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Uttarakhand News: 100 रुपये के नए नेपाली नोट से भारत-नेपाल में बढ़ेगा तनाव, जानिए क्या बोले भारतीय व्यापारी

Tue, 29 Oct 2024 11:56 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Published by: हीरा मेहरा Updated Tue, 29 Oct 2024 11:56 AM IST
सार

भारत-नेपाल के बीच फिर तनाव पैदा करने वाला मामला सामने आने वाला है। नेपाल अपने यहां एक सौ रुपये के नेपाली नोट में कुछ सीमावर्ती भारतीय भूभाग को शामिल कर नक्शा दर्शाने वाला है। इससे व्यापार और मैत्री संबंधी में असर पड़ेगा।

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New Nepali note of Rs 100 will increase tension between India and Nepal
भारत-नेपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत-नेपाल के बीच फिर तनाव पैदा करने वाला मामला सामने आने वाला है। नेपाल अपने यहां एक सौ रुपये के नेपाली नोट में कुछ सीमावर्ती भारतीय भूभाग को शामिल कर नक्शा दर्शाने वाला है। इससे व्यापार और मैत्री संबंधी में असर पड़ेगा। वर्ष 1990 के दशक से नेपाल भारतीय कालापानी क्षेत्र को अपना बताता आ रहा है। जबकि भारतीय काला पानी क्षेत्र आदि काल से भारतीय भूभाग है। नेपाल कहता है कि सुगौली संधि के बाद भारतीय कालापानी क्षेत्र नेपाल से लिया गया, लेकिन नेपाल को भूलना नहीं चाहिए कि सुगौली संधि तत्कालीन नेपाल की गोरखा राजशाही और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच चार मार्च 1816 के हुई थी।

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हिंदुस्तान के बंटवारे बाद भारत की स्वाधीनता (15 अगस्त 1947 ) के बाद जितना भूभाग अंग्रेज प्रशासकों ने भारत को सौंपा था, भारत ने उसमें तनिक भी वृद्धि नहीं की। जबकि भारत ने आजाद काश्मीर, चीन से लगा कुछ हिस्सा गंवाया ही है, लेकिन नेपाल कई बार भारत पर विस्तारवाद का आरोप लगा नेपाली भूभाग हथियाने का आरोप लगाता रहता है। अभी कुछ माह पूर्व बनबसा में एक मैत्री बस चलाई जा रही थी, इसमें नेपाल के मानचित्र में भारतीय भूभाग को अपने क्षेत्र में दर्शाया गया था। तब प्रशासन ने इस बस को नेपाल को लौटा दिया था। बनबसा से लगी नेपाल सीमा पर नेपाल की ओर की नोमैन्स लैंड कई जगह नेपाली नागरिकों ने कब्जा कर खेती करना शुरू कर दिया है। इस संबंध में भारत-नेपाल अधिकारियों की बैठक में मामला उठता रहता है, लेकिन दोनों देशों के सर्वेक्षण विभाग पर छोड़ दिया जाता है।

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नेपाल के नए नोट में भारतीय भूभाग को अपना बता गलत नक्शा प्रदर्शित करने से दोनों देशों की मैत्री पर आंच आएगी। आदि काल से चली आ रही मित्रता पर अपनापन नहीं रहेगा। लोगों के मनों और संबंधों में दरार पैदा होगी।

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-बहादुर सिंह पाटनी, पूर्व उपाध्यक्ष जिला पंचायत चंपावत।

नेपाल अपने नए नोट में गलत नक्शा प्रदर्शित कर उकसाने वाला कार्य कर रहा है। भारत ने कभी भी नेपाल या किसी भी अन्य पड़ोसी देश की एक इंच जमीन नहीं ली है। नेपाल भारत के आदि काल से मैत्री संबंध हैं। नेपाल सरकार को वास्तविक अपना सही नक्शा ही नई मुद्रा में दर्शाना होगा।

- कैप्टन भानी चंद, अध्यक्ष गौरव सेनानी कल्याण समिति, बनबसा टनकपुर।

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