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जहां लगती थी कभी लाइन, वहां आज है सन्नाटा
कृष्णा गर्ब्याल/अमर उजाला, धारचूला
Updated Sun, 20 Nov 2016 11:02 PM IST
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नेपाल के दार्चुला बाजार में रविवार को पसरा सन्नाटा
- फोटो : अमर उजाला
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पश्चिमी नेपाल के दार्चुला जिला मुख्यालय में मुख्य बाजार के नुक्कड़ पर स्थित सौंदर्य प्रसाधन की दुकान में अब ग्राहकों की भीड़ नहीं दिखती। आठ नवंबर तक इस दुकान में सामान खरीदने के लिए लाइन लगानी पड़ती थी। भारतीय बाजार से सीमेंट, सरिया जैसी निर्माण सामग्री लेकर दार्चुला जाने वाले मजदूर भी अब नहीं दिखते। बड़ी करेंसी भारत में बंद हुई, लेकिन बाजार नेपाल का चौपट हो गया।
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वजह साफ है कि नेपाल के सीमावर्ती बाजारों में भारतीय ग्राहक ही ज्यादा संख्या में खरीदारी को पहुंचता है। अन्य दिनों रविवार को भारतीय ग्राहकों से गुलजार रहने वाले नेपाल के दार्चुला बाजार में रविवार को कोई ग्राहक नहीं था। महाकाली पर बने झूलापुल से आवाजाही करने वालों की संख्या करीब 60 फीसदी तक कम हो गई है। दोनों देशों के बीच सामाजिक रिश्तों से कहीं ज्यादा व्यावसायिक रिश्ते हैं। दोनों देशों के व्यापारियों को उम्मीद है कि यह सन्नाटा जल्दी टूटेगा।
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नोटबंदी से नेपाल के व्यापारी ज्यादा प्रभावित हैं। भारतीय क्षेत्र में तो लोगों को उनके बैंक अकाउंट से थोड़ा बहुत पैसा मिल जा रहा है, लेकिन नेपाल में जिन व्यापारियों के पास 500 और 1000 के नोट हैं, उनके बदलने का संकट खड़ा हो गया है। दार्चुला बाजार में भारतीय लोग खासकर सौंदर्य प्रसाधन एवं विदेशी सामान को खरीदने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इस समय भारतीयों के पास करेंसी की कमी है। नेपाल के दार्चुला बाजार के व्यापारी धनराज का कहना है कि दोनों देशों के सीमावर्ती बाजारों में असर पड़ा है। नेपाल के पत्रकार भोजराज जोशी का कहना है कि नेपाल की अर्थव्यवस्था पर भी नोटबंदी का असर पड़ रहा है, लेकिन उम्मीद हैं कि जल्द सब कुछ सामान्य हो जाएगा। जिन नेपाली व्यापारियों के पास अप्रचलित भारतीय मुद्रा है उसे बदलने की छूट मिलनी चाहिए।
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कुछ दिनों में सामान्य होगा बाजार
धारचूला व्यापार संघ अध्यक्ष भूपेंद्र थापा का कहना है कि कुछ दिनों के बाद बाजार सामान्य होने लगेगा। सरकार के इस फैसले से कालाबाजारी करने वालों पर नकेल कसी जा सकेगी। वह दावा करते हैं कि लोग कष्ट उठाने के बावजूद सरकार के फैसले का स्वागत कर रहे हैं। देश की अर्थव्यवस्था को सही दिशा देने में यह प्रयास कामयाब होगा।
नई करेंसी और छोटे नोट बाजार में उपलब्ध कराने चाहिए
व्यवसायी लक्ष्मी परमार का कहना है कि सरकार को तत्काल नई करेंसी और छोटे नोट बाजार में उपलब्ध कराने चाहिए। ऐसा करने से बाजार गति पकड़ेगा और लोगों की क्रयशक्ति पहले की तरह ही पटरी पर आ जाएगी। वह मानती हैं कि फैसला लेने से पहले बैंकों में प्रचलित मुद्रा पहुंचा देनी चाहिए थी। इससे हालात ज्यादा खराब नहीं होते।