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Pithoragarh News: ॐ की तरह आदि कैलाश पर्वत पर भी बना है प्राकृतिक त्रिशूल

Fri, 01 Dec 2023 10:45 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Fri, 01 Dec 2023 10:45 PM IST
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Like Om, there is a natural trident made on Adi Kailash mountain also.
आदि कैलाश पर्वत पर नीचे की ओर प्राकृतिक रूप से बना त्रिशूल। संवाद
पिथौरागढ़। ॐ पर्वत में जिस तरह से प्राकृतिक रूप से ''''''''ॐ'''''''' शब्द का आकार बना है उसी तरह शिव के प्राचीन निवास स्थल आदि कैलाश में त्रिशूल है। अधिक बर्फबारी होने के बाद प्राकृतिक रूप से बना यह त्रिशूल और अधिक स्पष्ट नजर आता है। नीचे की ओर झुके इस त्रिशूल को देखकर ऐसा लगता है जैसे भगवान शिव स्वयं इसे हाथों में पकड़े विराजमान हों।
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लगभग 14 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित ज्योलिंगकांग में आदि कैलाश पर्वत और पार्वती सरोवर के दर्शनों के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्यास घाटी जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान लोगों ने ज्योलिंगकांग बेस कैंप में पार्वती सरोवर को जाने वाले मार्ग में स्थापित किए गए 28 फुट ऊंचे त्रिशूल को तस्वीरों में बहुत देखा, लेकिन कम ही लोगों को पता है कि आदि कैलाश पर्वत पर भी एक त्रिशूल की प्राकृतिक आकृति भी है। आदि कैलाश पर्वत पर बना यह त्रिशूल नीचे की ओर बना हुआ है। इसका दाहिना हिस्सा आगे की ओर खंडित है लेकिन बर्फबारी के बाद यह हिस्सा भी भर जाता है। गौरी कुंड के ऊपर स्थित इस त्रिशूल पर नजर पड़ते ही ऐसा लगता है जैसे भगवान शिव अपने प्राचीन निवास स्थल आदि कैलाश पर्वत पर त्रिशूल रखकर स्वयं विराजमान हों।
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महाराष्ट्र के श्रद्धालुओं ने स्थापित किया था 28 फुट ऊंचा त्रिशूल
पिथौरागढ़। आदि कैलाश के बेस ज्योलिंगकांग में लोहे का त्रिशूल नासिक महाराष्ट्र के आदि कैलाश 20-20 के संचालक भरत जोशी और उनके सहयोगियों ने एक वर्ष पूर्व स्थापित किया था। 28 फुट ऊंचे इस त्रिशूल का वजन 150 किलो है। इसे तीन हिस्सों में यहां पहुंचाया गया था।
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व्यास घाटी में और भी हैं दर्शनीय स्थल
पिथौरागढ़। धारचूला की व्यास घाटी में आदि कैलाश और ॐ पर्वत के साथ ही कई और भी दर्शनीय स्थल हैं। कुछ स्थल माता पार्वती और गणेश के नाम पर तो अन्य स्थल पांडवों के नाम पर हैं। गणेश पर्वत, गौरी कुंड, कुंती किला, पार्वती मुकुट, पांडव पर्वत, व्यास गुफा, नाग पर्वत, नाभि पर्वत, कालापानी में काली मंदिर प्रमुख रूप से शामिल हैं।

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शिव धाम का नाम अब होगा कैलाश धाम
पिथौरागढ़। गुंजी में प्रस्तावित शिव धाम अब कैलाश धाम के नाम से जाना जाएगा। पिथौरागढ़ के जिला पर्यटन अधिकारी कीर्ति चंद्र आर्य ने बताया कि देश के बनारस शहर में पहले से ही शिव धाम बना हुआ है। एक ही नाम से दो धाम हो जाने के कारण प्रस्तावित धाम का नाम बदलने का निर्णय लिया गया है। अब शिव धाम के स्थान पर कैलाश धाम होगा। डीपीआर बनाने का काम अंतिम चरण में है।
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