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Pithoragarh News: वोट देकर चुकाओ दाम, नहीं अटकेगा कोई भी काम

Fri, 18 Jul 2025 11:31 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Fri, 18 Jul 2025 11:31 PM IST
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Pay the price by voting, no work will be stopped
पिथौरागढ़। सड़क पर डामरीकरण के लिए एक करोड़ रुपये से अधिक बजट की जरूरत है लेकिन हमारे मुखिया और क्षेत्र पंचायत सदस्य यह काम भी चुटकिंयों में पूरा कर देंगे, भले ही उन्हें पूरे पांच साल के कार्यकाल में सिर्फ 10 हजार से 25 लाख रुपये का बजट क्यों न मिलता हो। ओपन जिम के लिए भवन, उपकरण सहित 30 लाख से अधिक खर्च होंगे, लेकिन इस वादे को हमारे प्रधान जी जरूर निभाएंगे। ऐसे कई वादे हैं जो पंचायत चुनाव में मतदाताओं से किए जा रहे हैं। मैदान में डटे प्रत्याशी हर हाल में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए मतदाताओं से उनकी हर समस्या का समाधान करने का वादा कर रहे हैं। प्रत्याशियों का कहना है कि आप वोट देकर हमें जिताओगे तो आपका कोई भी काम नहीं अटकेगा। बजट कहां से आएगा, कैसे सभी वादे पूरे करेंगे, इसका जवाब प्रत्याशियों के पास नहीं है।
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दरअसल एक ग्राम पंचायत के विकास के लिए सभी स्रोतों को मिलाकर पांच साल में करीब 25 लाख रुपये तक बजट मिलता है। इसी बजट को ध्यान में रखकर मुखिया को अपने गांव के विकास की रूपरेखा बनानी होती है। क्षेत्र पंचायत सदस्यों को पूर्व में सालाना करीब 60 हजार रुपये की निधि मिलती थी, यह व्यवस्था वर्तमान में बंद है। ब्लॉक प्रमुख को मिलने वाली सालाना 60 लाख रुपये की निधि से हर क्षेत्र पंचायत में विकास कार्य होते हैं। सीमांत जिले में आठ विकासखंडों में 287 क्षेत्र पंचायतें हैं।
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ब्लॉक प्रमुख की निधि से एक क्षेत्र पंचायत सदस्य को सालाना करीब 10 हजार की निधि मिलेगी। यह भी तब संभव होगा जब क्षेत्र पंचायत सदस्य ब्लॉक प्रमुख के अपने खेमे का होगा। सीमांत जिले में 681 ग्राम पंचायतों में मुखिया बनने के लिए 1716 और 287 क्षेत्र पंचायतों में बीडीसी सदस्य बनने के लिए 856 प्रत्याशी चुनाव मैदान में डटकर मतदाताओं को लुभा रहे हैं। मतदाताओं के मुद्दे मूलभूत जरूरतों के मुताबिक हैं। किसी क्षेत्र में मतदाता बदहाल सड़क पर डामरीकरण कराने तो कहीं पेयजल व्यवस्था ठीक कराने की मांग प्रत्याशियों से कर रहे हैं। किन्हीं गांवों में युवा ओपन जिम स्थापित होने की उम्मीद प्रत्याशियों से लगाए हैं। प्रत्याशियों को भले ही अपने कार्यालय में इन कामों पर आने वाले खर्च के सापेक्ष बजट और निधि नहीं मिलेगी, फिर भी वे इन्हें पूरा करने का वादा मतदाताओं से कर रहे हैं। जागरूक मतदाता प्रत्याशियों जब इस पर सवाल दाग रहे हैं तो उनके लिए इसका जवाब देना मुश्किल हो रहा है। संवाद
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सोशल मीडिया पर भी गिना रहे हैं विकास के काम
प्रत्याशियों के लिए सोशल मीडिया भी प्रचार का सशक्त माध्यम बना है। भावी नेता बनने की चाह में अब तक राजनीति और सोशल मीडिया से दूर रहे प्रत्याशियों खासकर महिलाओं ने सोशल मीडिया में अपने अकाउंट खुलवाए हैं। फेसबुक, व्हाट्सएप सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रत्याशी सक्रियता दिखाते हुए विकास के काम गिनाते हुए इन्हें पूरा करने का वादा मतदाताओं से कर रहे हैं। मतदाताओं के सुख-दुख से हमेशा दूर रहे प्रत्याशी उनके बीच जाकर उनकी परेशानी दूर करने का भी वादा कर रहे हैं। जागरूक मतदाता फिलहाल प्रत्याशियों की नब्ज टटोल रहे है। वोट की चोट से मतदाता किसकी किस्मत संवारेंगे, यह 31 जुलाई को तय होगा।
बोले मतदाता
चुनाव के समय प्रत्याशी मतदाताओं से बड़े-बड़े वादे करते हैं। चुनाव निपटते ही इन्हें भुला दिया जाता है। आज का मतदाता जागरूक है, जो हर प्रत्याशी की बातों पर नजर रखता है। - हेम शाही, मल्ला भैंसकोट, मुनस्यारी।
कितने चुनाव देख लिए हैं। आज तक क्षेत्र की जनता सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है। इस बार भी प्रत्याशी जनता से बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, जो पूरे नहीं होंगे। - भारत भूषण चुफाल, हुपुली, मुनस्यारी।
जनता हर चुनाव में विकास के नाम पर मतदान करती है। हर चुनाव में प्रत्याशी जनता से विकास का वादा करते हैं। अब भी हमारा क्षेत्र विकास की दौड़ में पिछड़ा है। फिर जनता से विकास का वादा कर वोट मांगे जा रहे हैं। - रेनू कार्की, हाट पर्थ, डीडीहाट।
विकासखंड मुख्यालय के नजदीक वनराजियों के गांव तक विकास नहीं पहुंचा है। आम लोगों को सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत होती है। बड़े-बड़े वादे सिर्फ छलावा हैं, हर मतदाता यह समझता है। - महेश कन्याल, खेतार कन्याल, डीडीहाट।

कोट

क्षेत्र पंचायत सदस्यों को कोई निधि नहीं मिलती। ग्राम पंचायतों में विकास कार्य के लिए राज्य और 15 वें वित्त से बजट मिलता है जो आबादी के हिसाब से तय होता है। - हरीश चंद्र आर्या, जिला पंचायत राज अधिकारी, पिथौरागढ़।
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