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संकट में हैं पहाड़ के प्राकृतिक जल स्रोत
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Wed, 09 Nov 2016 10:24 PM IST
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पिथौरागढ़ में साइंस आउटरीच कार्यक्रम में बोलते प्रो. केएस वल्दिया।
- फोटो : अमर उजाला
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भूवैज्ञानिक पद्मभूषण प्रो. केएस वल्दिया ने कहा है कि वर्षा चक्र में आ रहा बदलाव जल स्रोतों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। मौसम चक्र में हाल के वर्षों में इस तरह के बदलाव आ रहे हैं कि अब सभी इलाकों में समान वर्षा नहीं होती। कहीं पर अत्यधिक बारिश होती है तो कई इलाकों में सूखे की नौबत भी आ जाती है।
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बुधवार को यहां जिला पंचायत सभागार में चल रहे साइंस आउट रीच कार्यक्रम के समापन सत्र में प्रो. वल्दिया ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में पिछले एक दशक में वर्षा चक्र काफी बदला है। अत्यधिक वर्षा, सूखा, हिमपात की स्थितियां इसी कारण हैं। वर्षा की असमानता के कारण पहाड़ों में प्राकृतिक जल स्रोत संकट में पड़ते जा रहे हैं।
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समापन सत्र में बंगलुरू के वैज्ञानिक डा. उदय रंगा ने एड्स के फैलने का कारण, बीमारी की रोकथाम के लिए हुई खोजों की जानकारी दी। कहा कि एचआईवी वायरस जंगली जानवरों से मनुष्यों में संक्रमित हुआ। बंगलूरू के ही प्रो. उमेश बाघमरे ने कहा कि आज हम एलईडी बल्ब के रूप में सेमी कंडक्टर के प्रयोग से 95 फीसदी तक बिजली बचा सकते हैं। आज जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रो. बीडी लखचौरा, डा. अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ के प्रो. केएस कठायत ने भी व्याख्यान दिया। समापन पर जिला पंचायत अध्यक्ष प्रकाश जोशी ने वैज्ञानिकों का आभार जताया।
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आयोजक हिमालयन ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि दो दिन के इस कार्यक्रम में 22 विद्यालयों के 150 विद्यार्थी शामिल हुए। किशोर चंद्र पाटनी, दिनेश भट्ट, राजीव जोशी, गंभीर रावल, मुकेश जोशी, गरिमा जोशी, हेमराज वल्दिया, संजय पाटनी ने सहयोग दिया।