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आर्मी में भर्ती होने का ऐसा जुनून कमर टायर बांधकर और बैग में ईंट भरकर रोज पांच किमी दौड़ लगाते हैं पवन
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पवन इस तरह कमर में टायर बांधकर और बैग में ईट भरकर हर रोज लगाते हैं पांच किमी दौड़।
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। राजकीय महाविद्यालय में आर्ट ऑनर्स के अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहे थल निवासी पवन कुमार दो साल से सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहे हैं। सेना में भर्ती होने की प्रक्रिया में तीन बार असफल होने के बावजूद वह जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं। इसके तहत वह अपने पीछे टायर बांधकर रोज बजेटी से चंडाक तक दौड़ रहे हैं।
सेना भर्ती में तीन बार असफल होने के बाद पवन में सेना में भर्ती होने के लिए पवन में ऐसा जनून चढ़ा कि वह अपनी पिछली तैयारियों से भी ज्यादा मेहनत करने लगे हैं। पवन सुबह छह बजे उठकर कमर में टायर बांधकर और पीठ के बैग में ईंट भरकर बजेटी से चंडाक रोड पर रोजाना पांच किमी दूरी तक दौड़ लगाते हैं। सड़क पर ही सेना भर्ती के लिए अभ्यास करना उनकी दिनचर्या बन चुकी है। पवन का कहना है कि वह पिछले दो सालों से इसी तरह तैयारी कर रहे हैं। सेना भर्ती में तीन बार असफल रहने से उनका हौसला घटने के बजाय बढ़ गया है।
जो गिरते हैं वह एक बार फिर उठते हैं
पिथौरागढ़। अब पवन कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (सीडीएस) के लिए तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना हैं कि जो गिरते हैं वह एक बार फिर उठते हैं। जो युवा असफलता मिलने पर निराश होकर गलत राहों पर चल पड़ते हैं, या गलत कदम उठा लेते हैं, उनके लिए पवन कुमार एक प्रेरणा हैं जो असफल होने के बाद अपने हौसले को और मजबूती दे रहे हैं।
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सेना भर्ती में तीन बार असफल होने के बाद पवन में सेना में भर्ती होने के लिए पवन में ऐसा जनून चढ़ा कि वह अपनी पिछली तैयारियों से भी ज्यादा मेहनत करने लगे हैं। पवन सुबह छह बजे उठकर कमर में टायर बांधकर और पीठ के बैग में ईंट भरकर बजेटी से चंडाक रोड पर रोजाना पांच किमी दूरी तक दौड़ लगाते हैं। सड़क पर ही सेना भर्ती के लिए अभ्यास करना उनकी दिनचर्या बन चुकी है। पवन का कहना है कि वह पिछले दो सालों से इसी तरह तैयारी कर रहे हैं। सेना भर्ती में तीन बार असफल रहने से उनका हौसला घटने के बजाय बढ़ गया है।
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जो गिरते हैं वह एक बार फिर उठते हैं
पिथौरागढ़। अब पवन कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (सीडीएस) के लिए तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना हैं कि जो गिरते हैं वह एक बार फिर उठते हैं। जो युवा असफलता मिलने पर निराश होकर गलत राहों पर चल पड़ते हैं, या गलत कदम उठा लेते हैं, उनके लिए पवन कुमार एक प्रेरणा हैं जो असफल होने के बाद अपने हौसले को और मजबूती दे रहे हैं।
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