हर महीने 15 लाख खर्च करने पर भी नहीं सुधरी सफाई व्यवस्था
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नगर के साफ सुथरा होने में पता नहीं कितना समय लगेगा, लेकिन नगरपालिका 15 वार्ड वाले इस नगर में हर महीने 15 लाख रुपये खर्च करती है। इसमें नियमित और अस्थायी कर्मचारियों का वेतन, मोहल्ला स्वच्छता समितियों के खर्च शामिल है। कूड़े का निस्तारण यहां से नैनीपातल के पास बनाए गए डंपिंग जोन में किया जाता है। इतने सारे तामझाम के बाद भी नगर में सफाई को लेकर हमेशा शिकायतें आती रहती हैं। यह बात अलग है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के आह्वान के बाद कुछ संगठन, कर्मचारी, अधिकारी भी अल्प समय के लिए इस अभियान से जुड़ते रहे हैं, लेकिन यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि इस नगर में अभी स्वच्छता के प्रति व्यापक स्तर की चेतना का विकास नहीं हो पाया है।
नगर के हर मोहल्ले से सफाई को लेकर शिकायतें आती रहती हैं। सड़क के किनारे कूड़ा पड़ा होना, नालियों में कचरा जमा होना, कुछ स्थानों पर कूड़े को कूड़ेदानों में ही जला देना, कूड़ा उठाने के बजाय नजदीक में बहने वाले नाले में फेंक देना अब इस नगर में आम बात हो गई है। कई घरों के लोग तो सड़क पर कूड़ा फैला देते हैं। नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी खीमानंद जोशी दावा करते हैं कि नगर में सफाई व्यवस्था पर खास ध्यान दिया जाता है, लेकिन निवर्तमान जिलाधिकारी डा. रंजीत सिन्हा ने नगर की सफाई व्यवस्था को लेकर कई बार पालिका के प्रति नाराजगी जताई थी। बाद में तो उन्होंने ऐसा नियम बना दिया था कि हर रविवार को सभी अधिकारी सफाई अभियान में हिस्सा लेंगे। उनके जाने के बाद अब तक किसी उच्चाधिकारी के स्तर से सफाई के प्रति कोई अभियान नहीं चलाया गया।
भाजपा अगले दिन भूल गई अभियान
भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के जन्मदिन पर एक मई को कुछ देर सफाई अभियान चलाया। तब पार्टी की जिला कार्यकारिणी की ओर से तय किया गया कि एक हफ्ते तक स्वच्छता सप्ताह मनाएंगे, लेकिन अगले दिन से नगर में कहीं पर भी सफाई अभियान नहीं चला। पार्टी के पदाधिकारी इस मामले में कोई जवाब नहीं देते।
अस्पतालों में नहीं चला सफाई अभियान
सीएमओ का पदभार संभालने के बाद डा. उषा गुंज्याल ने बुधवार को अपने कार्यालय परिसर में सफाई अभियान चलाया। उन्होंने ऐलान किया था कि सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों में नियमित सफाई अभियान चलेगा, लेकिन अब तक उनका न तो कोई आदेश अस्पतालों में पहुंचा और न सफाई का कोई अभियान चला।
नगर में व्यापक चेतना की जरूरत
नगर के संभ्रांत लोग मानते हैं कि सफाई के प्रति अभी व्यापक चेतना लाने की जरूरत है। ज्ञानप्रकाश पुस्तकालय समिति के निदेशक डा. पीतांबर अवस्था का कहना है कि सफाई के लिए नागरिक चेतना जरूरी है। जब तक हर व्यक्ति सफाई का महत्व नहीं समझेगा तब तक नगर साफ नहीं हो सकता। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन चंद्र भट्ट का कहना है कि अभियानों की शुरुआत दिखावे के लिए न हो। इसमें निरंतरता आनी जरूरी है। रंगकर्मी हेमराज बिष्ट का कहना है कि पहले लोग अपने घर से सफाई करें, फिर मोहल्लों की सफाई को निकलें। ठेकेदार संघ के जिलाध्यक्ष तारा चंद का कहना है कि सिर्फ नगरों में ही नहीं वरन गांवों, कस्बों में भी सफाई के प्रति जागरूकता लाई जाए।