थल है। यहां पर काली माता का एक मंदिर है। यही काली नदी कालापानी से भारत और नेपाल दोनों देशों का सीमांकन करती है। आगे चलकर टनकपुर में यह शारदा नदी बन जाती है। मानसरोवर यात्रा मार्ग पर स्थित गुंजी से कालापानी की दूरी नौ किमी है। इसके बीच में कोई आबादी नहीं है। कालापानी से 17 किमी दूर नेपाल का छांगरू गांव है। कालापानी में भारत के गर्ब्यालों की नाप भूमि है, जिसमें आम लोगों की कोई बसासत नहीं है। यहां पर
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सुरक्षा एजेंसियां आईटीबीपी और आईबी तैनात हैं। इसके अलावा स्थानीय लोगों के छह होटल हैं। बताया जाता है कि राजशाही के दौर में नेपाल के राजा ने कालापानी क्षेत्र की जमीन गर्ब्याल और गुंज्याल परिवारों के नाम पर कर दी थी। सूत्रों के अनुसार इनके दस्तावेज आज भी गुंजी में मौजूद हैं। गुंजी से आगे कालापानी और लिपूलेख तक का भूभाग निर्जन है।
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- कालापानी से लीपूलेख की दूरी लगभग 15 किमी है। यहां विशाल दर्रे और पहाड़ियां हैं। जबकि यहां से धारचूला की ओर गर्ब्यांग के समीप काली नदी में सीतापुल स्थित है। इसी पुल से भारत और नेपाल के बीच आवाजाही होती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि नेपाल के अधिकारियों को भी अपनी भारत और चीन से लगी सीमा देखने के लिए भी भारत के इसी सीतापुल से नेपाल में प्रवेश करना पड़ता है।
क्षेत्र में संचार सुविधा नहीं
- इस क्षेत्र में संचार की कोई सुविधा नहीं है। केवल सुरक्षा एजेंसियों के पास सेटेलाइट फोन या वायरलेस रहते हैं। कालापानी के निकटवर्ती गुंजी गांव में स्थायी रूप से रहने वाले लगभग 50 परिवार और हर साल माइग्रेशन पर जाने वाले एक सौ परिवारों का पूरा राशन सहित अन्य जरूरत का सामान भारत से जाता है।
कालापानी के निकट स्थित अपि का जंगल भी नेपाल के राजा ने गर्ब्याल परिवारों को दिया था। आज भी यह भूमि गर्ब्यालों के नाम पर भूमि रिकार्ड में दर्ज है। यहां भारतीय कीड़ा जड़ी निकालने के जाते हैं।
कालापानी और यह पूरा क्षेत्र भारतीयों की भूमि है। यह जमीन यहां के लोगों के नाम पर दर्ज है। नेपाल का कालापानी क्षेत्र की जमीन पर दावा करना पूरी तरह से गलत है।
-कृष्णा गर्ब्याल, अध्यक्ष रं संस्था धारचूला।

कालापानी इलाके में स्थित गर्ब्यांग में भारत-नेपाल को जोड़ने वाला सीतापुल। अमर उजाला- फोटो : PITHORAGARH