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Pithoragarh News: दुष्कर्म का आरोपी छह महीने बाद नाबालिग साबित
Thu, 02 May 2024 10:50 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 02 May 2024 10:50 PM IST
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प्रतीकात्मक
पिथौरागढ़। दुष्कर्म के मामले के एक अभियुक्त को न्यायालय ने नाबालिग मानते हुए मामले को जांच के लिए किशोर न्याय बोर्ड को भेज दिया है। पुलिस ने अपनी विवेचना में उसकी उम्र 19 वर्ष दर्ज की थी। कोर्ट ने साक्ष्यों और दिल्ली उच्च न्यायालय की नजीर के आधार पर उसकी उम्र 16 वर्ष मानी।
घटना 17 नवंबर 2023 की है। नेपाल निवासी एक युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगा था। पुलिस ने मामले की विवेचना की और धारा 363, 376 और पॉक्सो के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मामला कोर्ट में गया तो सुनवाई विशेष सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने की। अभियुक्त की उम्र पुलिस ने 19 वर्ष दर्ज की थी। कोर्ट में अभियुक्त ने अपनी उम्र 15 वर्ष बताई। बचाव पक्ष के वकील आशीष हावर्ड ने बताया कि उम्र साबित करने के लिए गवाह के रूप में नेपाल से आए सरकारी कर्मचारी ने सरकारी विभाग की ओर से जारी जन्म प्रमाणपत्र, जन्म पंजीकरण रजिस्टर आदि प्रस्तुत किए। विशेष सत्र न्यायाधीश ने साक्ष्य अधिनियम की धारा-36 के तहत इन्हें सुसंगत माना। मेडिकल बोर्ड से भी जांच कराई गई। मेडिकल बोर्ड ने युवक की उम्र 18 से 20 वर्ष मानी।
विशेष सत्र न्यायाधीश ने इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर से प्रतिपादित मार्जिन ऑफ एरर के टू ईयर ऑन अदर साइड सिद्धांत की नजीर को लिया। इसमें मेडिकल बोर्ड ने निर्धारित न्यूनतम 18 वर्ष की आयु में दो वर्ष की कमी करते हुए अभियुक्त की आयु लगभग 16 वर्ष मानी। बचाव पक्ष के वकील आशीष हावर्ड ने बताया कि अभियुक्त के नाबालिग साबित होने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश ने मामले को जांच के लिए किशोर न्याय बोर्ड को भेजने के आदेश दे दिए हैं।।
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घटना 17 नवंबर 2023 की है। नेपाल निवासी एक युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगा था। पुलिस ने मामले की विवेचना की और धारा 363, 376 और पॉक्सो के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मामला कोर्ट में गया तो सुनवाई विशेष सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने की। अभियुक्त की उम्र पुलिस ने 19 वर्ष दर्ज की थी। कोर्ट में अभियुक्त ने अपनी उम्र 15 वर्ष बताई। बचाव पक्ष के वकील आशीष हावर्ड ने बताया कि उम्र साबित करने के लिए गवाह के रूप में नेपाल से आए सरकारी कर्मचारी ने सरकारी विभाग की ओर से जारी जन्म प्रमाणपत्र, जन्म पंजीकरण रजिस्टर आदि प्रस्तुत किए। विशेष सत्र न्यायाधीश ने साक्ष्य अधिनियम की धारा-36 के तहत इन्हें सुसंगत माना। मेडिकल बोर्ड से भी जांच कराई गई। मेडिकल बोर्ड ने युवक की उम्र 18 से 20 वर्ष मानी।
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विशेष सत्र न्यायाधीश ने इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर से प्रतिपादित मार्जिन ऑफ एरर के टू ईयर ऑन अदर साइड सिद्धांत की नजीर को लिया। इसमें मेडिकल बोर्ड ने निर्धारित न्यूनतम 18 वर्ष की आयु में दो वर्ष की कमी करते हुए अभियुक्त की आयु लगभग 16 वर्ष मानी। बचाव पक्ष के वकील आशीष हावर्ड ने बताया कि अभियुक्त के नाबालिग साबित होने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश ने मामले को जांच के लिए किशोर न्याय बोर्ड को भेजने के आदेश दे दिए हैं।।
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