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Pithoragarh News: पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज को मिला पहला मानव शव
Tue, 22 Sep 2026 11:01 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 22 Sep 2026 11:01 PM IST
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पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी डॉक्टर बनने की पहली सीढ़ी मानव शरीर के प्रत्यक्ष अध्ययन के साथ पार कर पाएंगे। कॉलेज में एमबीबीएस के पहले बैच की कक्षाएं शुरू होने से पहले कैडेवर उपलब्ध हो गया है जिससे विद्यार्थियों को एनाटॉमी की पढ़ाई में किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा।
मेडिकल कॉलेज को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) की मान्यता मिलने के बाद इसी सत्र से एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू होनी हैं। पहले बैच के लिए 50 सीट निर्धारित हैं। चिकित्सा शिक्षा में एनाटॉमी को आधारभूत विषय माना जाता है। प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में कैडेवर की कमी के कारण विद्यार्थियों को एनाटॉमी की पढ़ाई के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक और अन्य माध्यमों का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसे समय में पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज में पहला बैच शुरू होने से पहले कैडेवर की उपलब्धता विद्यार्थियों के लिए प्रत्यक्ष अध्ययन का अवसर उपलब्ध कराएगी।
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कैडेवर क्यों जरूरी...
कैडेवर का अर्थ है चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए उपलब्ध कराया गया मानव शव। एमबीबीएस विद्यार्थियों को एनाटॉमी की व्यावहारिक शिक्षा देने के लिए कैडेवर और विच्छेदन कक्ष जरूरी होते हैं। इसके माध्यम से विद्यार्थी मानव शरीर की वास्तविक संरचना को समझते हैं और हड्डियों, मांसपेशियों तथा विभिन्न अंगों का प्रत्यक्ष अध्ययन करते हैं। चिकित्सा शिक्षा के शुरुआती चरण में यह अनुभव आगे की पढ़ाई के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है।
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सात सीटों पर प्रवेश के लिए काउंसिलिंग आज से
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 50 सीट निर्धारित हैं। इनमें सात सीट केंद्र स्तर और 43 सीट राज्य स्तर के विद्यार्थियों के लिए हैं। केंद्र स्तर की सात सीटों पर प्रवेश के लिए 23 सितंबर से काउंसिलिंग शुरू होगी। इसके बाद विद्यार्थियों को सीट आवंटित की जाएगी। राज्य स्तर की 43 सीटों पर प्रवेश के लिए काउंसिलिंग 28 सितंबर से प्रस्तावित है।
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मेडिकल कॉलेज में इस सत्र से ही एमबीबीएस की कक्षाओं को शुरू किया जाना है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज ने सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली है। कॉलेज को कैडेवर भी उपलब्ध हुआ है जो बड़ी उपलब्धि है। -डॉ. एके सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़
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मेडिकल कॉलेज को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) की मान्यता मिलने के बाद इसी सत्र से एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू होनी हैं। पहले बैच के लिए 50 सीट निर्धारित हैं। चिकित्सा शिक्षा में एनाटॉमी को आधारभूत विषय माना जाता है। प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में कैडेवर की कमी के कारण विद्यार्थियों को एनाटॉमी की पढ़ाई के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक और अन्य माध्यमों का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसे समय में पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज में पहला बैच शुरू होने से पहले कैडेवर की उपलब्धता विद्यार्थियों के लिए प्रत्यक्ष अध्ययन का अवसर उपलब्ध कराएगी।
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कैडेवर क्यों जरूरी...
कैडेवर का अर्थ है चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए उपलब्ध कराया गया मानव शव। एमबीबीएस विद्यार्थियों को एनाटॉमी की व्यावहारिक शिक्षा देने के लिए कैडेवर और विच्छेदन कक्ष जरूरी होते हैं। इसके माध्यम से विद्यार्थी मानव शरीर की वास्तविक संरचना को समझते हैं और हड्डियों, मांसपेशियों तथा विभिन्न अंगों का प्रत्यक्ष अध्ययन करते हैं। चिकित्सा शिक्षा के शुरुआती चरण में यह अनुभव आगे की पढ़ाई के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है।
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सात सीटों पर प्रवेश के लिए काउंसिलिंग आज से
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 50 सीट निर्धारित हैं। इनमें सात सीट केंद्र स्तर और 43 सीट राज्य स्तर के विद्यार्थियों के लिए हैं। केंद्र स्तर की सात सीटों पर प्रवेश के लिए 23 सितंबर से काउंसिलिंग शुरू होगी। इसके बाद विद्यार्थियों को सीट आवंटित की जाएगी। राज्य स्तर की 43 सीटों पर प्रवेश के लिए काउंसिलिंग 28 सितंबर से प्रस्तावित है।
मेडिकल कॉलेज में इस सत्र से ही एमबीबीएस की कक्षाओं को शुरू किया जाना है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज ने सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली है। कॉलेज को कैडेवर भी उपलब्ध हुआ है जो बड़ी उपलब्धि है। -डॉ. एके सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़